Chhapra News: अब पीपीपी मोड में चलेगा रिविलगंज विद्युत शवदाह गृह, डीएम ने दिया आदेश
डीएम वैभव श्रीवास्तव ने जिला गंगा समिति की बैठक में की व्यापक समीक्षा

छपरा। गंगा नदी और इसके तटवर्ती क्षेत्रों को स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण की दृष्टि से बेहतर बनाने के लिए सारण जिला प्रशासन ने विभिन्न योजनाओं की समीक्षा तेज कर दी है। गंगा घाटों के विकास, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण, विद्युत शवदाह गृह, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), पेयजल की गुणवत्ता और गंगा किनारे जैविक खेती को लेकर जिला गंगा समिति की बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई।
जिला पदाधिकारी वैभव श्रीवास्तव की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में आयोजित जिला गंगा समिति की बैठक में गंगा संरक्षण से जुड़े विभिन्न विभागों के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में खास तौर पर रिविलगंज, कोपा और मांझी को छपरा नगर निगम के अंतर्गत टैग किए जाने के बाद इन क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई।
रिविलगंज के लिए एमआरएफ और कंपोस्टिंग प्लांट की तैयारी
बैठक में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर रिविलगंज क्षेत्र की व्यवस्था पर विशेष समीक्षा की गई। बताया गया कि एमआरएफ (मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) और कंपोस्टिंग प्लांट की स्थापना के लिए गरखा में लगभग 4.1 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई है।
अन्य नगर निकायों में भी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की बेहतर व्यवस्था के लिए भूमि चिह्नित करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके साथ ही दो अतिरिक्त क्लस्टर विकसित किए जाने हैं। सोनपुर में भी एमआरएफ एवं कंपोस्टिंग प्लांट से संबंधित व्यवस्था के लिए भूमि चिह्नित की जा चुकी है। जिला पदाधिकारी ने एमआरएफ और कंपोस्टिंग प्लांट के संचालन एवं प्रबंधन से संबंधित आवश्यक तैयारियों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
रिविलगंज विद्युत शवदाह गृह को पीपीपी मोड में चलाने का निर्देश
बैठक में रिविलगंज स्थित विद्युत शवदाह गृह की स्थिति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि शवदाह गृह की मरम्मत का कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन इसके नियमित संचालन की व्यवस्था अभी पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो सकी है।
इस पर जिला पदाधिकारी ने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि विद्युत शवदाह गृह के संचालन के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड में एजेंसी का चयन किया जाए और इसे जल्द से जल्द नियमित रूप से कार्यशील बनाया जाए।
सोनपुर-दिघवारा की व्यवस्था भी हुई समीक्षा
बैठक में अन्य नगर निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। सोनपुर और दिघवारा को आपस में टैग कर उपलब्ध संसाधनों और भूमि का बेहतर उपयोग करने पर जोर दिया गया।
दिघवारा क्षेत्र में भी आवश्यक व्यवस्था के लिए भूमि चिह्नित की गई है। यहां सतत लीज प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।
दिघवारा घाट पर विद्युत शवदाह गृह से संबंधित प्रस्तावित व्यवस्था की समीक्षा के दौरान डीएम ने अंचल अधिकारी को स्थल की मापी कराकर विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
एसटीपी के लिए प्रक्रिया तेज करने का निर्देश
जिला गंगा समिति की बैठक में सभी नगर निकायों में एसटीपी यानी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से संबंधित कार्यों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इसके लिए कंसल्टेंट का चयन किया जा चुका है। अब आगे की प्रक्रिया पूरी करते हुए एसटीपी के लिए आवश्यक भूमि और अन्य संसाधनों की व्यवस्था की जानी है। जिला पदाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को इस दिशा में कार्रवाई तेज करने का निर्देश दिया, ताकि नगर क्षेत्रों से निकलने वाले अपशिष्ट जल के वैज्ञानिक उपचार की व्यवस्था विकसित की जा सके।
गंगा किनारे पेयजल की गुणवत्ता पर विशेष नजर
बैठक में गंगा किनारे के क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता की भी समीक्षा की गई। पीएचईडी अधिकारियों को पेयजल में आर्सेनिक और आयरन की मौजूदगी की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।
बैठक में जानकारी दी गई कि सोनपुर, दिघवारा और छपरा क्षेत्र में आर्सेनिक की उपस्थिति पाई गई है। इस पर डीएम ने संबंधित सभी प्रखंडों से विस्तृत जांच रिपोर्ट प्राप्त कर एक समेकित प्रतिवेदन तैयार करने का निर्देश दिया।
इस समीक्षा के बाद गंगा तटवर्ती क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता और शुद्ध पेयजल की उपलब्धता को लेकर आगे की रणनीति तैयार किए जाने की संभावना है।
गंगा किनारे जैविक खेती के लिए नए मॉडल बनाने की तैयारी
जिला पदाधिकारी ने गंगा किनारे स्थित क्षेत्रों में जैविक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को केवल पारंपरिक योजनाओं तक सीमित न रहते हुए नए और प्रभावी मॉडल तथा प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया।
गंगा तटवर्ती इलाकों में रासायनिक प्रदूषण को कम करने और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने के लिए जैविक खेती को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके साथ ही गंगा किनारे पौधारोपण और बायो-फेंसिंग को बढ़ावा देने के लिए भी प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया गया।
स्वच्छ और सुरक्षित गंगा तट बनाने पर जोर
डीएम ने गंगा नदी और इसके तटवर्ती क्षेत्रों से जुड़े कार्यों में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गंगा संरक्षण, स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, पेयजल, पर्यावरण संरक्षण और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े कार्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
इसलिए सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ निर्धारित कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का निर्देश दिया गया। बैठक में संबंधित जिला स्तरीय अधिकारी और विभिन्न विभागों के पदाधिकारी मौजूद रहे।
एक नजर में बैठक के प्रमुख बिंदु
- रिविलगंज, कोपा और मांझी को छपरा नगर निगम से टैग किए जाने के बाद ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की समीक्षा।
- रिविलगंज क्षेत्र के लिए गरखा में लगभग 4.1 एकड़ भूमि पर एमआरएफ एवं कंपोस्टिंग प्लांट की योजना।
- रिविलगंज विद्युत शवदाह गृह को पीपीपी मोड में नियमित रूप से संचालित करने का निर्देश।
- सोनपुर और दिघवारा को टैग कर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था विकसित करने पर जोर।
- सभी नगर निकायों में एसटीपी की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश।
- सोनपुर, दिघवारा और छपरा क्षेत्रों में पेयजल में आर्सेनिक की स्थिति की विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी गई।
- गंगा किनारे जैविक खेती, पौधारोपण और बायो-फेंसिंग के लिए नए मॉडल तैयार करने का निर्देश।
गंगा संरक्षण को लेकर हुई इस बैठक में प्रशासन ने साफ किया कि आने वाले समय में नदी किनारे स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, जल गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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