
छपरा। हत्या के एक मामले में करीब पांच साल एक माह तक न्यायिक हिरासत में रहने के बाद अभियुक्त परवेज आलम को अदालत ने बाइज्जत बरी कर दिया। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश पंचम, सारण की अदालत ने मढ़ौरा थाना कांड संख्या 490/21 से जुड़े सत्र वाद संख्या 19/23 में उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर परवेज आलम को हत्या के आरोप से दोषमुक्त करने का आदेश दिया। परवेज आलम 20 अगस्त 2021 से मंडल कारा, छपरा में न्यायिक हिरासत में थे।
मामले में अभियुक्त आर्थिक रूप से कमजोर था। इसी कारण उसकी ओर से मुकदमे की पैरवी जिला विधिक सेवा प्राधिकार के लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के माध्यम से की गयी। बचाव पक्ष की ओर से मुख्य डिफेंस काउंसिल अधिवक्ता पूर्णेन्दु रंजन ने न्यायालय के समक्ष मामले से जुड़े तथ्यों, साक्ष्यों और कानूनी पहलुओं को रखा।
अभियोजन की ओर से पेश किए गए 10 गवाह
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 10 साक्षियों के साक्ष्य कराए गए। इसके बाद न्यायालय में दोनों पक्षों की ओर से अपनी-अपनी दलीलें प्रस्तुत की गयीं। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों, प्रस्तुत तर्कों और मामले के कानूनी पहलुओं का परिशीलन करने के बाद अभियुक्त परवेज आलम को दोषी साबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया और उन्हें आरोपों से बरी करने का आदेश दिया।
पांच साल से अधिक समय तक रहे न्यायिक हिरासत में
परवेज आलम 20 अगस्त 2021 से मंडल कारा, छपरा में न्यायिक हिरासत में थे। मामले की सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान वह लगातार हिरासत में रहे। अब अदालत के आदेश के बाद उन्हें हत्या के आरोप से राहत मिली है। यह मामला मढ़ौरा थाना कांड संख्या 490/21 से संबंधित है, जिसमें आगे चलकर सत्र वाद संख्या 19/23 के तहत सुनवाई हुई।
आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण मिली निःशुल्क कानूनी सहायता
परवेज आलम की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण मुकदमे की पैरवी जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से करायी गयी। लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के तहत उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध करायी गयी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता पूर्णेन्दु रंजन ने न्यायालय में मामले से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों का विश्लेषण करते हुए अपना पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से कानूनी बिंदुओं पर भी दलीलें प्रस्तुत की गयीं।
अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर सुनाया फैसला
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश पंचम रवि शंकर ने आदेश पारित किया। अदालत ने अभियुक्त को निर्दोष पाते हुए बाइज्जत बरी कर दिया।
अदालत का यह आदेश मामले की न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर उपलब्ध साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद आया है। इससे स्पष्ट है कि आपराधिक मामलों में आरोप और दोषसिद्धि अलग-अलग कानूनी अवस्थाएं हैं और अंतिम निर्णय न्यायालय के साक्ष्य परीक्षण के आधार पर होता है।
लीगल एड टीम के सहयोग की सराहना
मामले की पैरवी में सहयोग के लिए मुख्य सहायक अरमान अशरफी तथा कर्मियों सूरज पाण्डेय, अजीत कुमार शर्मा और अक्षय कुमार सिंह के प्रति भी आभार व्यक्त किया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इस मामले में भी लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के जरिए बचाव पक्ष को कानूनी प्रतिनिधित्व मिला।
फैसले के बाद मिली राहत
लगभग पांच साल एक माह तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत से बरी होने का आदेश परवेज आलम के लिए बड़ी कानूनी राहत के रूप में सामने आया है। मामले में अभियोजन के 10 साक्षियों के बयान, दोनों पक्षों की दलील और उपलब्ध अभिलेखों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने अपना निर्णय सुनाया। मढ़ौरा थाना कांड संख्या 490/21 से जुड़े इस मामले में अब अदालत के आदेश के अनुरूप आगे की आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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