कैंसर से बचाने के लिए तंबाकू के दुष्प्रभावों को लेकर जागरूक होने की जरुरत: सिविल सर्जन

कैंसर की संभावित लक्षणों की जांच के साथ ही चिकित्सकों द्वारा सुरक्षित रहने के लिए दिया गया आवश्यक परामर्श
कैंसर से बचाव के लिए संतुलन खान- पान बेहद जरूरी
शरीर का कोई भी भाग हो सकता है कैंसर का शिकार
छपरा। विश्व कैंसर दिवस पर सदर अस्पताल परिसर स्थित सभागार में जागरूकता अभियान चलाया गया। वहीं जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में 04 फरवरी से 10 फरवरी तक चलने वाले निःशुल्क कैंसर रोग चिकित्सा एवं परामर्श शिविर का आयोजन किया गया। इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ सागर दुलाल सिंहा ने बताया कि शिविर में उपस्थित लोगों के कैंसर की संभावित लक्षणों की जांच करने के साथ ही चिकित्सकों द्वारा इससे सुरक्षित रहने के लिए आवश्यक परामर्श भी दिया गया है। क्योंकि कैंसर जैसी भयावह बीमारी अब लाइलाज नहीं है। समय पर इसकी पहचान होने से इलाज संभव है। सरकार द्वारा सभी स्वास्थ्य केंद्रों में संचालित गैर संचारी रोग (एनसीडी) क्लीनिक में लोग अपने कैंसर की जांच करा सकते हैं। पिछले कुछ वर्षों में कैंसर नियंत्रण की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। क्योंकि कैंसर नियंत्रण के लिए खास तौर पर राष्ट्रीय स्तर पर कई प्रकार की योजनाएं बनाई गई हैं। हालांकि गैर संचारी रोगों की रोकथाम और नियंत्रण योजना में राष्ट्रीय स्तर पर कैंसर जैसी बीमारी को शामिल किया गया है। उपचार की जरूरत वाले केवल तीन फीसदी रोगियों की ही देखभाल सभव हो रही है। हालांकि इससे निपटने के लिए सामुदायिक स्तर पर सभी नागरिकों सहित निजी क्षेत्र और अन्य हितधारकों के साथ साझेदारी को मजबूत करने की जरूरत है।
जिला गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ भूपेंद्र कुमार ने बताया कि खुले बाजार में पाए जा रहे खाद्य पदार्थ केमिकल्स के मिश्रण से बना होता है। इन खाद्य पदार्थों के अधिक इस्तेमाल कैंसर को बढ़ावा देने का काम करता है। इसके अलावा बहुत से लोग धूम्रपान व तंबाकू का सेवन करते हैं जो मुंह कैंसर का कारण है। डब्लूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार भारत में कैंसर मरीजों की संख्या लगभग 25 लाख से ज्यादा है। नेशनल हेल्थ प्रोफाइल रिपोर्ट- 2019 के अनुसार प्रत्येक वर्ष लगभग 70 हजार लोगों की मौत कैंसर की वजह से होती है। जिनमें से 80 प्रतिशत मौत लोगों की उदासीन रवैये के कारण हो रही है। कैंसर से बचाव के लिए लोगों को संतुलित खान-पान का सेवन करना चाहिए। जिसमें ताजे फल व हरी सब्जियां मुख्य रूप से शामिल होनी चाहिए। क्योंकि इसमें मौजूद विटामिन व मिनिरल्स कैंसर की आशंका को कम करने में सहायक होते हैं। इसके अलावा नियमित व्यायाम और शरीर का सन्तुलित वजन भी कैंसर होने से बचाए रखने में सहायक होता है।
सदर अस्पताल स्थित ओपीडी में कार्यरत होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल व रिसर्च सेंटर मुजफ्फरपुर की वरीय चिकित्सक डॉ प्रिया कुमारी ने बताया कि शरीर का कोई भी भाग कैंसर का शिकार हो सकता है। सामान्यतः लोग मुंह का कैंसर, सर्वाइकल कैंसर या महिला वर्ग स्तन कैंसर के शिकार हो जाती हैं। शरीर के किसी भी अंग में सूजन का होना, गांठ या कड़ापन पाया जाना, तिल/मस्से के आकार या रंग में परिवर्तन, शरीर के किसी घाव का न भरना, लगातार बुखार और वजन में कमी होना, मूत्र विसर्जन में कठिनाई होना या उस दौरान रक्त निकलना, 03 सप्ताह के अधिक खांसी होना या आवाज में परिवर्तन आना, मुंह में अधिक समय तक छाला या पैच का होना जो ठीक नहीं हो रहा हो, 4 से 6 सप्ताह या उससे ज्यादा समय तक पतला दस्त का होना, महिलाओं में स्तन के आकार में परिवर्तन या रक्त का रिसाव, रजोनिवृत्ति के बाद भी रक्तस्राव का होना इत्यादि कैंसर के सामान्य लक्षण हैं। अगर किसी व्यक्ति को शरीर में ऐसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में जांच करवानी चाहिए। समय पर कैंसर की पहचान होने से इसका इलाज आसानी से संभव है।
सदर अस्पताल के ओपीडी में कैंसर स्क्रीनिंग आह जागरूकता अभियान चलाया गया। वहीं आशा कार्यकर्ताओं को इससे संबंधित प्रशिक्षण दिया गया। जबकि केआर नर्सिंग कॉलेज के छात्रों द्वारा नुक्कड़ नाटक का मंचन कर लोगों को जागरूक किया गया। इसके अलावा बनियापुर के कन्हौली मनोहर गांव की 60 वर्षीय जो विगत छह महीने से परेशान थी उसका बायोप्सी किया गया। इस अवसर पर एफ एल सी प्रियंका कुमारी, डीओ राजीव गर्ग, होमी भाभा कैंसर अस्पताल की वरीय चिकित्सा पदाधिकारी डॉ प्रिया कुमारी, डॉ संतोष कुमार, स्टाफ नर्स दीपक कश्यप, जीएनएम निकिता कुमारी, एमटीएस अमृता कुमारी, डी ओ सुमित कुमार सहित कई अन्य अधिकारी और कर्मी मौजूद रहे।
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