
नई दिल्ली। देश में राजनीतिक भ्रष्टाचार के विरुद्ध मोदी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में भारतीय संविधान (130वाँ संशोधन) विधेयक, 2025 समेत तीन अहम बिल पेश किए। इस संशोधन के बाद प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री जेल में रहते हुए सत्ता का संचालन नहीं कर सकेंगे।
अमित शाह ने कहा कि इस बिल का उद्देश्य राजनीति में शुचिता और नैतिकता को मजबूती देना है। उन्होंने तर्क दिया कि संविधान निर्माताओं ने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि भविष्य में ऐसे हालात बनेंगे, जब मुख्यमंत्री या मंत्री बिना इस्तीफा दिए जेल से सरकार चलाएँगे।
बिल की प्रमुख बातें
- जेल से सत्ता संचालन पर रोक: प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्री अगर गिरफ्तार होकर जेल जाते हैं तो वे शासन नहीं चला सकेंगे।
- 30 दिन में जमानत अनिवार्य: किसी नेता को यदि गिरफ्तारी के बाद 30 दिन के भीतर जमानत नहीं मिलती, तो वह पद पर बने रहने के योग्य नहीं रहेगा।
- जमानत के बाद वापसी: अदालत से जमानत मिलने पर वही व्यक्ति अपने पद पर पुनः आसीन हो सकेगा।
सदन में तीखी बहस
इस बिल पर लोकसभा में जोरदार बहस हुई। अमित शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि “प्रधानमंत्री मोदी ने खुद को भी कानून के दायरे में लाने का कदम उठाया है, जबकि विपक्ष जेल से सरकार चलाने की परंपरा को बचाना चाहता है।” उन्होंने विपक्ष को यह भी याद दिलाया कि आपातकाल के दौरान संविधान संशोधन संख्या-39 के जरिये तत्कालीन प्रधानमंत्री को कानून से ऊपर रखने की कोशिश की गई थी। शाह ने कहा कि NDA की नीति हमेशा से नैतिकता पर आधारित रही है, जबकि विपक्ष भ्रष्टाचारियों को बचाने में लगा है।
विपक्ष का विरोध
मुख्य विपक्षी दलों ने इस बिल का विरोध किया और इसे राजनीतिक मकसद से प्रेरित बताया। सदन में कई नेताओं ने हंगामा किया, जिस पर शाह ने कहा कि विपक्ष का यह रवैया जनता के बीच उन्हें “पूरी तरह से बेनकाब” कर रहा है।
राजनीतिक महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संशोधन देश की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। हाल के वर्षों में ऐसी घटनाएँ देखने को मिली हैं, जब मुख्यमंत्री या मंत्री जेल में रहते हुए भी सत्ता पर बने रहे। यह बिल उस प्रवृत्ति पर लगाम लगाने की कोशिश है।
मोदी सरकार का यह कदम राजनीतिक शुचिता बहाल करने और भ्रष्टाचार पर सख्ती का संदेश देता है, जबकि विपक्ष इसे सत्ता पक्ष का “राजनीतिक हथियार” बता रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि संयुक्त संसदीय समिति (JPC) में इस पर कैसी गहन बहस होती है और आगे इसका स्वरूप कैसा बनता है।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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