ऑपरेशन सिंदूर: आंतक के खिलाफ भारत का शक्तिशाली प्रहार, इस्लामिक देशों से भी मिला समर्थन

नेशनल डेस्क। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत आतंक के खिलाफ सटीक और सीमित कार्रवाई की। यह जवाब केवल आतंकवादी शिविरों तक सीमित रहा और पाकिस्तान की सैन्य ठिकानों को नहीं छुआ। भारत का उद्देश्य साफ था—आतंक के खिलाफ सख्त संदेश देना, लेकिन युद्ध से बचना।
7-8 मई की रात पाकिस्तान ने भारत के उत्तरी और पश्चिमी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। भारतीय वायु रक्षा प्रणाली ने इन हमलों को सफलतापूर्वक विफल कर दिया। मलबे से साफ हुआ कि पाकिस्तान तनाव बढ़ाना चाहता था, जबकि भारत संयम और सटीकता के साथ आगे बढ़ रहा था।
8 मई को विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने स्पष्ट किया कि अगर पाकिस्तान ने दोबारा हमला किया, तो उसे सीधा उकसावे की कार्रवाई माना जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की कार्रवाई केवल आतंकवादी ठिकानों पर केंद्रित थी और इसमें किसी भी नागरिक को नुकसान नहीं हुआ।
9 मई को पाकिस्तान ने फिर ड्रोन और सीमा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन किया, जिसका भारतीय सेना ने मुंहतोड़ जवाब दिया। सेना ने सोशल मीडिया पर कहा कि भारत अपनी सीमाओं की रक्षा करेगा और हर खतरे का कड़ा जवाब देगा।
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अंतरराष्ट्रीय समर्थन भारत के साथ
भारत के इस आत्मरक्षात्मक रुख को वैश्विक समर्थन भी मिला है। ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड लैमी ने कहा कि भारत का गुस्सा जायज़ है। पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने कहा कि कोई भी देश सीमा पार आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं कर सकता। रूस ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की, लेकिन साफ कहा कि वह हर तरह के आतंकवाद की निंदा करता है। इज़राइल ने भी भारत के समर्थन में स्पष्ट बयान दिया। इज़राइली राजदूत ने कहा कि आतंकवादियों को कोई पनाह नहीं मिलनी चाहिए और भारत को अपनी रक्षा का पूरा अधिकार है। यूरोपीय संघ और उसके सभी 27 सदस्य देशों ने भारत के समर्थन में एकजुट बयान जारी किया। फ्रांस, नीदरलैंड और जापान ने भी भारत की कार्रवाई को सही ठहराया।
संयुक्त राज्य अमेरिका ने भी बाद में भारत के साथ एकजुटता दिखाई। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की संप्रभुता और आतंकवाद से लड़ने के अधिकार का समर्थन किया, हालांकि उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने संयम की अपील करते हुए कहा कि यह क्षेत्रीय मामला है, और अमेरिका को इसमें प्रत्यक्ष भूमिका नहीं निभानी चाहिए।
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इस्लामिक देशों से भी भारत को समर्थन
सऊदी अरब, यूएई, कतर, ईरान और बांग्लादेश जैसे इस्लामी देशों ने भी भारत के रुख का समर्थन किया। सऊदी अरब ने बढ़ते तनाव पर चिंता जताई और नागरिकों को नुकसान से बचने की अपील की। यूएई और कतर ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के कदम को उचित बताते हुए शांति की अपील की। ईरान ने कहा कि आतंकवाद और नागरिकों को निशाना बनाना किसी भी परिस्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता। बांग्लादेश ने अपनी “जीरो टॉलरेंस” नीति दोहराते हुए भारत के आत्मरक्षा के अधिकार को समर्थन दिया।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य पनामा ने भी दिया साथ
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मौजूदा सदस्य पनामा ने भी भारत की कार्रवाई को आतंक के खिलाफ उचित और ज़िम्मेदार कदम बताया। ऑपरेशन सिंदूर बदले की कार्रवाई नहीं थी, यह आत्मरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा का संकल्प था। भारत ने सतर्कता के साथ कार्रवाई की और आतंक के खिलाफ सख्त संदेश दिया।दुनिया के अधिकांश ज़िम्मेदार देशों ने भारत के रुख को समझा और उसका समर्थन किया। शांति भारत का लक्ष्य है, लेकिन सुरक्षा के बिना शांति संभव नहीं।
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