छपरासफलता की कहानी

सारण में मजदूर का बेटा बना फौज का अफसर, गरीबी नहीं बनी बाधा, हौसलों ने लिखी तक़दीर

सीमित संसाधनों से लेफ्टिनेंट बनने तक का सफर

छपरा। कहते हैं कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो तो सफलता कदम चूमती है। इस कहावत को सारण जिले के मढ़ौरा प्रखंड अंतर्गत तेजपुरवा टोला चैनपुर गांव के रोहन कुमार ने सच कर दिखाया है। सीमित संसाधनों, आर्थिक संघर्ष और ग्रामीण पृष्ठभूमि के बावजूद रोहन ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है।

रोहन के पिता जितेंद्र कुमार सिंह एक दैनिक मजदूर हैं, जिनकी आमदनी सीमित रही है। बावजूद इसके उन्होंने कभी अपने बेटे की पढ़ाई को बाधित नहीं होने दिया। मां सविता देवी एक आशा कार्यकर्ता हैं, जो कम मानदेय में भी बेटे के सपनों को सींचती रहीं। परिवार की आर्थिक स्थिति साधारण थी, लेकिन माता-पिता का भरोसा, परिश्रम और रिश्तेदारों का सहयोग रोहन की सबसे बड़ी पूंजी बना।

दस साल की उम्र से शुरू हुआ संघर्ष का सफर

रोहन कुमार ने वर्ष 2014 में महज दस वर्ष की उम्र में आवासीय बाल ज्ञान प्रतियोगिता निकेतन, महमदा (छपरा) में दाखिला लिया। यहीं से उनके सपनों ने आकार लेना शुरू किया। अनुशासन, नियमित पढ़ाई और लक्ष्य के प्रति समर्पण ने उन्हें बाकी छात्रों से अलग पहचान दिलाई। इसी संस्थान में पढ़ाई के दौरान रोहन के भीतर देशसेवा की भावना गहराती चली गई।

सैनिक स्कूल से NDA तक की उड़ान

प्राथमिक शिक्षा के बाद रोहन ने सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा पास की और सैनिक स्कूल, केरल में कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की। सैनिक स्कूल के अनुशासित माहौल ने उनके व्यक्तित्व को निखारा और सेना में जाने के संकल्प को और मजबूत किया। इसके बाद उन्होंने देश की प्रतिष्ठित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) की कठिन परीक्षा उत्तीर्ण की। कठोर प्रशिक्षण और अनुशासन से गुजरने के बाद रोहन ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट का पद हासिल किया।

पहले स्कूल में भावुक स्वागत

लेफ्टिनेंट बनने के बाद रोहन जब अपने पहले शिक्षण संस्थान आवासीय बाल ज्ञान प्रतियोगिता निकेतन पहुंचे, तो माहौल गर्व और भावनाओं से भर गया। संस्थान के संचालक पवन कुमार और राज कमल ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। छात्रों ने तालियों और पुष्पवर्षा के साथ अपने पूर्व छात्र का अभिनंदन किया।

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इस मौके पर रोहन कुमार ने छात्रों से संवाद करते हुए अपने संघर्ष और सफलता की कहानी साझा की। उन्होंने कहा, “हार्ड वर्क और किस्मत एक दिन जरूर मिलते हैं, बस जरूरी है कि हम उस मौके के लिए खुद को तैयार रखें।”

पढ़ाई का मंत्र और टीमवर्क

रोहन ने बताया कि छात्र जीवन में वे गणित पर विशेष ध्यान देते थे और दोस्तों के साथ मिलकर पढ़ाई करते थे। हिंदी मुहावरों और सामान्य अध्ययन की तैयारी वे समूह में किया करते थे। उनका मानना है कि टीमवर्क और आपसी सहयोग से कठिन से कठिन विषय भी आसान हो जाता है।

माता-पिता के लिए भी संदेश

रोहन ने बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों को भी अहम संदेश दिया। उन्होंने कहा, “माता-पिता को बच्चों पर अनावश्यक दबाव नहीं डालना चाहिए। भरोसा, समझ और सकारात्मक माहौल ही बच्चों को आगे बढ़ने की ताकत देता है।”

गांव से जिले तक खुशी की लहर

रोहन की इस उपलब्धि से तेजपुरवा टोला चैनपुर गांव, मढ़ौरा प्रखंड और पूरे सारण जिले में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि रोहन की सफलता यह साबित करती है कि गांव का बेटा भी मेहनत और सही मार्गदर्शन से देश की सेवा में उच्च पद हासिल कर सकता है।

लेफ्टिनेंट रोहन कुमार की कहानी संघर्ष, अनुशासन और आत्मविश्वास की मिसाल है। यह कहानी न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों में भी बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।

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Ganpat Aryan
Ganpat Aryan
वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर, अमर उजाला और हिन्दुस्थान समाचार में सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।

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वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर, अमर उजाला और हिन्दुस्थान समाचार में सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।

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