बिहार

‘बाहर से पानी नहीं ला सकते’ कहकर 50 रुपये में बेचा पानी, सिनेपॉलिस-कोका-कोला पर 85 हजार का जुर्माना

सिनेमा हॉल में पानी की मनमानी कीमत वसूली, आयोग ने सिनेपॉलिस-कोका-कोला पर ठोका 85 हजार का जुर्माना

पटना। सिनेमा हॉल में फिल्म देखने पहुंचे दर्शक को 20 रुपये की कीमत वाले पैकेज्ड पेयजल के लिए 50 रुपये चुकाने के लिए मजबूर करना सिनेपॉलिस सिनेमा हॉल और कोका-कोला कंपनी को महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पटना ने मामले की सुनवाई करते हुए इसे उपभोक्ता के साथ अनुचित एवं प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार माना है। आयोग ने दोनों पक्षों को संयुक्त रूप से परिवादी को 25 हजार रुपये क्षतिपूर्ति और 10 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में देने का आदेश दिया है। इसके अलावा 50 हजार रुपये राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराने का निर्देश दिया गया है। इस तरह आयोग ने कुल 85 हजार रुपये की राशि जमा/भुगतान करने का आदेश दिया है।

यह आदेश उपभोक्ता शिकायत संख्या 579/2016 में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पटना के अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्र और सदस्य रजनीश कुमार ने 5 अक्टूबर 2026 को पारित किया। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि उपभोक्ता को बाहर से पानी लाने से रोककर उसी उत्पाद को अधिक कीमत पर खरीदने के लिए बाध्य करना स्वीकार्य व्यापार व्यवहार नहीं है। आयोग ने पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर समेत अन्य उत्पादों की कीमतों को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं।

20 रुपये की बोतल के लिए वसूले 50 रुपये

मामला वर्ष 2016 का है। परिवादी के अनुसार, 23 सितंबर 2016 को वह पटना स्थित सिनेपॉलिस थिएटर में फिल्म देखने गया था। फिल्म देखने के दौरान उसे पीने के लिए पैकेज्ड पेयजल खरीदना पड़ा। आरोप है कि सिनेमा हॉल में पानी की बोतल के लिए उससे 50 रुपये लिए गए, जबकि उसी उत्पाद की खुले बाजार में कीमत करीब 20 रुपये थी।

परिवादी ने अधिक कीमत वसूले जाने पर आपत्ति जताई। उसका कहना था कि सिनेमा हॉल परिसर में पानी की कीमत सामान्य बाजार की तुलना में ढाई गुना तक अधिक थी। इसके साथ ही बाहर से पानी लेकर सिनेमा हॉल में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई। ऐसे में उसके पास सिनेमा हॉल परिसर से ही पानी खरीदने का विकल्प बचा और उसे कथित तौर पर अधिक कीमत चुकानी पड़ी।

बाहर से पानी लाने पर रोक को भी माना अहम

आयोग के समक्ष मामले की सुनवाई के दौरान सिर्फ पानी की कीमत का मुद्दा ही नहीं, बल्कि उपभोक्ता को बाहर से पानी लाने से रोकने का पहलू भी महत्वपूर्ण रहा। आयोग ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर माना कि यदि किसी उपभोक्ता को बाहर से पैकेज्ड पानी लाने से रोका जाता है और परिसर में वही उत्पाद अधिक कीमत पर खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है, तो यह उपभोक्ता के हितों के खिलाफ व्यापारिक व्यवहार हो सकता है।

इस मामले में आयोग ने इसी परिस्थिति को आधार बनाते हुए सिनेमा हॉल में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर की बिक्री और मूल्य निर्धारण को लेकर आपत्ति दर्ज की। आयोग का आदेश इस बात पर केंद्रित है कि उपभोक्ता को किसी खास परिसर में मौजूद होने की मजबूरी का फायदा उठाकर समान उत्पाद के लिए मनमानी कीमत नहीं वसूली जानी चाहिए।

आयोग ने लगाया 85 हजार रुपये का आर्थिक दंड

जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले में सिनेपॉलिस सिनेमा हॉल और कोका-कोला कंपनी को संयुक्त रूप से जिम्मेदार मानते हुए आर्थिक राहत का आदेश दिया है। आदेश के मुताबिक परिवादी को 25 हजार रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में दिए जाएंगे। इसके अलावा उसे मुकदमे में हुए खर्च के लिए 10 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में देने होंगे।

