Ahilya Vatika: जहां हुआ था माता अहिल्या का उद्धार, उसी धरती पर बन रही भव्य अहिल्या वाटिका
राम-लक्ष्मण व महर्षि विश्वामित्र के आदमकद विग्रह होंगे स्थापित

छपरा: सारण जिले के ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व वाले गौतम ऋषि मंदिर परिसर में इन दिनों धार्मिक उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है। गौतम क्षेत्र रिविलगंज स्थित मंदिर प्रांगण में निर्माणाधीन अहिल्या वाटिका (अहिल्या पार्क) को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसी वाटिका में स्थापित किए जाने वाले माता अहिल्या, महर्षि विश्वामित्र, प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण के आकर्षक आदमकद विग्रहों का निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। कलाकार इन प्रतिमाओं को जीवंत और मनमोहक स्वरूप देने में जुटे हैं, जिससे पूरा परिसर आध्यात्मिक आभा से ओतप्रोत नजर आ रहा है।
स्थानीय शिल्पकारों द्वारा किया जा रहा विग्रह निर्माण
बताया जाता है कि इन विग्रहों का निर्माण सारण जिले के दाउदपुर बाजार निवासी शिल्पकार कन्हैया राम एवं विकास कुमार द्वारा किया जा रहा है। दोनों कलाकारों ने अत्यंत बारीकी और कलात्मकता के साथ प्रतिमाओं को आकार दिया है, जिससे वे देखने में बेहद आकर्षक और भावपूर्ण प्रतीत हो रही हैं।
राम नवमी के अवसर पर होगी विग्रहों की स्थापना
इस संबंध में मंदिर के महंत प्रभुनाथ दास जी महाराज तथा समाजसेवी विनोद कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि सभी विग्रहों की विधिवत स्थापना वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के साथ आगामी राम नवमी (चैत्र मास) के पावन अवसर पर की जाएगी। इस अवसर पर मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान और विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
वाटिका को बनाया जा रहा आकर्षक
अहिल्या वाटिका को आकर्षक बनाने के लिए यहां सामान्य पौधों के साथ विशेष प्रकार के फूलदार और पत्तेदार पौधे लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा वाटिका में फव्वारे, घास की ग्राफ्टिंग, सुंदर पाथवे और प्रेरणादायी व ज्ञानवर्धक स्लोगन भी लिखे जा रहे हैं, ताकि आने वाले श्रद्धालुओं को धार्मिक और सांस्कृतिक जानकारी मिल सके।
नई पीढ़ी को मिलेगी धार्मिक जानकारी
शास्त्रों के जानकार व समाजसेवी विनोद कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि महर्षि गौतम-अहिल्या उद्धार स्थल के रूप में प्रसिद्ध इस मंदिर परिसर में विकसित की जा रही अहिल्या वाटिका का मुख्य उद्देश्य वर्तमान और भावी पीढ़ी को माता अहिल्या के उद्धार स्थल की महत्ता और उससे जुड़े धार्मिक प्रसंगों की जानकारी देना है।
22 जनवरी 2024 को हुआ था शिलान्यास
उन्होंने बताया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना का विधिवत शिलान्यास 22 जनवरी 2024 को प्रसिद्ध विद्वान आचार्य श्याम नंदन शास्त्री द्वारा किया गया था। विग्रहों के निर्माण में लगभग एक वर्ष का समय लगा है। शिल्पकारों ने अपनी कला से प्रतिमाओं को अत्यंत सुंदर और भावपूर्ण रूप दिया है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेंगी।
क्षेत्र में बढ़ा धार्मिक उत्साह
अहिल्या वाटिका के निर्माण को लेकर रिविलगंज और आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक उत्साह और उमंग का वातावरण बना हुआ है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस वाटिका के निर्माण से न केवल क्षेत्र की धार्मिक पहचान और मजबूत होगी, बल्कि श्रद्धालुओं व पर्यटकों के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक स्थल के रूप में विकसित होगा।
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- अंकिता कुमारी पत्रकारिता की छात्रा हैं। वर्तमान में वह संजीवनी समाचार डॉट कॉम के साथ इंटर्नशिप कर रही हैं और समाचार लेखन व फील्ड रिपोर्टिंग में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई है।
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