
छपरा। कभी समाज में “धरती के भगवान” कहे जाने वाले डॉक्टर आज खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। मरीजों की जान बचाने के लिए दिन-रात संघर्ष करने वाले चिकित्सकों के सामने अब एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। हिंसा, अविश्वास और कानूनी कार्रवाई का बढ़ता खतरा। चिकित्सा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि हाल के वर्षों में ऐसी घटनाओं में वृद्धि हुई है, जिसके कारण डॉक्टरों का मनोबल प्रभावित हो रहा है और कई चिकित्सक गंभीर एवं जोखिम भरे मरीजों के इलाज को लेकर भी अतिरिक्त दबाव महसूस करने लगे हैं।
गंभीर मरीजों के इलाज पर भी पड़ सकता है असर
छपरा शहर के वरिष्ठ चिकित्सक एवं संजीवनी नर्सिंग होम एंड मैटरनिटी सेंटर के संस्थापक डॉ. अनिल कुमार ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि चिकित्सा पेशा सेवा, समर्पण और जोखिम का मिश्रण है। डॉक्टर वर्षों की कठिन पढ़ाई, प्रशिक्षण और अनुभव के बाद मरीजों का उपचार करते हैं। इसके बावजूद किसी अप्रिय घटना की स्थिति में सबसे पहले चिकित्सकों को ही कठघरे में खड़ा कर दिया जाता है।
उन्होंने हाल ही में मुजफ्फरपुर के एक अस्पताल में आईसीयू में आग लगने के बाद हुई मौतों के मामले का जिक्र करते हुए कहा कि ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक की तत्काल गिरफ्तारी ने पूरे चिकित्सा समुदाय को झकझोर दिया है। ऐसी घटनाएं डॉक्टरों के भीतर भय का माहौल पैदा करती हैं और यह संदेश देती हैं कि किसी भी दुर्घटना या अनहोनी की स्थिति में सबसे पहले जिम्मेदारी डॉक्टरों पर ही डाली जाएगी।
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डॉ. कुमार का कहना है कि चिकित्सा विज्ञान कोई जादू नहीं है। हर इलाज, हर ऑपरेशन और हर चिकित्सकीय प्रक्रिया में कुछ न कुछ जोखिम निहित होता है। कई बार मरीज अस्पताल में पहले से ही गंभीर स्थिति में पहुंचते हैं और तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सकता। लेकिन ऐसी परिस्थितियों में भी चिकित्सकों को लापरवाही का आरोपी बना दिया जाता है।
उन्होंने हाल ही में दरभंगा के एक मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें उपभोक्ता आयोग ने चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप में एक निजी अस्पताल को मुआवजा देने का आदेश दिया। उनका कहना है कि ऐसे मामलों के बाद चिकित्सकों के बीच यह चिंता बढ़ रही है कि कहीं किसी जटिल मामले में इलाज करना ही उनके लिए परेशानी का कारण न बन जाए।
विश्वास टूटेगा तो प्रभावित होगी स्वास्थ्य व्यवस्था
डॉ. कुमार ने कहा कि मरीज और डॉक्टर के बीच विश्वास का रिश्ता चिकित्सा व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी है। लेकिन जब किसी मरीज की मौत के बाद अस्पतालों में तोड़फोड़, मारपीट या हंगामा होता है, तो इसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है तथा अस्पतालों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।
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उन्होंने कहा कि मरीज के परिजन इलाज शुरू होने से पहले डॉक्टर से अपने प्रियजन को बचाने की उम्मीद करते हैं, लेकिन यदि दुर्भाग्यवश मरीज की जान नहीं बचती तो कई बार वही लोग चिकित्सक को दोषी मान लेते हैं। यह प्रवृत्ति न केवल डॉक्टरों के लिए, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए चिंता का विषय है।
सेवा भावना पर पड़ सकता है असर
डॉ. कुमार का मानना है कि यदि डॉक्टर लगातार भय और असुरक्षा के माहौल में काम करेंगे तो वे जोखिम उठाने से बच सकते हैं। इसका सबसे अधिक असर गंभीर मरीजों के उपचार पर पड़ेगा। कई चिकित्सक पहले ही जटिल मामलों को उच्च संस्थानों में रेफर करने की प्रवृत्ति अपनाने लगे हैं, जिससे समय पर इलाज प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा सेवा केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि मानवता से जुड़ा दायित्व है। यदि समाज और व्यवस्था ने डॉक्टरों को आवश्यक सुरक्षा और सम्मान नहीं दिया, तो स्वास्थ्य सेवाओं की मानवीय संवेदनाएं कमजोर पड़ सकती हैं।
संवाद और समझ से ही निकलेगा समाधान
डॉ. अनिल कुमार ने स्पष्ट किया कि यदि कोई चिकित्सक या अस्पताल गलत तरीके से शुल्क वसूलता है या मरीज को गुमराह करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन कुछ मामलों के आधार पर पूरे चिकित्सक समुदाय को कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है।
उन्होंने प्रशासन और समाज से अपील की कि मरीज की मौत के हर मामले को अपराध की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। चिकित्सा विज्ञान की अपनी सीमाएं हैं और कई बार मृत्यु चिकित्सकीय जोखिमों का परिणाम भी हो सकती है।
उन्होंने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास, संवाद और पारस्परिक सम्मान का मजबूत होना जरूरी है। यदि यह भरोसा कमजोर हुआ तो इसका नुकसान केवल डॉक्टरों को नहीं, बल्कि पूरे समाज को उठाना पड़ेगा।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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