सुरक्षित ड्राइविंग के लिये चालकों को दिया गया प्रशिक्षण

•जिला परिवहन कार्यालय के तत्वावधान में कार्यक्रम का आयोजन
•सड़क सुरक्षा सप्ताह के समापन पर लोगों को निःशुल्क बांटे गए हेलमेट
छपरा।जिला परिवहन कार्यालय के तत्वाधान में आयोजित सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत एक सप्ताह से कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। कहीं नुक्कड़ नाटक तो कहीं वाद-विवाद व पेंटिंग प्रतियोगिता के माध्यम से लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इसी कड़ी में पिछले तीन दिनों से डीटीओ कार्यालय के सभागार में बैच बनाकर बाइक व फोर व्हीलर चालकों को सुरक्षित ड्राइव का गुर ऑडियो-विडियो के माध्यम से
सिखाया जा रहा है।आईडीटीआर औरंगाबाद से आये ट्रेनर अनिरुद्ध ने बताया कि चालकों का ड्राइविंग क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से सड़क सुरक्षा के मानकों के अनुरूप वाहन चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भारी वाहन चालकों को सड़क पर लगे संकेतक के अनुसार वाहन चलाने का सुझाव दिया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें विभिन्न संकेतको की जानकारी दी गई।
वहीं दो पहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनकर तथा चार पहिया वाहन के चालकों को सीट बेल्ट लगाकर वाहन चलाने का सुझाव दिया गया। यह भी बताया गया कि सड़क पर थोड़ी सी सावधानी अपनाकर अपना तथा दूसरों की जान बचाई जा सकती है। अधिकांश घटनाएं चालकों की लापरवाही के कारण होती है। अगर चालक सावधानी बरतें तो सड़क दुर्घटनाओं पर हद तक अंकुश लगाया जा सकता है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला परिवहन पदाधिकारी जनार्दन कुमार ने कहा कि जिस स्पीड से वाहनों कि संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। उसी तरह साल दर साल दुर्घटना के आंकड़े भी बढ़ रहे हैं। हालांकि सरकारें इसको लेकर चिंतित हैं और इसे कम करने के प्रयास भी कर रहीं है।लेकिन उससे भी जरूरी होता है, एक्सीडेंट के समय तुरंत घायल हुए व्यक्ति को गोल्डन ऑवर में मदद मिलने पर किसी भी बड़े नुकसान को होने से रोका जा सकता है।
उन्होंने बताया कि
जब भी कोई दुर्घटना होती है और उसमें किसी को गंभीर चोट आती है, तो उसे दुर्घटना के एक घंटे के अंदर, अगर सही इलाज मिल जाता है. तो उसकी जान को कम से कम खतरा होने कि संभावना होती है। इसीलिए इसे गोल्डन ऑवर कहते हैं।जब भी कोई दुर्घटना होती है, तो गंभीर चोट आने पर मरीजों के शरीर से काफी ज्यादा खून निकल जाता है. जितना ज्यादा खून निकलेगा, उतना ही खतरा बढ़ता चला जायेगा. कुछ लोग दुर्घटना से शॉक में चले जाते हैं, जिसे हार्ट अटैक होने के चांस ज्यादा हो जाते हैं।इसलिए जितना जल्दी हो सके, घायल व्यक्ति को तुरंत इलाज मिल जाना चाहिए।एमवीआई संतोष कुमार सिंह ने बताया कि जब भी कोई दुर्घटना होती है तो ज्यादातर लोग मदद के लिए आगे नहीं आते, जिसकी वजह है पुलिस के झमेले में पड़ने से बचना।लेकिन जानकारी के मुताबिक, अब मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2019, धारा-134ए के तहत, अब कोई भी व्यक्ति जो घायल को हॉस्पिटल पहुंचाने का काम करेगा, उसके ऊपर पुलिस किसी भी तरह की कानूनी करवाई नहीं करेगी। अगर हॉस्पिटल जाते समय घायल व्यक्ति की जान भी चली जाती है, तब भी पुलिस मदद करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कोई मामला नहीं चला सकती। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने हमें कानूनीआवरण दिया है।समापन अवसर पर जिला परिवहन कार्यालय के प्रांगण में डीटीओ व एमवीआई ने करीब 50 से अधिक लोगों को निःशुल्क हेलमेट का वितरण किया और उन्हें गाड़ी चलाते समय हेलमेट जरूर लगाने का अनुरोध किया। हेलमेट पाकर लोगों में खुशी देखी गई। चालकों में जिला परिवहन कार्यालय के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वे लोग यातायात नियम का पालन करेंगे। साथ ही लोगों को भी जागरूक करने का भी काम करेंगे।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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