सारण में भू-माफियाओं पर शिकंजा: 900 एकड़ सरकारी जमीन का फर्जी जमाबंदी रद्द
भूमिहीन परिवारों को मिलेगा लाभ

छपरा। सारण जिले में सरकारी भूमि की सुरक्षा और राजस्व प्रशासन को पारदर्शी बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अपर समाहर्ता, सारण द्वारा अब तक लगभग 902 एकड़ सरकारी भूमि की फर्जी जमाबंदी रद्द कर दी गई है। यह केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति की रक्षा, भूमाफियाओं पर शिकंजा कसने और आम नागरिकों के अधिकारों को सुरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस उपलब्धि की जानकारी समाहर्ता-सह-जिला पदाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने 13 जुलाई 2026 को आयोजित राजस्व समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को दी।
भूमिहीन परिवारों को मिलेगा लाभ
बैठक में अपर समाहर्ता मुकेश कुमार, सभी भूमि सुधार उप समाहर्ता, जिले के सभी अंचलाधिकारी तथा राजस्व अधिकारी उपस्थित थे। समीक्षा के दौरान स्पष्ट किया गया कि आने वाले समय में केवल फर्जी जमाबंदी रद्द करना ही उद्देश्य नहीं होगा, बल्कि पूरे राजस्व तंत्र को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनाया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा समाप्त होने से विकास योजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध होगी, भूमिहीन परिवारों को लाभ मिलेगा और सरकारी परियोजनाओं में आने वाली बाधाएं भी कम होंगी।
सरकारी भूमि किसी भी जिले की सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक संपत्ति होती है। स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल, सरकारी कार्यालय, खेल मैदान और जनकल्याण की अनेक योजनाएं इन्हीं जमीनों पर विकसित होती हैं। यदि इन पर फर्जी जमाबंदी या अवैध कब्जा हो जाए तो विकास कार्य वर्षों तक अटक जाते हैं। ऐसे में सारण प्रशासन की यह कार्रवाई केवल वर्तमान के लिए नहीं बल्कि जिले के भविष्य के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
डीएम वैभव श्रीवास्तव ने तय की नई कार्ययोजना
राजस्व मामलों की समीक्षा बैठक में जिला पदाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि अब राजस्व प्रशासन में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि दाखिल-खारिज, परिमार्जन, ई-मापी, भूमिहीन परिवारों को भूमि उपलब्ध कराना तथा सरकारी भूमि की सुरक्षा जैसी सभी प्रक्रियाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करना होगा।
बैठक में विशेष रूप से यह निर्देश दिया गया कि सभी अंचलों में लंबित दाखिल-खारिज के मामलों को शीघ्र समाप्त किया जाए। आम नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए प्रत्येक अंचल में हेल्प डेस्क स्थापित करने का निर्णय लिया गया। यह हेल्प डेस्क आवेदनकर्ताओं को आवश्यक जानकारी देने, दस्तावेजों की जांच करने तथा प्रक्रियाओं को सरल बनाने में सहायता करेगी।
जिला पदाधिकारी ने अमीनों के कार्यों की भी समीक्षा कर अंचलवार प्रतिवेदन तैयार करने का निर्देश दिया। इससे यह स्पष्ट होगा कि किस क्षेत्र में मापी कार्य लंबित है, किन मामलों में अनावश्यक देरी हो रही है और किन स्थानों पर अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता है। साथ ही व्यवहार न्यायालय में लंबित मामलों में सरकार की ओर से समय पर लिखित पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए ताकि सरकारी भूमि से जुड़े विवादों का शीघ्र निपटारा हो सके।
जमाबंदी रद्द होना क्यों है ऐतिहासिक उपलब्धि
सरकारी भूमि की फर्जी जमाबंदी रद्द करना एक जटिल कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया है। इसमें पुराने अभिलेखों की जांच, खतियान, रजिस्टर, भू-अभिलेख, सीमांकन, जांच रिपोर्ट तथा विभिन्न स्तरों पर सत्यापन की प्रक्रिया शामिल होती है। ऐसे मामलों में वर्षों पुराने रिकॉर्ड खंगालने पड़ते हैं और कई बार न्यायालयों में भी मुकदमे लंबित रहते हैं। इसलिए 902 एकड़ भूमि की जमाबंदी रद्द होना प्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा या फर्जी कागजात के माध्यम से स्वामित्व प्राप्त करने की कोशिश अब सफल नहीं होगी। इससे राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ेगी, भूमाफियाओं की गतिविधियों पर अंकुश लगेगा और सरकारी योजनाओं के लिए आवश्यक भूमि समय पर उपलब्ध हो सकेगी।
इस पहल का एक बड़ा सामाजिक पक्ष भी है। जब सरकारी भूमि सुरक्षित रहेगी तो भूमिहीन परिवारों के पुनर्वास, गरीबों को आवासीय पट्टा, विद्यालयों के विस्तार, स्वास्थ्य संस्थानों के निर्माण और आधारभूत संरचना के विकास के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध हो सकेगी। यही कारण है कि प्रशासन की इस कार्रवाई को जिले में सुशासन और पारदर्शी भूमि प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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