
पटना। राजधानी पटना समेत 11 प्रमुख शहरों के पास राज्य सरकार सैटेलाइट टॉउनशिप विकसित करने जा रही है। इन सभी टॉउनशिप के अपने अलग-अलग नाम होंगे। इससे संबंधित अधिसूचना नगर विकास एवं आवास विभाग के स्तर से जारी होने के साथ ही संबंधित शहरों के आसपास चिन्हित इलाकों में जमीन की खरीद-बिक्री, हस्तांतरण एवं भूमि के विकास या भवनों के निर्माण पर रोक लग जाएगी। यह अधिसूचना विभाग के स्तर से जल्द जारी होने की संभावना है। यह रोक 2027 तक रहेगी। सूबे के नए मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित मंत्रिमंडल की पहली बैठक में कुल 22 एजेंडों पर मुहर लगी, जिसमें सैटेलाइट शहरों से संबंधित एजेंडा को विस्तार दिया गया।
कैबिनेट बैठक के फैसले और अधिकारियों की जानकारी
कैबिनेट की बैठक के बाद इसमें लिए निर्णयों के बारे में मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री अरविंद कुमार चौधरी ने विस्तृत जानकारी दी। इस मौके पर अपने-अपने विभागों से जुड़े विषयों पर विस्तार से जानकारी देने के लिए संबंधित विभागों के सचिव भी मौजूद थे।
टॉउनशिप के नाम और शहरों की सूची
नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने बताया कि पटना के पास विकसित होने वाले टॉउनशिप का नाम पाटलिपुत्रा होगा। इसी तरह सोनपुर के टॉउनशिप का नाम हरिहरनाथपुरम, गयाजी का मगध, पूर्णिया का पूर्णिया, छपरा का सारण, सीतामढ़ी का सीतापुरम, सहरसा का कोसी, मुंगेर का अंग, मुजफ्फरपुर का तिरहूत, भागलपुर का विक्रमशीला और दरभंगा के टॉउनशिप का नाम मिथिला रखा गया है।
जमीन खरीद-बिक्री और निर्माण पर रोक
इससे संबंधित विभागीय अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि किस शहर में तैयार होने वाले टॉउनशिप का क्या स्वरूप होगा। इसके कोर क्षेत्र का विस्तार विशेष क्षेत्र तक कहां से कहां तक होगा। अधिसूचना में इलाका चिन्हित होने के बाद इन सभी इलाकों में जमीन की खरीद-बिक्री या स्थानांतरण समेत अन्य सभी गतिविधि पर आगामी एक वर्ष के लिए रोक लग जाएगी।
मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, छपरा और भागलपुर में यह प्रतिबंध 30 जून 2027 तक के लिए रहेगी। जबकि अन्य जिलों पटना, सोनपुर, गयाजी, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया और मुंगेर में यह रोक 31 मार्च 2027 तक रहेगी। यह रोक जमीन की सीमांकन प्रक्रिया जारी रहने तक रहेगी। अगर किसी शहर में यह प्रक्रिया पहले पूरी कर ली जाती है, तो रोक पहले भी हट सकती है।
टॉउनशिप का विस्तार और विकास योजना
प्रधान सचिव ने बताया कि हर टॉउनशिप का विस्तार कोर क्षेत्र से विशेष क्षेत्र की तरफ होगा। इसका क्षेत्रफल फिलहाल 800 से 1200 एकड़ तक होगा। भविष्य में इसका विस्तार इससे 10 गुणा अधिक तक किया जा सकता है। टॉउनशिप के लिए जमीन का अधिग्रहण लैंड पुलिंग, ट्रांजिट समेत अन्य माध्यमों से किया जाएगा।
शहरीकरण और रोजगार के अवसर
उन्होंने कहा कि राज्य में टॉउनशिप के विकास से सुनियोजित शहरीकरण एवं मास्टर प्लान आधारित विकास सुनिश्चित होगा। इससे आर्थिक गतिविधि केंद्रों के निर्माण के साथ-साथ राज्य की अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक परिवर्तन होगा। साथ ही रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे तथा नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाली शहरी सुविधाएं मिलेगी। इनके विकास से मौजूदा शहरों पर भार कम होगा तथा शहरी विस्तार योजनाबद्ध रूप से हो सकेगा। निजी या संस्थागत निवेश में बढ़ोतरी होगी।
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- अंकिता कुमारी पत्रकारिता की छात्रा हैं। वर्तमान में वह संजीवनी समाचार डॉट कॉम के साथ इंटर्नशिप कर रही हैं और समाचार लेखन व फील्ड रिपोर्टिंग में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई है।
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