ऑपरेशन सिंदूर: जंग हो या आपदा, रेलवेमैन हमेशा सबसे आगे खड़ा मिला, बॉर्डर तक गोला-बारूद पहुंचाने को तैयार
रेल कर्मचारियों ने दिन-रात काम कर सेना को समर्थन दिया

Operation Sindoor: देश की जीवन रेखा माने जाने वाली भारतीय रेलवे सिर्फ यात्रियों की सेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट के समय में भी यह देश की सुरक्षा और आपात स्थितियों में अहम भूमिका निभाता है। All India Railwaymen’s Federation (AIRF) के जनरल सेक्रेटरी शिव गोपाल मिश्रा ने कहा कि “रेलवे देश की सेकंड लाइन ऑफ डिफेंस है, और जब भी देश को ज़रूरत पड़ी, रेलवेमैन सबसे आगे खड़ा मिला है।”
ऐतिहासिक उदाहरणों से जोड़ा गर्व:
मिश्रा ने कहा कि रेलवे कर्मचारियों ने 1962 के चीन युद्ध और 1965 के भारत-पाक युद्ध में अपनी जान की बाज़ी लगाकर देश के लिए काम किया।
- 1962: जब चीन की सेना अंदर तक घुस आई थी, तब पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के लुमडिंग डिविजन के स्टेशन मास्टर ने साथी कर्मचारियों के साथ बॉर्डर पर फंसी ट्रेन की प्रतीक्षा की और ड्यूटी नहीं छोड़ी।
- 1965: गधरा रोड पर पाकिस्तानी बमबारी में पटरियां तबाह हो गई थीं, फिर भी ट्रैकमैन ने जान जोखिम में डालकर लाइन को चालू किया, ताकि सेना तक गोला-बारूद और रसद पहुँचाई जा सके।
- बाघा और अमृतसर बॉर्डर पर भी, रेल कर्मचारियों ने दिन-रात काम कर सेना को समर्थन दिया।
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“देश पहले, बाकी बाद में”:
मिश्रा ने कहा, “आज अगर युद्ध या आपातकाल की स्थिति आती है तो रेलवेमैन ओवरटाइम या काम के घंटे नहीं देखेगा, सिर्फ देश के लिए काम करेगा। हम सीमा तक गोला-बारूद, रसद, सैन्य बल और जरूरी सामग्री पहुँचाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अगर जरूरत पड़ी तो हर कुर्बानी देने को भी तैयार हैं।”
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अटल युग का स्मरण और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति समर्थन:
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय हुए एक ऑपरेशन की याद दिलाते हुए कहा कि तब 24 घंटे के भीतर सभी दिशाओं से फौजियों और सैन्य सामग्री को एकत्र कर सीमा पर पहुँचाया गया था। उन्होंने स्पष्ट कहा कि रेलवे का हर कर्मचारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णयों के साथ खड़ा है और आतंकवाद के खात्मे के लिए हरसंभव मदद करेगा।
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