न्याय में तकनीक से आएगी पारदर्शिता, दूर-दराज़ तक पहुंचेगा इंसाफ: CJI सूर्य कांत
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने पटना हाईकोर्ट में सात आधारभूत संरचनाओं की रखी आधारशिल

Supreme Court Chief Justice Surya Kant । न्यायिक व्यवस्था में सही तकनीकी संसाधनों के उपयोग से पारदर्शिता लाने के साथ ही दूर दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को अधिक प्रभावी तरीके से न्याय उपलब्ध कराई जा सकती है। उन्होंने कहा कि तकनीक की मदद से सभी जरूरी दस्तावेजों और डाटा का डिजिटलाइजेशन किया जा सकता है और इसे प्रभावी तरीके से उपयोगकर्ता केंद्रित बनाया जा सकता है। इसकी मदद से गरीब और कमजोर लोगों को सशक्त माध्यम से न्याय मुहैया कराया जा सकता है। ये बातें भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत ने शनिवार को पटना हाईकोर्ट परिसर में आयोजित कार्यक्रम में कही।
सात प्रमुख आधारभूत संरचनाओं की आधारशिला
न्यायधीश सूर्य कांत पटना हाईकोर्ट के प्रांगण में सात प्रमुख आधारभूत संरचनाओं की आधारशिला रखी। इसमें आई ब्लॉक के भवन का निर्माण के अलावा हॉस्पिटल भवन, मल्टीलेवल पार्किंग, एडवोकेट जनरल का कार्यालय, कर्मियों का आवास, एनेक्सी भवन समेत सात महत्वपूर्ण आधारभूत संरचनाएं शामिल हैं। इनके तैयार होने से हाईकोर्ट की न्यायिक प्रणाली को मजबूत बनाने में काफी मदद मिलेगी। इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने पटना उच्च न्यायालय के वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट के इलेक्ट्रॉनिक संस्करण ई–एसीआर का लोकार्पण भी किया।
यादगार पल को तस्वीरों में कैद करने के लिए एक फोटो सेशन
वह सुबह करीब 10 बजकर 37 मिनट पर हाईकोर्ट परिसर में सर्वोच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों के साथ दाखिल हुए। उनके साथ जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, जस्टिस राजेश बिंदल, पटना उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश सुधीर कुमार सिंह, जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद एवं मोहित कुमार शाह मौजूद थे। आते ही सबसे पहले उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। सभी न्यायाधीशों ने इस यादगार पल को तस्वीरों में कैद करने के लिए एक फोटो सेशन भी कराया। फिर पटना उच्च न्यायालय के कार्यकारी न्यायधीश सुधीर कुमार सिंह ने उन्हें हाईकोर्ट के मार्वल हॉल में लगी यादगार प्रदर्शनी का अवलोकन कराया। फिर सभी न्यायाधीशों का आगमन मंच पर हुआ।
इस कार्यक्रम में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत का संबोधन सुबह करीब 11 बजकर 25 मिनट पर शुरू हुआ और करीब 10 मिनट तक चला। इस दौरान उन्होंने बिहार की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से लेकर न्यायिक प्रणाली समेत अन्य सभी पहलुओं पर बारीकी से प्रकाश डाला। उन्होंने डिजिटल डिवाइड को दूर करने के लिए खास पहल करने की बात करते हुए कहा कि इससे समावेशीकरण को बढ़ावा मिलेगा। बिहार की ऐतिहासिक संस्थाओ की संरचनाएं न सिर्फ एक स्थिर ढांचे या इमारतें हैं, बल्कि एक जीवंत संरचनाएं हैं, जिनकी समाज में प्रासंगिकता है।
नालन्दा विश्वविद्यालय का जिक्र करते हुए कहा कि ये महज वास्तुशिल्प के लिए महत्वपूर्ण नहीं थे, बल्कि ये खुले वाद– विवाद और मूल तार्किकता के केंद्र के तौर पर भी विख्यात थे। इसी तरह पाटलिपुत्र सिर्फ सत्ता या शक्ति के केंद्र के तौर पर नहीं पहचाने जाते थे, बल्कि प्रशासन, संजातीय, लोक कल्याण के केंद्र के तौर पर भी समाज में प्रासंगिकता थी। इसी तरह पटना उच्च न्यायालय को संवैधानिक, स्वतंत्रता, न्यायिक अधिकार के विस्तार के केंद्र के तौर पर जाना जाता है। यह संवैधानिक पंपरा को बढ़ाने में अहम भूमिका अदा कर रहा है।
न्याय प्रदान करने में तीव्रता आएगी