आयोग ने उपभोक्ता हित को ध्यान में रखते हुए 50 हजार रुपये राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराने का भी निर्देश दिया है। इस प्रकार आदेश के तहत कुल 85 हजार रुपये की राशि का भुगतान और जमा करना होगा। यह राशि केवल व्यक्तिगत क्षतिपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि उपभोक्ता कल्याण कोष में राशि जमा कराने का निर्देश भी उपभोक्ता अधिकारों के व्यापक संरक्षण से जुड़ा है।

एक ही उत्पाद की मनमानी दोहरी कीमत पर रोक

आयोग ने अपने आदेश में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर अथवा अन्य उत्पादों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। आदेश के अनुसार किसी समान उत्पाद के लिए उपभोक्ता की परिस्थिति का लाभ उठाते हुए मनमाने तरीके से अलग-अलग कीमत निर्धारित कर उसकी बिक्री नहीं की जा सकती। खासकर तब, जब उपभोक्ता को वैकल्पिक स्रोत से उसी उत्पाद को खरीदने या अपने साथ लाने से रोका जा रहा हो।

सिनेमा हॉल जैसे स्थानों पर उपभोक्ता के पास अक्सर सीमित विकल्प होते हैं। फिल्म देखने के दौरान यदि बाहर से खाद्य पदार्थ या पेयजल ले जाने पर रोक है, तो परिसर के भीतर उपलब्ध उत्पाद ही उसकी जरूरत पूरी करते हैं। ऐसे में कीमत तय करने के तरीके और उपभोक्ता को उपलब्ध विकल्प आयोग की नजर में महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

बोतल पर MRP स्पष्ट और पठनीय रखने का निर्देश

आयोग ने पैकेज्ड उत्पादों की बिक्री को लेकर अधिकतम खुदरा मूल्य यानी MRP को भी स्पष्ट और पठनीय रूप से प्रदर्शित करने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य यह है कि उपभोक्ता को उत्पाद खरीदते समय उसकी निर्धारित अधिकतम खुदरा कीमत की जानकारी आसानी से मिल सके।

पैकेज्ड पेयजल जैसी रोजमर्रा की वस्तुओं में उपभोक्ता के लिए बोतल पर अंकित जानकारी महत्वपूर्ण होती है। यदि कीमत स्पष्ट रूप से दिखाई देती है तो ग्राहक खरीदारी से पहले यह समझ सकता है कि उससे किस दर पर भुगतान लिया जा रहा है। आयोग के निर्देश का मकसद इसी पारदर्शिता को सुनिश्चित करना है।

45 दिनों में करना होगा आदेश का अनुपालन

आयोग ने आदेश के अनुपालन के लिए 45 दिनों की समयसीमा निर्धारित की है। यानी संबंधित पक्षों को निर्धारित अवधि के भीतर परिवादी को क्षतिपूर्ति और वाद व्यय की राशि देने के साथ राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में भी निर्धारित राशि जमा करनी होगी।

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समयसीमा में अनुपालन नहीं किया गया तो संबंधित राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय होगा। इस तरह आयोग ने आदेश के अनुपालन को लेकर समयसीमा और वित्तीय दायित्व दोनों स्पष्ट कर दिए हैं।

उपभोक्ता संरक्षण मंत्रालय और विधिक माप विज्ञान विभाग को भी निर्देश

मामले में आयोग ने उपभोक्ताओं को अनुचित मूल्य वसूली से बचाने के लिए विधिक माप विज्ञान विभाग और उपभोक्ता संरक्षण मंत्रालय से भी आवश्यक कदम उठाने को कहा है। आयोग ने एक ही उत्पाद के लिए मनमाने तरीके से दोहरे मूल्य निर्धारण की अनुमति नहीं देने की दिशा में कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

इस निर्देश का व्यापक असर पैकेज्ड उत्पादों की बिक्री पर पड़ सकता है। खासकर ऐसे स्थानों पर जहां उपभोक्ता को परिसर की नीतियों के कारण बाहर से सामान लाने की अनुमति नहीं होती। आयोग का संदेश साफ है कि ऐसी स्थिति को उपभोक्ता से मनमानी कीमत वसूलने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।

2016 की शिकायत पर 10 साल बाद आया फैसला

इस मामले की एक खास बात यह भी है कि उपभोक्ता शिकायत वर्ष 2016 में दाखिल की गई थी और आयोग ने अब, वर्ष 2026 में अपना फैसला सुनाया है। करीब एक दशक तक चली इस कानूनी प्रक्रिया के बाद आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में राहत का आदेश दिया है।

