
छपरा। करीब सात वर्ष पुराने दहेज हत्या के मामले में छपरा न्यायालय ने बुधवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अष्टम अनिल कुमार भारद्वाज की अदालत ने बनियापुर थाना क्षेत्र के खबसी गांव निवासी अरुण राय को दहेज के लिए पत्नी को जलाकर मारने के मामले में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय ने उस पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर उसे छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
इसी मामले में साक्ष्य मिटाने के आरोप में भारतीय दंड संहिता की धारा 201/34 के तहत अदालत ने पांच वर्ष के कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड नहीं देने पर छह माह की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
बेटी के जलाए जाने की मिली थी सूचना
मामला वर्ष 2019 का है। मढ़ौरा थाना क्षेत्र के ओलहनपुर गांव निवासी सरस्वती देवी ने सात जून 2019 को बनियापुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्राथमिकी में उन्होंने बताया था कि उनकी बेटी की शादी बनियापुर थाना क्षेत्र के खबसी गांव निवासी अरुण राय के साथ हुई थी।
शादी के कुछ समय बाद ही अरुण राय और उसके परिवार के सदस्य कथित रूप से दो लाख रुपये दहेज की मांग करने लगे। दहेज की मांग को लेकर दोनों पक्षों के बीच कई बार पंचायती भी हुई, लेकिन मांग पूरी नहीं होने के कारण विवाद खत्म नहीं हुआ।
सरस्वती देवी के अनुसार, सात जून 2019 को उन्हें सूचना मिली कि उनकी बेटी को ससुराल वालों ने दहेज के लिए जला दिया है। सूचना मिलते ही वह बेटी के ससुराल पहुंचीं, जहां उनकी बेटी की मौत हो चुकी थी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और मामले की जांच शुरू की गई।
धारा 304बी और 201/34 में दाखिल हुआ आरोप पत्र
पुलिस ने मामले की जांच पूरी करने के बाद 30 सितंबर 2019 को भारतीय दंड संहिता की धारा 304बी तथा 201/34 के तहत आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। इसके बाद मामला सत्र न्यायालय में विचारण के लिए पहुंचा।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक विमल चंद ने कुल पांच गवाहों की गवाही न्यायालय में कराई। अभियोजन की ओर से प्रस्तुत गवाहों के बयान और मामले में उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने अरुण राय को दोषी पाया।
साक्ष्यों के आधार पर सुनाई सजा
अदालत ने दहेज हत्या के मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही साक्ष्य मिटाने के मामले में पांच वर्ष की सजा और जुर्माना लगाया गया। दोनों सजाएं एक साथ चलने के कारण आरोपी को समानांतर रूप से दंड भुगतना होगा।
न्यायालय के इस फैसले के बाद वर्षों से लंबित इस मामले में पीड़ित पक्ष को न्यायिक फैसला मिला। मामले में अभियोजन की ओर से प्रस्तुत गवाहों की गवाही और उपलब्ध साक्ष्यों को निर्णय का महत्वपूर्ण आधार माना गया।
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