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बिहार के विकास की नई तस्वीर गढ़ेंगे इंजीनियर, 30 मेधावी छात्रों को मिला पुरस्कार

प्रथम को टैबलेट; द्वितीय-तृतीय को 25 और 20 हजार रुपये

पटना। बिहार के विकास की नई तस्वीर तैयार करने में इंजीनियरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। गांवों को जोड़ने वाले पुल-पुलिया हों, आधुनिक इमारतें हों या बड़े तकनीकी प्रोजेक्ट, इनके पीछे इंजीनियरों की विशेषज्ञता और मेहनत होती है। इंजीनियरों के बिना विकसित बिहार की कल्पना नहीं की जा सकती। यह बात विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री शीला कुमारी ने मंगलवार को इंजीनियर्स डे के अवसर पर पटना के तारामंडल में आयोजित मेधावी छात्र प्रोत्साहन पुरस्कार समारोह-2026 में कही।

समारोह में इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक के 30 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। वहीं तारामंडल में पहली बार अत्याधुनिक पॉडकास्ट स्टूडियो की शुरुआत की गयी। मंत्री ने कहा कि यह मंच छात्रों, विशेषज्ञों, पेशेवरों और आम लोगों से सीधे संवाद के साथ तकनीकी शिक्षा, नवाचार और विभागीय उपलब्धियों को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाने में उपयोगी साबित होगा।

कर्म से बनता है बड़ा मुकाम

मंत्री शीला कुमारी ने छात्रों से कहा कि जीवन में बड़ा मुकाम केवल डिग्री से नहीं, बल्कि कर्म, मेहनत और सोच से हासिल होता है। उन्होंने सर विश्वेश्वरैया का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद कावेरी बांध जैसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्य किए, जिससे बड़े क्षेत्र को लाभ मिला। वर्ष 1955 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

उन्होंने विद्यार्थियों से विश्वेश्वरैया के जीवन से प्रेरणा लेने और अपनी तकनीकी क्षमता का इस्तेमाल समाज और बिहार के विकास के लिए करने की अपील की। मंत्री ने कहा कि पढ़ाई का उद्देश्य केवल प्रमाण पत्र या डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि अपने भीतर मानवीय संवेदना और जिम्मेदारी को बनाए रखना भी है।

उन्होंने कहा कि सिद्धार्थ अपने कर्मों से बुद्ध बने और राम अपने कर्मों से राम बने। इसलिए छात्रों को अपने कर्म और आचरण पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

38 जिलों में इंजीनियरिंग कॉलेज, 46 पॉलिटेक्निक संस्थान

मंत्री ने कहा कि बिहार में तकनीकी शिक्षा के विस्तार की दिशा में लगातार काम हुआ है। आज राज्य के सभी 38 जिलों में इंजीनियरिंग कॉलेज और 46 पॉलिटेक्निक कॉलेज स्थापित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए विद्यार्थियों को पहले दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब बिहार में ही बेहतर अवसर उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य के तकनीकी संस्थानों में बहुत कम शुल्क पर शिक्षा की व्यवस्था की गयी है। इंजीनियरिंग में 10 रुपये और पॉलिटेक्निक में 5 रुपये शुल्क पर पढ़ाई की सुविधा को उन्होंने बिहार के विद्यार्थियों के लिए बड़ी उपलब्धि बताया।

मंत्री ने कहा कि अब बिहार के विद्यार्थी राज्य में रहकर ही अच्छी तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।

30 मेधावी छात्र-छात्राओं को मिला सम्मान

समारोह में इंजीनियरिंग के 15 और पॉलिटेक्निक के 15, कुल 30 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। इनमें पांच-पांच शाखाओं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थी भी शामिल रहे।

इस वर्ष पुरस्कार राशि और प्रोत्साहन में उल्लेखनीय वृद्धि की गयी है। प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को टैबलेट, प्रमाण पत्र और स्मृति चिह्न, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वालों को 25 हजार रुपये, प्रमाण पत्र और स्मृति चिह्न तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वालों को 20 हजार रुपये, प्रमाण पत्र और स्मृति चिह्न प्रदान किए गए।

पिछले वर्ष तक प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान के लिए क्रमशः 5 हजार, 3 हजार और 2 हजार रुपये की नकद प्रोत्साहन राशि दी जाती थी। इस वर्ष मंत्री शीला कुमारी की पहल पर राशि में वृद्धि की गयी है।