जस्टिस सूर्य कांत ने कहा कि न्यायालय में आधारभूत संरचना को विकसित करके मानव कार्यक्षमता को बढ़ाया जा सकता है। न्याय प्रदान करने में तीव्रता आएगी। पटना हाईकोर्ट परिसर में बनने वाले ऑडिटोरियम का जिक्र करते हुए कहा कि यह विचारों के आदान प्रदान करने का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। यहां न्याय से जुड़े कार्यक्रम आयोजित कराए जाने चाहिए। यहां बनने वाले हॉस्पिटल भवन के बारे में कहा कि न्याय मानव के जरिय ही प्रदान किया जाता है न की मशीनों से। लोग काफी तनाव में काम करते हैं। ऐसे में उनके स्वास्थ्य की देखभाल बेहद आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि न्याय शब्द का वास्तविक मतलब कमजोर वर्ग को आवाज प्रदान करना है। सबसे कमजोर को उचित न्याय मिल सके और जो लोग इसके हकदार हैं, उन्हें यह ससमय मिले। जरूरतमंदों की बातें जरूर सुनी जाएं।
न्याय में कभी देरी नहीं करनी चाहिए : जस्टिस अमानुल्लाह
इस मौके पर जस्टिस ए. अमानुल्लाह ने कहा कि न्याय में किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। लोगों को न्याय मुहैया करने में आधारभूत संरचनाओं का बहाना नहीं बनाना चाहिए। पटना हाईकोर्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि इसमें इसकी पहल बेहद सराहनीय रहा है। कम संसाधनों में भी बेहतर तरीके से न्याय प्रदान करने का काम किया है। प्रेशर में न्याय प्रदान करना ही तारीफ की बात है। उन्होंने राज्य सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि राज्य सरकार का रवैया हमेशा सकारत्मक रहा है। अपने पूरे कार्यकाल में कभी किसी तरह का सरकार से विवाद का सामना नहीं करना पड़ा। अंत में परिणाम ही मायने रखता है।
न्याय के मंदिर होते हैं कोर्ट : जस्टिस बिंदल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस राजेश बिंदल ने कहा कि कोर्ट को न्याय का मंदिर कहते हैं। इसके पुजारी जज होते हैं। समय पर समर्थता के साथ न्याय प्रदान करने से ही समस्या दूर हो सकेगी। आधारभूत ढांचे मजबूत होने से न्याय प्रदान करने में गति आती है। उन्होंने कहा कि पटना आने पर काफी बदलाव दिखता है। जब तक किसी जगह पर हम नहीं जाते वहां की हकीकत नहीं मालूम होती है। इससे पहले गयाजी की अपनी यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि वहां भी काफी बदलाव दिखता है।
कार्यक्रम में स्वागत भाषण पटना हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश सुधीर सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि न्यायलय में आधारभूत संरचनाएं मजबूत होने पर से न्यायिक प्रणाली को गति मिलती है। इससे न्याय प्रदान करने में भी गति आती है। हाईकोर्ट में सात आधारभूत संरचनाओं के निर्माण की लगत 320 करोड़ रुपये है।
धन्यवाद ज्ञापन जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने किया। मंच संचालन न्यायिक अधिकारी साक्षी प्रखर और प्रणव शंकर ने किया। इस कार्यक्रम में ऑनलाइन माध्यम से पटना हाईकोर्ट के नवनियुक्त मुख्य न्यायधीश संगम कुमार साहू भी ओडिशा हाईकोर्ट से सीधे जुड़े हुए थे।
कार्यक्रम के आरंभ में हाईकोर्ट के महानिबंधक प्रदीप कुमार मलिक ने भारत के मुख्य न्यायाधीश का शाल, मधुबनी पेंटिंग और पौधा देकर स्वागत किया। इस मौके पर पटना हाईकोर्ट के जज जस्टिस मोहित कुमार शाह, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष सह राज्यसभा सदस्य मनन कुमार मिश्रा, महाधिवक्ता पीके शाही, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, डीजीपी विनय कुमार, स्वास्थ्य सचिव लोकेश कुमार सिंह, भवन निर्माण के सचिव कुमार रवि, वरिष्ठ अधिवक्ता समेत हाइकोर्ट के अन्य अधिकारी मौजूद थे।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर, अमर उजाला और हिन्दुस्थान समाचार में सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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