नोट गिनने के लिए बुलानी पड़ी मशीन! कार्यपालक अभियंता के 5 ठिकानों से 52.20 लाख कैश, 30 लाख के गहने बरामद
इंजीनियर के ठिकानों पर छापे में खुला संपत्ति का खेल

पटना। बिहार में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने योजना एवं विकास विभाग में तैनात कार्यपालक अभियंता नारद कुमार दास के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। गुरुवार सुबह एक साथ शुरू हुई इस कार्रवाई में भागलपुर, मुंगेर, पटना और मुजफ्फरपुर में उनके पांच ठिकानों को जांच के दायरे में लिया गया। ईओयू की अलग-अलग टीमों ने आवास से लेकर सरकारी कार्यालय और संपत्ति से जुड़े ठिकानों तक दस्तावेज, बैंक खातों, जमीन-जायदाद, निवेश और नकदी की पड़ताल की। शुरुआती जांच में नारद कुमार दास के पास उनकी ज्ञात और वैध आय के मुकाबले 83 लाख 53 हजार 200 रुपये की अनुपातहीन संपत्ति होने का प्रथमदृष्टया साक्ष्य मिला है, जो उनकी ज्ञात आय से करीब 64.93 प्रतिशत अधिक बताई गई है।
छापेमारी की सबसे बड़ी तस्वीर मुजफ्फरपुर और मुंगेर से सामने आई, जहां नकदी की बरामदगी ने जांच एजेंसी का ध्यान खींचा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मुजफ्फरपुर के काजी मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र के नया टोला स्थित राधिका अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 2एफ से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई, जबकि मुंगेर स्थित किराये के आवास से भी नकदी और गहने मिले। इतनी बड़ी संख्या में नोटों की गिनती के लिए बैंक से कैश काउंटिंग मशीन मंगवाने की जानकारी भी सामने आई है।
नोट: शुरुआती और बाद की मीडिया रिपोर्टों में मुजफ्फरपुर से बरामद नकदी की राशि को लेकर अंतर दिखाई दे रहा है। इसलिए अंतिम खबर में कुल नकदी को ईओयू की अंतिम जब्ती सूची के अनुरूप अपडेट करना उचित होगा। उपलब्ध रिपोर्टों में मुजफ्फरपुर से 50 लाख से 51.5 लाख रुपये तक की राशि का उल्लेख है, जबकि आपके उपलब्ध विभागीय विवरण में मुजफ्फरपुर से 50.50 लाख और मुंगेर से 1.70 लाख रुपये, यानी कुल 52.20 लाख रुपये बताया गया है।
पांच ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई
ईओयू ने कार्रवाई के लिए नारद कुमार दास से जुड़े पांच प्रमुख ठिकानों को चिह्नित किया। इनमें भागलपुर के तिलकामांझी स्थित पैतृक आवास, मुंगेर के कासिम बाजार क्षेत्र के बेलन बाजार बंगाली टोला स्थित आवास, मुंगेर स्थित स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन (LAEO) का सरकारी कार्यालय, मुजफ्फरपुर के नया टोला स्थित राधिका अपार्टमेंट का फ्लैट और पटना के रूपसपुर थाना क्षेत्र के कुसुमपुरम स्थित ठिकाना शामिल हैं। सभी स्थानों पर अलग-अलग टीमों ने एक साथ तलाशी शुरू की, ताकि संपत्ति और वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों को इकट्ठा किया जा सके।
कार्रवाई के लिए ईओयू ने विशेष न्यायालय निगरानी, पटना से तलाशी अधिपत्र प्राप्त किया था। इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में अलग-अलग टीमें गठित की गईं। ईओयू थाना कांड संख्या 28/26, दिनांक 7 अक्टूबर 2026 के तहत मामला दर्ज होने के बाद अगले ही दिन तलाशी अभियान शुरू किया गया। मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(बी) के तहत दर्ज किया गया है।
83.53 लाख की अनुपातहीन संपत्ति का प्रथमदृष्टया साक्ष्य