प्रथम स्थान पाने वाले इंजीनियरिंग के छात्र

इंजीनियरिंग में प्रथम स्थान प्राप्त करने वालों में ईशान राज (जीईसी, वैशाली), राजीव गुप्ता (मैकेनिकल, बख्तियारपुर), मुस्कान कुमारी (ईसीई, पूर्णिया), ऋतिक रोशन (सीएसई, बख्तियारपुर) और अभिषेक राज (इलेक्ट्रिकल, अरवल) शामिल रहे।

पॉलिटेक्निक में प्रथम स्थान हासिल करने वालों में रवि कुमार (सिविल, न्यू गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक पटना-13), स्तुति कुमारी (सीएसई, मोतिहारी), कृतिका वर्मा (इलेक्ट्रिकल, गया), आकांक्षा कुमारी सिंह (इलेक्ट्रॉनिक्स, गया) और नीरज कुमार (मैकेनिकल, मधेपुरा) शामिल रहे।

द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में आशीष राज, आर्या कुमारी, तेजस्विनी कुमारी, सायबा परवीन, वेद प्रकाश, शर्मीला कुमारी, सनी कुमार, कुंदन कुमार, रंजीत कुमार और हर्ष कुमार सहित अन्य छात्र-छात्राएं शामिल रहे।

तकनीकी शिक्षा के साथ उद्यमिता पर भी जोर

विभाग के सचिव हिमांशु शर्मा ने कहा कि बिहार के लिए यह एक महत्वपूर्ण दौर है और वर्ष 2047 तक विकसित बिहार के लक्ष्य को हासिल करने में आज के विद्यार्थी बड़ी भूमिका निभाएंगे।

उन्होंने कहा कि कक्षा में 60-70 प्रतिशत अंक हासिल करना अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन प्रथम, द्वितीय या तृतीय स्थान प्राप्त करने से विद्यार्थियों में अलग स्तर का आत्मविश्वास पैदा होता है। इस आत्मविश्वास को कौशल के विकास से जोड़ना जरूरी है।

उन्होंने विद्यार्थियों को बदलती तकनीकी दुनिया के अनुरूप खुद को तैयार करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और चैटजीपीटी के दौर में बाजार की जरूरतों को समझना, नए कौशल सीखना और उद्यमिता के बारे में सोचना भी जरूरी है।

तारामंडल में शुरू हुआ अत्याधुनिक पॉडकास्ट स्टूडियो

कार्यक्रम के दौरान तारामंडल में अत्याधुनिक पॉडकास्ट स्टूडियो का भी शुभारंभ किया गया। मंत्री शीला कुमारी ने इसका उद्घाटन किया।

स्टूडियो का उद्देश्य तकनीकी शिक्षा, विभागीय योजनाओं, उपलब्धियों, नवाचार और जनहित से जुड़े विषयों पर सार्थक संवाद को मंच उपलब्ध कराना है। इसके माध्यम से छात्रों, विशेषज्ञों, तकनीकी पेशेवरों और आम जनता से सीधे संवाद किया जाएगा।

पॉडकास्ट के जरिये विभाग की विभिन्न पहलों और उपलब्धियों को सरल और रोचक तरीके से लोगों तक पहुंचाने के साथ-साथ सफल विद्यार्थियों की कहानियां, तकनीकी विकास और जनहित से जुड़े मुद्दों पर विशेषज्ञों के साथ चर्चा भी प्रसारित की जाएगी।

तकनीकी शिक्षा को नई दिशा देने पर जोर

कार्यक्रम में बिहार अभियंत्रण विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस. के. वर्मा और विभाग के निदेशक मनोरंजन कुमार ने भी अपने विचार रखे। निदेशक-सह-अपर सचिव अहमद महमूद ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

इस अवसर पर विभाग के वरीय अधिकारी, इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों के प्राचार्य तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

समारोह में एक ओर मेधावी विद्यार्थियों को सम्मान देकर उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित किया गया, वहीं दूसरी ओर पॉडकास्ट स्टूडियो की शुरुआत के जरिए तकनीकी शिक्षा और विभागीय गतिविधियों को आधुनिक डिजिटल माध्यम से आम लोगों तक पहुंचाने की पहल की गयी।

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Ganpat Aryan
Ganpat Aryan
वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।

Ganpat Aryan

वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।

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