सारण में रामघाट पर रिवर रैचिंग कार्यक्रम के तहत डाला गया 2.15 लाख मछलियों का बीज

छपरा। सारण जिले के मांझी प्रखण्ड में घाघरा नदी पर अवस्थित रामघाट पर गंगा नदी तंत्र में नदी पुनर्स्थापना कार्यक्रम (रिवर रैचिग) के तहत द्वितीय चरण में शेष बचे दो लाख 15 हजार मत्स्य अंगुलिकाओं का नदी में गुरुवार पुनस्र्थापन किया गया। मालूम हो कि इससे पहले चार दिसंबर को जिला पदाधिकारी अमन समीर के द्वारा अंगुलिका साइज का भारतीय कॉर्प का मत्स्य बीज को घाघरा नदी में प्रवाहित करने का शुभारंभ किया गया था।
मछुआरों के आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति एवं नदियों के जल के गुणवत्ता पर पड़ा प्रभाव
मछुआरों के बीच यह संदेश दिया गया कि बिहार में कालांतर में नदियों के प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र पर मानव गतिविधियों और अविवेकपूर्ण मत्स्य दोहन एवं पर्यावरण प्रदुषण हावी होने के फल स्वरूप नदियों के मात्त्यिकी पर प्रतिकुल प्रभाव पड़ा हैं। इससे न केवल मत्स्य उत्पादन प्रभावित हुआ है बल्कि मूल मत्स्य प्रजातियों की विविधता अवांछनीय मछलियों की प्रजातियां में अभिवृद्धि तथा मत्स्य उत्पादन में अविश्वसनीय क्षति हुई है, जिसका सीधा प्रभाव मछुआरों के आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति एवं नदियों के जल के गुणवत्ता पर पड़ा है।
मछुआरों के आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान के लिए चल रहा है रिवर रैचिंग
बढ़ती आबादी के साथ गुणवत्ता युक्त मत्स्य प्रोटीन की मांग में अभिवृद्धि नदी मत्स्य संसाधन के सतत उपयोग संरक्षण तथा मछुआरों के आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान को दृष्टिपथ में रखते हुए रिवर रैचिग कार्यक्रम की स्वीकृति प्रदान की गई है। जिसके आलोक में भारतीय कार्प के अंगुलिका साइज मत्स्य बीज का घाघरा नदी में 3.50 लाख मत्स्य बीज का प्रवाह का शुभारंभ किया गया। इस योजना का प्रमुख उद्देश्य इससे मछली उत्पादन बढ़ता है, इससे नदी की जैव विविधता बनी रहती है, इससे मछुआरों की आजीविका में सुधार होता है।
अंगुलिका साइज मछलियों का नदियों से शिकार न किया जाए
इससे नदी प्रणाली में स्वस्थ वातावरण बनता है इससे मत्स्य संसाधनों का सतत उपयोग और संरक्षण होता है, इससे पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होता है। साथ में सामाजिक-आर्थिक लाभ बढ़ते है।नदी में भारतीय कार्य अंगुलिका साइज मछलियों का नदियों से शिकार न किया जाए।इसे बढ़ने-फलने फूलने दिया जाए । नदियों में 4 सेन्टीमीटर से कम के साइज का जाल का प्रयोग नहीं किया जाए ।
स्थानीय मछलियों की प्रजातियों के जर्म प्लाज्म का पुनर्स्थापना एवं संरक्षण किया जाए। बिहार मत्स्य जलकर प्रबंधन अधिनियम में खुले जल श्रोतों में मत्स्य उत्पादन एवं उत्पादकता को बनाए रखने के लिए 15 जून से 15 अगस्त तक समय अवधि में मत्स्य शिकार माही प्रतिषेध रहेगी। चार सेन्टीमीटर से कम का फॉसा जाल, गिल नेट नदियों में नहीं होगा। ।
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