ईओयू की प्राथमिक जांच इस कार्रवाई का सबसे अहम आधार है। जांच एजेंसी के अनुसार नारद कुमार दास ने अपनी ज्ञात और वैध आय के स्रोतों की तुलना में 83,53,200 रुपये अधिक की संपत्ति अर्जित की है। यह राशि उनकी ज्ञात वैध आय से लगभग 64.93 प्रतिशत अधिक आंकी गई है। इसका मतलब यह है कि जांच एजेंसी को फिलहाल जितनी संपत्ति का हिसाब मिला है, उसके और उनकी वैध आय के बीच बड़ा अंतर सामने आया है।
हालांकि, यह आंकड़ा अभी अंतिम नहीं माना जा सकता। ईओयू की तलाशी और वित्तीय जांच पूरी होने के बाद बैंक खातों, निवेश, जमीन, बीमा, आभूषण और अन्य चल-अचल संपत्तियों का मिलान किया जाएगा। जांच में यदि ऐसे और निवेश या संपत्तियां सामने आती हैं, जिनका स्रोत स्पष्ट नहीं है, तो अनुपातहीन संपत्ति का आंकड़ा बढ़ सकता है। यही वजह है कि फिलहाल एजेंसी की ओर से सामने आया 83.53 लाख रुपये का आंकड़ा प्रारंभिक जांच का आंकड़ा है।
2014 में सहायक अभियंता के रूप में शुरू किया था सफर
ईओयू की जानकारी के अनुसार नारद कुमार दास मूल रूप से भागलपुर के तिलकामांझी क्षेत्र के रहने वाले हैं। उन्होंने वर्ष 2014 में जल संसाधन विभाग में सहायक अभियंता के रूप में सरकारी सेवा शुरू की थी। करीब 12 वर्षों के सेवाकाल में पदोन्नति के बाद वे कार्यपालक अभियंता के पद तक पहुंचे। वर्तमान में वे प्रतिनियुक्ति पर योजना एवं विकास विभाग के अंतर्गत मुंगेर में अभियंत्रण संगठन से जुड़े कार्य में तैनात रहे हैं।
मुंगेर में उनकी तैनाती स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल से जुड़ी बताई गई है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार उनके पास जिला परिषद के कार्यपालक अभियंता का अतिरिक्त प्रभार भी था। ऐसे में उनकी सरकारी भूमिका में विकास कार्यों से जुड़े तकनीकी और वित्तीय मामलों की जिम्मेदारी भी रही। ईओयू अब यह भी देख रही है कि सेवाकाल के दौरान अर्जित संपत्ति, निवेश और बैंकिंग लेन-देन उनकी वैध आय के अनुपात में हैं या नहीं।
मुजफ्फरपुर के फ्लैट में नोटों की गड्डियां
छापेमारी के दौरान सबसे अधिक चर्चा मुजफ्फरपुर के नया टोला स्थित राधिका अपार्टमेंट के फ्लैट की तलाशी को लेकर रही। यह फ्लैट काजी मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र में स्थित है। ईओयू की टीम ने यहां दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के साथ नकदी की भी पड़ताल की। रिपोर्टों के मुताबिक बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने के बाद नोटों की गिनती के लिए मशीन मंगानी पड़ी।
एक रिपोर्ट के अनुसार नोटों के बंडल कमरे में गद्दे के नीचे रखे मिले थे। हालांकि, बरामदगी और उसके स्वामित्व से जुड़ी अंतिम स्थिति ईओयू की आधिकारिक जब्ती सूची और जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। इसी कारण खबर में नकदी को लेकर अंतिम आंकड़ा प्रकाशित करते समय आधिकारिक दस्तावेज को आधार बनाना सबसे सुरक्षित रहेगा।
मुंगेर के किराये के मकान से कैश और गहने
मुंगेर के कासिम बाजार थाना क्षेत्र के बेलन बाजार बंगाली टोला स्थित किराये के आवास की तलाशी भी कार्रवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। यहां से नकदी के साथ गहनों की बरामदगी की जानकारी सामने आई है। आपके उपलब्ध विभागीय विवरण के अनुसार यहां से 1.70 लाख रुपये नकद और करीब 30 लाख रुपये मूल्य के गहने बरामद किए गए हैं। गहनों की वास्तविक कीमत, शुद्धता और स्वामित्व की पुष्टि के लिए जांच की प्रक्रिया चल रही है।
ईओयू ने तलाशी के दौरान गहनों की खरीद से संबंधित रसीदें भी बरामद की हैं। इसका मतलब यह है कि जांच एजेंसी केवल गहनों की मौजूदगी दर्ज नहीं कर रही, बल्कि यह भी देख रही है कि उनकी खरीद कब हुई, किसके नाम पर हुई, भुगतान किस खाते से हुआ और उस समय संबंधित व्यक्ति की आय कितनी थी। मुंगेर में गहनों की शुद्धता और वजन की जांच के लिए सोनार को बुलाए जाने की भी रिपोर्ट है।
