Rail Kavach 4.0: भारतीय रेलवे की सुरक्षा को मिली हाईटेक ढाल, कवच 4.0 से सजेगा पूरा रेलवे नेटवर्क
मथुरा-कोटा रेल खंड पर स्वदेशी 'कवच 4.0' प्रणाली लागू

रेलवे डेस्क। भारतीय रेलवे ने देश की सबसे व्यस्त रेल लाइनों में शुमार दिल्ली-मुंबई मार्ग के मथुरा-कोटा सेक्शन पर स्वदेशी रूप से विकसित आधुनिक ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच 4.0’ को सफलतापूर्वक सक्रिय कर दिया है। यह कदम रेलवे की सुरक्षा तकनीकों के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि “कवच जैसी उन्नत प्रणाली विकसित देशों में स्थापित करने में कई दशकों का समय लगा, जबकि भारत में यह उपलब्धि रिकॉर्ड समय में हासिल की गई है। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान का प्रमाण है।”
क्या है कवच 4.0?
कवच 4.0 एक स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जिसे आरडीएसओ ने जुलाई 2024 में मंजूरी दी थी। यह सिस्टम लोको पायलट को कोहरे जैसी स्थिति में भी सिग्नल की जानकारी कैब के अंदर उपलब्ध कराता है और आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित ब्रेकिंग करता है।
- सुरक्षा स्तर: SIL-4 (सुरक्षा डिजाइन का उच्चतम स्तर)
- गति अनुमोदन: 160 किमी/घंटा तक
- विकास वर्ष: 2015
- पहला ऑपरेशनल प्रमाणन: 2018 (दक्षिण-मध्य रेलवे में)
- नया संस्करण कवच 4.0: मई 2025 में स्वीकृत
कवच 4.0 की कार्यप्रणाली और जटिल संरचना
| घटक | विवरण |
|---|---|
| RFID टैग | हर 1 किमी पर और सभी सिग्नलों पर लगाए गए; ट्रेन की सटीक लोकेशन बताते हैं। |
| दूरसंचार टावर | पटरियों के किनारे हर कुछ किलोमीटर पर; लोको और स्टेशन कवच से संवाद करते हैं। |
| लोको कवच | इंजन में स्थापित, सिग्नल और गति डेटा प्राप्त करता है, ब्रेकिंग सिस्टम से जुड़ा होता है। |
| स्टेशन कवच | स्टेशन और ब्लॉक सेक्शन पर लगे, सिग्नलिंग और गति नियंत्रण में मदद करता है। |
| OFC (ऑप्टिकल फाइबर) | सभी सिस्टम को जोड़ने के लिए ट्रैक के साथ बिछाई गई है। |
| सिग्नलिंग सिस्टम | सभी कवच यूनिट्स से समन्वय कर गति और सुरक्षा नियंत्रण सुनिश्चित करता है। |
| क्रमांक | घटक | स्थापना की गई मात्रा |
|---|---|---|
| 1 | ऑप्टिकल फाइबर | 5,856 किमी |
| 2 | दूरसंचार टावर | 619 |
| 3 | स्टेशन कवच | 708 |
| 4 | लोको कवच | 1,107 |
| 5 | ट्रैकसाइड उपकरण | 4,001 रूट किलोमीटर (RKM) |
प्रशिक्षण और शैक्षणिक पहल
30,000+ रेलवे कर्मियों को कवच पर प्रशिक्षण दिया जा चुका है।IRISSET ने 17 इंजीनियरिंग संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं ताकि कवच को B.Tech पाठ्यक्रम में शामिल किया जा सके।
सुरक्षा पर बड़ा निवेश
भारतीय रेलवे हर साल ₹1 लाख करोड़ से अधिक की राशि रेल सुरक्षा से संबंधित परियोजनाओं में निवेश कर रही है। कवच के अलावा कई अन्य पहल भी इसी बजट के तहत चल रही हैं।
कवच 4.0 का सफल कार्यान्वयन न सिर्फ भारतीय रेलवे की तकनीकी क्षमता को प्रदर्शित करता है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की नीति को भी पुष्ट करता है। आने वाले 6 वर्षों में पूरे भारत के रेलवे नेटवर्क पर कवच प्रणाली लागू करने का लक्ष्य रेलवे ने तय किया है, जो भारत को विश्व स्तरीय रेल सुरक्षा तकनीकों में अग्रणी बना देगा।
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