
पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर शुरू की गई महिलाओं के लिए विशेष पिंक बस सेवा अब सिर्फ राजधानी तक सीमित नहीं रहेगी। पिंक बसों की लोकप्रियता और इसके सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अब यह सेवा सितंबर 2025 तक राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में शुरू कर दी जाएगी।
बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (बीएसआरटीसी) ने इसके लिए 80 नई पिंक बसें मंगवाई हैं, जो अगस्त के अंत तक बिहार पहुंचने की संभावना है। फिलहाल राजधानी पटना, मुजफ्फरपुर, गया, पूर्णिया और दरभंगा में कुल 20 पिंक बसें सफलतापूर्वक चल रही हैं।
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बस सेवा का विस्तार योजना
- कुल नई पिंक बसें: 80
- लागत: 5 करोड़ रुपये
- पटना के लिए आवंटित बसें: 35
- अन्य जिलों के लिए: 45 बसें
- लक्ष्य: सभी जिलों के मुख्यालयों में पिंक बस सेवा का संचालन
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महिलाओं के लिए खास सुविधाएं
इन पिंक बसों को पूरी तरह महिलाओं की जरूरतों और सुरक्षा को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इनमें उपलब्ध सुविधाएं:
- सेनेटरी पैड और मेडिकल किट
- सीसीटीवी कैमरे
- जीपीएस ट्रैकर
- पैनिक बटन
- मोबाइल चार्जर
- सिर्फ महिला चालक व महिला कंडक्टर
- महिला नोडल अधिकारी द्वारा निगरानी
महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा
इस परियोजना को पूरी तरह से महिलाओं द्वारा संचालित करने की योजना है। बीएसआरटीसी इसके लिए दो चरणों में महिला चालकों को प्रशिक्षण देने जा रहा है।
- प्रथम चरण में 500 महिला चालकों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
- महिला चालक, कंडक्टर और अधिकारियों के जरिये संपूर्ण प्रबंधन में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
- इस योजना से महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में नई राह मिलेगी।
वर्तमान में कहाँ चल रही हैं पिंक बसें?
- पटना: 8 बसें, सभी प्रमुख रूटों पर सुबह 7 बजे से रात 8 बजे तक।
- मुजफ्फरपुर: 4 बसें
- गया, दरभंगा और पूर्णिया: 2-2 बसें
- सभी बसों में 2 महिला कंडक्टर की जिम्मेदारी
कॉलेजों में पिंक बस पास के लिए कैंप
बीएसआरटीसी की ओर से राजधानी के सभी कॉलेजों में पिंक बस पास बनवाने हेतु विशेष कैंप का आयोजन भी किया जाएगा, ताकि छात्राएं इस सुविधा का अधिकतम लाभ उठा सकें।
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महिलाओं की राय और प्रतिक्रिया
राजधानी में यात्रा कर रही कई छात्राओं और कामकाजी महिलाओं ने पिंक बस सेवा को “सुरक्षित, भरोसेमंद और सुविधाजनक” बताया है। महिलाओं ने यह भी कहा कि सार्वजनिक परिवहन में इस तरह की सुरक्षित सेवा महिला सशक्तिकरण का मजबूत उदाहरण है।
बिहार सरकार की यह पिंक बस योजना सिर्फ एक परिवहन सेवा नहीं, बल्कि महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनकर उभर रही है। अगले कुछ महीनों में जब ये बसें हर जिला मुख्यालय में दौड़ेंगी, तो यह न सिर्फ एक व्यवस्था का विस्तार होगा, बल्कि विश्वास का संचार भी करेगा।
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