भागलपुर के पैतृक आवास से जमीन के दस्तावेज
ईओयू की टीम ने भागलपुर स्थित पैतृक आवास की भी तलाशी ली। यहां से जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज और गहनों की खरीद से संबंधित रसीदें मिलने की जानकारी है। जमीन के दस्तावेज जांच के लिहाज से इसलिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जमीन और मकान में किया गया निवेश अक्सर संपत्ति के वास्तविक मूल्य का आकलन करने में अहम भूमिका निभाता है।
ईओयू अब यह मिलान करेगी कि संबंधित जमीन कब खरीदी गई, खरीद के समय उसकी कीमत क्या थी, भुगतान किस माध्यम से हुआ और रकम का स्रोत क्या था। जमीन के सरकारी मूल्य और बाजार मूल्य के बीच अंतर भी जांच में महत्वपूर्ण हो सकता है। यही कारण है कि पैतृक आवास से मिले भूमि दस्तावेजों की जांच इस कार्रवाई का अहम हिस्सा मानी जा रही है।
बीमा, बैंक खातों और निवेश के दस्तावेज भी मिले
तलाशी के दौरान केवल नकदी और जमीन के दस्तावेज ही नहीं, बल्कि विभिन्न वित्तीय निवेशों से जुड़े रिकॉर्ड भी मिले हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार आदित्य बिड़ला और जीवन बीमा से संबंधित कागजात तथा विभिन्न बैंकों की पासबुक और चेकबुक बरामद की गई हैं। बैंकिंग रिकॉर्ड से जांच एजेंसी को आय और खर्च के बीच अंतर समझने में मदद मिलेगी।
ईओयू ने कुछ बैंक खातों में जमा रकम को भी जांच के दायरे में लिया है। उपलब्ध विभागीय सूचना के अनुसार विभिन्न खातों में जमा 17 लाख 15 हजार 688 रुपये की राशि फ्रिज कराई गई है। खाते फ्रीज किए जाने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच पूरी होने तक संबंधित धनराशि को हटाया या स्थानांतरित न किया जा सके।
पटना में जमीन खरीद की भी जांच
नारद कुमार दास से जुड़े संपत्ति निवेश का एक अहम सिरा पटना के रूपसपुर थाना क्षेत्र के कुसुमपुरम से जुड़ता है। ईओयू की जांच में सामने आया है कि इसी वर्ष उनकी सास बीना विद्यार्थी के नाम पर करीब 3.9 डिसमिल जमीन खरीदी गई। जमीन की चहारदीवारी भी कराई गई है और उपलब्ध जांच विवरण के अनुसार इसकी खरीद में करीब 50 लाख रुपये का निवेश किया गया।
इस जमीन का सरकारी मूल्य करीब 68.41 लाख रुपये बताया गया है, जबकि वर्तमान बाजार मूल्य करीब 1.50 करोड़ रुपये आंका गया है। सरकारी मूल्य और संभावित बाजार मूल्य के इस अंतर ने भी जांच एजेंसी का ध्यान खींचा है। हालांकि बाजार मूल्य का अंतिम निर्धारण संबंधित दस्तावेजों, स्थानीय मूल्यांकन और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
पत्नी के खाते से रकम ट्रांसफर करने की जांच
इस जमीन की खरीद में धन के प्रवाह को लेकर भी ईओयू जांच कर रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जमीन की खरीद के लिए कई स्तरों पर रकम ट्रांसफर की गई और इसमें कार्यपालक अभियंता की पत्नी के खाते से राशि दूसरे खातों में भेजे जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि रकम का वास्तविक स्रोत क्या था और अलग-अलग खातों के बीच हुए लेन-देन का जमीन खरीद से क्या संबंध है।
किसी आय से अधिक संपत्ति मामले में केवल संपत्ति का मालिकाना नाम ही पर्याप्त नहीं होता। जांच एजेंसी आम तौर पर यह देखती है कि संपत्ति खरीदने के लिए पैसा वास्तव में किसने दिया, पैसा किस खाते से निकला, किस खाते में गया और अंतिम भुगतान किसके नाम से हुआ। इसी कड़ी में बैंक स्टेटमेंट, चेकबुक, पासबुक और अन्य वित्तीय दस्तावेज ईओयू के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकते हैं।
