सारण के 147 गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री पर एक साल तक रोक, सैटेलाइट टाउनशिप पर कानूनी संकट
जिस जमीन पर निर्माण है प्रतिबंधित, वहीं बसाने की तैयारी नया शहर

छपरा। बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप “हरिहरनाथपुर” योजना कानूनी और पर्यावरणीय विवादों में घिरती नजर आ रही है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जहां सरकार इस परियोजना को भविष्य के आधुनिक शहर के रूप में प्रस्तुत कर रही है, वहीं योजना के मास्टर प्लान में छह ऐसे गांवों को शामिल किए जाने का मामला सामने आया है, जिन्हें वर्ष 2025 में ही पर्यावरण नियमों के तहत संरक्षित “वेटलैंड” (आर्द्रभूमि) घोषित किया जा चुका है। विशेषज्ञों का दावा है कि इन क्षेत्रों को टाउनशिप परियोजना में शामिल करना केंद्रीय पर्यावरण कानून और आर्द्रभूमि संरक्षण नियमावली का सीधा उल्लंघन है।
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नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार सोनपुर, दरियापुर, परसा और दिघवारा प्रखंड के कुल 147 गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री पर तत्काल प्रभाव से एक वर्ष के लिए रोक लगा दी गई है। यह रोक प्रस्तावित हरिहरनाथपुर सैटेलाइट टाउनशिप के लिए भूमि नियोजन और विकास प्रक्रिया के मद्देनजर लगाई गई है। हालांकि, इसी अधिसूचना में शामिल छह गांवों को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
वेटलैंड क्षेत्र को शामिल करने पर विशेषज्ञों ने जताई आपत्ति
वेटरन फोरम के महासचिव एवं सेवानिवृत्त विंग कमांडर डॉ. विश्वनाथ प्रसाद सिंह तथा वरिष्ठ अधिवक्ता उपेंद्र प्रसाद यादव ने दावा किया है कि दरियापुर और सोनपुर प्रखंड के छह गांव पहले से ही अधिसूचित वेटलैंड क्षेत्र हैं। ऐसे में उन्हें किसी भी टाउनशिप, एयरपोर्ट या अन्य बड़े निर्माण परियोजना के मास्टर प्लान में शामिल करना आर्द्रभूमि संरक्षण एवं प्रबंधन नियमावली-2017 का उल्लंघन है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जिन भूखंडों को कानूनन संरक्षित आर्द्रभूमि घोषित किया जा चुका है, वहां न तो भूमि उपयोग (लैंड यूज) में बदलाव किया जा सकता है और न ही किसी प्रकार का स्थायी निर्माण कार्य किया जा सकता है। ऐसे क्षेत्रों में ईंट-पत्थर का निर्माण पर्यावरणीय संतुलन को प्रभावित करता है और कानूनी रूप से प्रतिबंधित है।
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82 एकड़ भूमि पर निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार विवाद के केंद्र में मौजूद छह गांवों में कुल 33.197 हेक्टेयर यानी लगभग 82.03 एकड़ भूमि वेटलैंड श्रेणी में आती है। यह पूरा क्षेत्र कानूनी रूप से संरक्षित है और यहां किसी प्रकार की व्यावसायिक, आवासीय या औद्योगिक परियोजना विकसित नहीं की जा सकती।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन क्षेत्रों को मास्टर प्लान में बनाए रखा गया तो भविष्य में यह परियोजना न्यायिक समीक्षा का सामना कर सकती है। इससे न केवल परियोजना की प्रगति प्रभावित होगी बल्कि सरकार को कानूनी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है।
पटना के विकल्प के रूप में विकसित होना है नया शहर
हरिहरनाथपुर ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप को बिहार सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी शहरी विकास योजनाओं में से एक माना जा रहा है। प्रस्तावित योजना के तहत छपरा और सोनपुर के बीच एक आधुनिक, सुव्यवस्थित और विश्वस्तरीय शहर विकसित किया जाना है। सरकार का उद्देश्य पटना पर बढ़ते जनसंख्या और बुनियादी ढांचे के दबाव को कम करना है।
योजना में आधुनिक आवासीय कॉलोनियां, व्यावसायिक क्षेत्र, शैक्षणिक संस्थान, स्वास्थ्य सुविधाएं, चौड़ी सड़कें और अत्याधुनिक नागरिक सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा पटना एयरपोर्ट पर बढ़ते दबाव को देखते हुए इस क्षेत्र में एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विकसित करने की भी योजना है।
आखिर क्या होता है वेटलैंड?
वेटलैंड या आर्द्रभूमि ऐसे प्राकृतिक क्षेत्र होते हैं जहां भूमि पूरे वर्ष या अधिकांश समय जलमग्न रहती है। इनमें तालाब, दलदली क्षेत्र, नदी किनारे के जलभराव वाले इलाके तथा अन्य प्राकृतिक जल निकाय शामिल होते हैं। पर्यावरण वैज्ञानिक इन्हें पृथ्वी का “इकोलॉजिकल किडनी” यानी पारिस्थितिक गुर्दा कहते हैं।
ये क्षेत्र प्राकृतिक रूप से बाढ़ के अतिरिक्त पानी को अपने भीतर समाहित कर लेते हैं, भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद करते हैं और जल को प्राकृतिक रूप से शुद्ध करने का कार्य करते हैं। साथ ही हजारों प्रकार के पक्षियों, जलीय जीवों और वनस्पतियों के लिए आवास का काम करते हैं। इसलिए इनके संरक्षण को पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
अदालत में चुनौती की आशंका
वरिष्ठ अधिवक्ता उपेंद्र प्रसाद यादव का कहना है कि अधिसूचित वेटलैंड क्षेत्र को किसी भी शहरी विकास परियोजना में शामिल करना केंद्रीय पर्यावरण कानून का खुला उल्लंघन है। उनका मानना है कि यदि सरकार ने अधिसूचना में आवश्यक संशोधन नहीं किया तो यह मामला न्यायालय में चुनौती का विषय बन सकता है और परियोजना प्रारंभिक स्तर पर ही कानूनी अड़चनों में फंस सकती है।
वहीं पर्यावरणविदों ने भी सरकार से मांग की है कि वेटलैंड क्षेत्रों को मास्टर प्लान से बाहर कर पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन कायम किया जाए। उनका कहना है कि विकास आवश्यक है, लेकिन पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी भविष्य में गंभीर संकट पैदा कर सकती है।
फिलहाल हरिहरनाथपुर सैटेलाइट टाउनशिप को लेकर जारी अधिसूचना और उसमें शामिल वेटलैंड क्षेत्रों को लेकर बहस तेज हो गई है। अब सबकी निगाहें सरकार के अगले कदम और संभावित कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हैं।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर, अमर उजाला और हिन्दुस्थान समाचार में सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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