कम वजन व संक्रमण की आशंका वाले बच्चों के लिए जरूरी है कंगारु मदर केयर

•केएमसी से शिशु के शरीर का बढ़ता है तापमान, वो सामान्य महसूस करता है
•गर्भ में ही मां की धड़कनों को पहचानने लगते हैं शिशु
छपरा। जिले में ठंड का प्रभाव बढ़ते जा रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग भी अपनी तैयारी कर रहा है। ताकि, लोगों को जागरूक कर उन्हें ठंड से बचाव के लिए जागरूक कर सके। ऐसे में नवजात बच्चों को हाईपोथर्मिया व निमोनिया का खतरा रहता है। सबसे अधिक परेशानी प्री-मैच्योर शिशुओं को होती है। नवजात शिशुओं में तय समय से पहले जन्म और जन्म के समय वजन कम होना अक्सर देखा जाता है। यह शिशु सामान्य शिशु की तुलना में ज्यादा कोमल और कमजोर होते और उन्हें कई तरह की बीमारियां होने का भी खतरा बना रहता है। ऐसे शिशुओं को गहन देखभाल की जरूरत होती है। जिसे कंगारू मदर केयर (केएमसी) विधि से किया जा सकता है। केएमसी तकनीक खासतौर से कम वजन के बच्चों और ऐसे बच्चे जिन्हें संक्रमण की आशंका होती , उन्हें दी जाती है। प्री-मैच्योर डिलेवरी के दौरान जन्म लेने वाले कमजोर बच्चों को इससे स्वस्थ रखा जा सकता है।
छह महीने तक कर सकते हैं केएमसी :
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप यादव ने बताया कि मां और नवजात के बीच स्किन-टू-स्किन कॉन्टैक्ट होता है। इसे कंगारू मदर केयर कहते हैं। इसमें मां नवजात को अपने सीने से लगाकर रखती है। इस तरह के स्पर्श से मां और बच्चे के बीच का स्नेह बढ़ता है। एक दिन में मां या पिता या फिर दादा-दादी कम से कम 4 और ज्यादा से ज्यादा 12 घंटे तक नवजात को अपने सीने से लगाकर रख सकते हैं। इस दौरान बच्चों को सिर्फ डायपर के अलावा और कुछ नहीं पहनाया जाता है। केएमसी छह महीने तक कर सकते हैं। इसमें ढाई किलो से कम वजन और प्री-मैच्योर नवजात, जिनका वजन 1800 ग्राम से कम होता है। उसको रोजाना 8 घंटे (2-2 घंटे की सीटिंग) तक केएमसी चाहिए। प्री-मैच्योर नवजात की डिलीवरी के बाद उसका वजन 1800 ग्राम होता है। केएमसी देने से उसका वजन नॉर्मल बच्चे के बराबर यानी ढाई किलो का हो जाता है।
गर्भ में ही मां की धड़कनों को पहचानने लगते हैं शिशु :
नवजात बच्चों को केएमसी की जरूरत होती है। जब नवजात जन्म लेता है उसके शरीर का तापमान 37 डिग्री होता है। जब नवजात जन्म लेने के दौरान बाहर आता है, तो उसके शरीर का तापमान अचानक कम हो जाता है। ये समय होता है जब उसके नाल काटने से पहले नवजात को मां के स्पर्श के लिए दिया जाता है। इससे उसके शरीर का तापमान बढ़ जाता है और वो नॉर्मल फील करता है। ऐसा न करने से नवजात की जान जा सकती है। गर्भ से ही नवजात अपनी मां की आवाज और दिल की धड़कन को पहचानने लगता है। इसलिए इस केयर से नवजात खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस करता है। मां के पास नवजात के रहने से स्किन-टू-स्किन कॉन्टैक्ट से ब्रेस्ट में दूध भी ज्यादा आता है। मां आसानी से उसे फीड करा सकती है।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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