पत्नी और सास के नाम पर संपत्ति का एंगल
जांच का दायरा केवल नारद कुमार दास के नाम दर्ज संपत्तियों तक सीमित नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार ईओयू पत्नी और सास के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों और उनसे जुड़े वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है। पत्नी के नाम पर अलग-अलग स्थानों पर जमीन खरीद और सास के नाम पर पटना में जमीन खरीद का एंगल सामने आया है।
यही वजह है कि इस मामले में दस्तावेजों की कड़ी जोड़ना जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। किसी संपत्ति का नाम किसी रिश्तेदार के नाम होना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता, लेकिन यदि जांच में यह सामने आता है कि उसका वास्तविक भुगतान किसी अन्य व्यक्ति की आय से हुआ और उसे छिपाने के लिए अलग-अलग खातों का इस्तेमाल किया गया, तो यह जांच के लिए महत्वपूर्ण तथ्य हो सकता है। अंतिम निष्कर्ष ईओयू की विस्तृत जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
हुंडई आई10 और मोटरसाइकिल भी जांच के दायरे में
मुंगेर स्थित आवास से ईओयू को हुंडई आई10 स्पोर्ट्स कार और मोटरसाइकिल से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। इसके अलावा गहनों की खरीद की कई रसीदें बरामद की गई हैं। जांच एजेंसी अब इन वाहनों और अन्य चल संपत्तियों की खरीद की तारीख, भुगतान के स्रोत और संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड का मिलान कर सकती है।
आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जांच सिर्फ बैंक बैलेंस या जमीन तक सीमित नहीं रहती। वाहन, आभूषण, बीमा, शेयर, बॉन्ड, बैंक जमा, नकदी और अन्य निवेश भी कुल संपत्ति की गणना में शामिल किए जा सकते हैं। इसी वजह से ईओयू की टीम ने अलग-अलग ठिकानों से मिले छोटे-बड़े सभी दस्तावेजों को अपने कब्जे में लेकर उनका मिलान शुरू किया है।
कार्रवाई अभी पूरी नहीं, बढ़ सकता है संपत्ति का आंकड़ा
ईओयू की यह कार्रवाई अभी जांच के चरण में है। बिहार पुलिस मुख्यालय से संबंधित जानकारी के अनुसार तलाशी पूरी होने के बाद बरामद दस्तावेज, नकदी और अन्य साक्ष्यों का विस्तृत विवरण सामने आएगा।
प्रारंभिक जांच में सामने आया 83.53 लाख रुपये की अनुपातहीन संपत्ति का आंकड़ा भी अंतिम नहीं माना जा सकता। तलाशी के दौरान यदि अतिरिक्त बैंक खाते, जमीन, निवेश, नकदी, आभूषण या अन्य संपत्ति के दस्तावेज मिलते हैं, तो जांच एजेंसी उनका मूल्यांकन कर सकती है। इसके बाद अनुपातहीन संपत्ति की अंतिम गणना में बदलाव संभव है।
चार जिलों में कार्रवाई से सरकारी महकमे में हलचल
एक साथ चार जिलों में पांच ठिकानों पर हुई कार्रवाई ने सरकारी महकमे में हलचल पैदा कर दी है। भागलपुर में पैतृक आवास, मुंगेर में आवास और कार्यालय, मुजफ्फरपुर में फ्लैट तथा पटना में संपत्ति से जुड़े ठिकाने—इन सभी स्थानों पर एक साथ तलाशी का उद्देश्य यही था कि संभावित दस्तावेज या संपत्ति से संबंधित रिकॉर्ड को हटाने का मौका न मिले।
ईओयू की ऐसी कार्रवाई में अलग-अलग टीमों को एक साथ भेजकर तलाशी लेने की रणनीति अपनाई जाती है। इससे संपत्ति के अलग-अलग सिरों को एक ही समय पर खंगाला जा सकता है। नारद कुमार दास के मामले में भी जांच एजेंसी ने बैंकिंग दस्तावेज, जमीन, वाहन, बीमा, गहने और नकदी को एक साथ जांच के दायरे में रखा है।
अब आगे क्या करेगी EOU?
