छपरा में सामने पूजा करने का अनोखा तरीका: 50 फीट ऊपर जेसीबी पर सवार होकर बेल वृक्ष की श्रद्धालुओं ने की पूजा

छपरा। इस समय शारदीय नवरात्र को लेकर सोनपुर प्रखंड का पूरा क्षेत्र भक्ति मय हो गया है। सुबह से ही ध्वनि विस्तारक यंत्र से दुर्गा सप्तशती पाठ चारो ओर गूंज रहा है। सोनपुर नगर पंचायत के अलावे शाहपुर भरपुरा जहांगीरपुर दुधइला शिकारपुर बैजलपुर परमानंदपुर नयागांव गोपालपुर चतुरपुर आदि गांव में कई स्थानों पर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई है। पूजा पंडाल के समीप अस्थाई दुकानें लगाई गई है। यहां सुबह से ही मेला सा दृश्य दिखाई दे रहा है ।
50 फीट ऊपर से जेसीबी पर सवार होकर बेल वृक्ष की पूजा की गई।
प्रखंड के गोपालपुर पंचायत में शुक्रवार और शनिवार को श्रद्धालुओं के द्वारा पूजा करने का एक अनोखा तरीका सामने आया है। यहां गंगा नदी किनारे जेसीबी पर सवार होकर जमीन के सतह से लगभग 50 फीट ऊपर से बेल वृक्ष की पूजा की गई। गोपालपुर महदल्ली चक मां दुर्गा पूजा समिति के सदस्य व श्रद्धालु जेसीबी पर सवार होकर बेल वृक्ष की पूजा किया। इस अवसर पर सैकड़ो श्रद्धालु वहां मौजूद रहे।
बेल के वृक्ष के नीचे पूजा अर्चना कर मां को आमंत्रित की जाती है
पूजा समिति के सदस्य कालिका सिंह और राजेश सिंह बताते हैं बेल के वृक्ष के नीचे पूजा अर्चना कर मां को आमंत्रित की जाती है। वहीं बेल की पूजा करके देवी के नेत्रों में ज्योति का संचार किया जाता है। इस विधि के बाद पूजा पंडालों में देवी के मुख पर लगा आवरण हटा दिया जाता है। उसके बाद श्रद्धालुओं के लिए माता के पूजन दर्शन के लिए पट खोल दिया जाता है।शारदीय नवरात्र के षष्टी तिथि को पूरे भक्तिभाव के साथ मां कात्यायनी की आराधना की गई। वहीं मां दुर्गा को बेल निमंत्रण देने के लिए बैंड-बाजे के साथ शोभायात्रा निकाली गई। शनिवार को पूजा के साथ पंडालो में रखी प्रतिमाओं के नेत्रपट खोल दिए गए।
बेल निमंत्रण को लेकर सुबह से ही काफी चहल दिख रही थी।
पूरे मंत्रोच्चारण के साथ पुरोहितों ने बेल के पेड़ के नीचे मां दुर्गा की उपासना की। इसके बाद उन्हें निमंत्रण दिया गया।भगवती स्थान में बेल निमंत्रण पं राकेश ओझा के मंत्रोच्चारण के साथ किया गया। बेल के दो फल पर लाल कपड़ा बांधा गया। शुक्रवार को बांधा गया बेल के फल को शनिवार को उतारा गया।
सप्तमी तिथि शनिवार को नौ दिव्य वृक्षों की डालों को दुर्गा स्वरूप मानकर उनका महास्नान कराकर प्रतिष्ठा की गई। इसके साथ ही देवी को प्राणदान और चक्षुदान के साथ सप्तमी की महापूजा की शुरुआत हुई। अष्टमी के दिन सुबह देवी की राजोच्चार के साथ महापूजा होगी, दोपहर में संधि पूजा की जाएगी। इसमें दुर्गा देवी का चामुंडा स्वरूप में 108 पद्म पुष्पों व 108 दीपकों से बीज मंत्रों द्वारा आराधना की जाएगी।
उधर नयागांव के डुमरी बुजुर्ग स्थित महाकाल रात्रि मंदिर में सप्तमी तिथि को लेकर श्रद्धालुओं की काफी भीड़ ऊमर पड़ी। दूर दराज के गांव से भी सैकड़ो श्रद्धालु यहां पिंडी रूपी मां कालरात्रि को प्रसाद अर्पित किया। संध्या बेला में आरती का आयोजन किया गया।
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