मामले में परिवादी ने शुरू से ही यह आरोप लगाया था कि सिनेमा हॉल परिसर में उसे पैकेज्ड पानी खरीदने के लिए मजबूर किया गया और इसके लिए बाजार की तुलना में काफी अधिक कीमत वसूली गई। आयोग के आदेश के बाद अब संबंधित पक्षों को क्षतिपूर्ति, वाद व्यय और उपभोक्ता कल्याण कोष की राशि निर्धारित समय में जमा करनी होगी।

सिनेमा देखने वालों के लिए भी अहम संदेश

यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण है जो सिनेमा हॉल, मॉल, एयरपोर्ट, मनोरंजन स्थल या अन्य ऐसे परिसरों में खरीदारी करते हैं जहां बाहर से खाद्य पदार्थ या पेयजल ले जाने पर अलग-अलग नियम लागू होते हैं। किसी परिसर में प्रवेश करने के बाद उपभोक्ता की पसंद सीमित हो सकती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि उसे किसी उत्पाद के लिए मनमानी कीमत चुकाने के लिए बाध्य किया जाए।

इस मामले में आयोग ने उपभोक्ता के उस अधिकार पर जोर दिया है जिसमें उसे उत्पाद की कीमत और व्यापारिक शर्तों की जानकारी स्पष्ट रूप से मिलनी चाहिए। पैकेज्ड उत्पाद खरीदते समय MRP देखना और भुगतान के समय बिल लेना उपभोक्ता के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। किसी तरह की आपत्ति होने पर बिल या भुगतान का रिकॉर्ड आगे शिकायत के दौरान उपयोगी साक्ष्य बन सकता है।

फैसले की बड़ी बातें एक नजर में

बिंदुआयोग का आदेश
मामलाउपभोक्ता शिकायत संख्या 579/2016
आदेश की तारीख05 अक्टूबर 2026
आयोगजिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पटना
अध्यक्षप्रेम रंजन मिश्र
सदस्यरजनीश कुमार
विवादपैकेज्ड पेयजल की अधिक कीमत वसूली
शिकायत में पानी की कीमत₹50
खुले बाजार में बताई गई कीमत₹20
परिवादी को क्षतिपूर्ति₹25,000
वाद व्यय₹10,000
राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष₹50,000
कुल राशि₹85,000
अनुपालन की समयसीमा45 दिन
देरी पर ब्याज9% वार्षिक

उपभोक्ता के लिए क्या है इस फैसले का मतलब?

आयोग का यह आदेश केवल एक व्यक्ति को क्षतिपूर्ति देने तक सीमित नहीं है। इसमें उस स्थिति पर सवाल उठाया गया है जहां किसी परिसर में उपभोक्ता की पसंद सीमित करके उसे उसी उत्पाद के लिए अधिक कीमत चुकाने को मजबूर किया जाए। पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर रोजमर्रा की जरूरत की वस्तु है और ऐसे उत्पाद की बिक्री में कीमत की पारदर्शिता उपभोक्ता हित का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

फैसले से यह संदेश भी जाता है कि उपभोक्ता किसी भी व्यावसायिक प्रतिष्ठान में खरीदारी करते समय अपने अधिकारों के प्रति सजग रहे। उत्पाद की MRP, बिल, कीमत और बिक्री की शर्तों को लेकर संदेह होने पर सवाल पूछना उसका अधिकार है। जरूरत पड़ने पर उपभोक्ता आयोग में शिकायत भी की जा सकती है।

पटना जिला उपभोक्ता आयोग का यह फैसला पैकेज्ड पेयजल की कीमत और उपभोक्ता के विकल्पों से जुड़े विवाद में महत्वपूर्ण आदेश के रूप में सामने आया है। सिनेपॉलिस सिनेमा हॉल और कोका-कोला कंपनी को संयुक्त रूप से 25 हजार रुपये क्षतिपूर्ति, 10 हजार रुपये वाद व्यय और 50 हजार रुपये राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा करने का निर्देश दिया गया है। यानी कुल 85 हजार रुपये की जिम्मेदारी तय की गई है।

आयोग ने साथ ही पैकेज्ड उत्पादों पर MRP को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने और उपभोक्ताओं को बाहर से उत्पाद लाने से रोककर समान वस्तु के लिए मनमानी कीमत वसूलने जैसी स्थिति पर रोक लगाने की दिशा में निर्देश दिए हैं। आदेश का पालन 45 दिनों में करना होगा और देरी की स्थिति में निर्धारित राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। यह फैसला उपभोक्ताओं के लिए अपने अधिकारों और खरीदारी के दौरान कीमत की पारदर्शिता को लेकर जागरूक रहने का स्पष्ट संदेश भी देता है।

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Ganpat Aryan
Ganpat Aryan
वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।

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वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।

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