छापेमारी के बाद असली जांच दस्तावेजों के मिलान से शुरू होगी। ईओयू यह देखेगी कि अधिकारी की सेवा अवधि के दौरान उनकी कुल वैध आय कितनी रही और उस अवधि में उनके परिवार के नाम पर कितनी संपत्ति अर्जित हुई। इसके बाद खर्च, निवेश और संपत्ति की कुल राशि का तुलनात्मक आकलन किया जाएगा।
इसके साथ ही बैंक खातों में हुए लेन-देन की जांच की जाएगी। जमीन की खरीद के लिए इस्तेमाल की गई रकम, बीमा और अन्य निवेशों में जमा धन, आभूषणों की खरीद तथा वाहनों के भुगतान को आय के ज्ञात स्रोतों से मिलाया जाएगा। यदि किसी लेन-देन की कड़ी दूसरे व्यक्ति या खाते से जुड़ती है, तो उस लेन-देन का स्रोत और उद्देश्य भी जांच का हिस्सा बन सकता है।
बरामदगी और जांच का अब तक का प्रमुख ब्योरा
| जांच का बिंदु | उपलब्ध जानकारी |
|---|---|
| अधिकारी | नारद कुमार दास |
| पद | कार्यपालक अभियंता, योजना एवं विकास विभाग |
| तैनाती | मुंगेर |
| केस | EOU थाना कांड संख्या 28/26 |
| केस की तारीख | 7 अक्टूबर 2026 |
| कार्रवाई | 8 अक्टूबर 2026 |
| ठिकाने | भागलपुर, मुंगेर, पटना और मुजफ्फरपुर |
| अनुपातहीन संपत्ति | ₹83,53,200 प्रथमदृष्टया |
| ज्ञात आय से अधिक | 64.93 प्रतिशत |
| बैंक खातों में फ्रीज राशि | ₹17,15,688 |
| पटना जमीन निवेश | करीब ₹50 लाख |
| पटना जमीन का सरकारी मूल्य | करीब ₹68.41 लाख |
| पटना जमीन का अनुमानित बाजार मूल्य | करीब ₹1.50 करोड़ |
| सेवा में योगदान | 2014 में सहायक अभियंता |
पांच ठिकाने बने जांच का केंद्र
- भागलपुर: तिलकामांझी, हनुमान पथ स्थित पैतृक आवास।
- मुंगेर: कासिम बाजार, बेलन बाजार बंगाली टोला स्थित आवास।
- मुंगेर: स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल का सरकारी कार्यालय।
- मुजफ्फरपुर: काजी मोहम्मदपुर, नया टोला स्थित राधिका अपार्टमेंट का फ्लैट नंबर 2एफ।
- पटना: रूपसपुर थाना क्षेत्र के कुसुमपुरम स्थित ठिकाना।
सवाल सिर्फ नकदी का नहीं, संपत्ति के स्रोत का है
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि तलाशी के दौरान कितनी नकदी या कितने गहने मिले। असली सवाल यह है कि बरामद संपत्ति और निवेश के पीछे पैसा कहां से आया। सरकारी सेवा में रहते हुए किसी अधिकारी द्वारा अर्जित वैध आय, खर्च और संपत्ति के बीच संतुलन होना चाहिए; जांच एजेंसी का काम इसी अंतर को दस्तावेजों के आधार पर परखना है।
नारद कुमार दास के मामले में जमीन, बैंक खाते, बीमा, वाहन, आभूषण और नकदी—कई अलग-अलग वित्तीय कड़ियां सामने आई हैं। अब इन सभी कड़ियों को जोड़कर यह पता लगाया जाएगा कि प्रारंभिक जांच में सामने आया 83.53 लाख रुपये का अनुपातहीन संपत्ति का आंकड़ा अंतिम जांच में कितना रहता है। तलाशी अभियान के दौरान यदि और संपत्तियां या वित्तीय दस्तावेज सामने आते हैं तो तस्वीर और बड़ी हो सकती है।
आय से अधिक संपत्ति के मामले में कार्यपालक अभियंता नारद कुमार दास के खिलाफ EOU की कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी अधिकारियों की संपत्ति और उनके आय स्रोतों की जांच को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। चार जिलों में एक साथ पांच ठिकानों पर हुई तलाशी में नकदी, गहने, जमीन के दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड, बीमा निवेश के कागजात और वाहन से जुड़े दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई है। ईओयू के अनुसार प्रारंभिक जांच में 83.53 लाख रुपये की अनुपातहीन संपत्ति का प्रथमदृष्टया साक्ष्य मिला है, जो ज्ञात वैध आय से 64.93 प्रतिशत अधिक है।
हालांकि, इस कार्रवाई की पूरी तस्वीर अभी बाकी है। तलाशी के बाद जब्त दस्तावेजों की जांच, बैंक खातों का मिलान, जमीन और अन्य संपत्तियों का मूल्यांकन तथा धन के स्रोत की पड़ताल के बाद ही अंतिम स्थिति साफ होगी। इसलिए फिलहाल सामने आए आंकड़ों को प्रारंभिक जांच का निष्कर्ष मानना उचित है। ईओयू की जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि कथित अनुपातहीन संपत्ति की कुल राशि कितनी है और मामले में आगे क्या कानूनी कार्रवाई होती है।
1. नारद कुमार दास कौन हैं?
नारद कुमार दास योजना एवं विकास विभाग से जुड़े कार्यपालक अभियंता हैं और मुंगेर में स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल में तैनात रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2014 में सहायक अभियंता के रूप में सरकारी सेवा शुरू की थी।
2. EOU ने उनके कितने ठिकानों पर छापेमारी की?
ईओयू ने भागलपुर, मुंगेर, पटना और मुजफ्फरपुर में कुल पांच ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इनमें आवासों के अलावा मुंगेर स्थित सरकारी कार्यालय भी शामिल है।
3. नारद कुमार दास के खिलाफ कितनी अनुपातहीन संपत्ति का मामला है?
ईओयू के अनुसार प्रारंभिक जांच में 83 लाख 53 हजार 200 रुपये की अनुपातहीन संपत्ति अर्जित किए जाने का प्रथमदृष्टया साक्ष्य मिला है। यह राशि उनकी ज्ञात वैध आय से करीब 64.93 प्रतिशत अधिक बताई गई है।
4. जांच में किन संपत्तियों और दस्तावेजों की जानकारी सामने आई है?
तलाशी के दौरान नकदी, गहनों की खरीद की रसीद, जमीन से जुड़े दस्तावेज, बैंक पासबुक और चेकबुक, बीमा निवेश के कागजात तथा वाहन से जुड़े दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई है। बैंक खातों में जमा 17.15 लाख रुपये से अधिक की राशि फ्रीज किए जाने की भी जानकारी उपलब्ध है।
5. क्या 83.53 लाख रुपये की संपत्ति का आंकड़ा अंतिम है?
नहीं। यह अभी प्रारंभिक जांच का आंकड़ा है। ईओयू की तलाशी और दस्तावेजों की विस्तृत जांच पूरी होने के बाद यदि अतिरिक्त संपत्ति या निवेश सामने आता है तो अनुपातहीन संपत्ति का आंकड़ा बढ़ सकता है।
Author Profile

- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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