Vaishali Express: 52 साल बाद बदला इतिहास, वैशाली सुपरफास्ट से हट गया ‘सुपरफास्ट’ का टैग
वैशाली सुपरफास्ट एक्सप्रेस का हुआ डाउनग्रेड

छपरा। उत्तर बिहार की शान और दशकों तक यात्रियों की पहली पसंद रही वैशाली सुपरफास्ट एक्सप्रेस आज से इतिहास के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है। 1973 में जयंती जनता सुपरफास्ट के रूप में शुरू होकर देश की चुनिंदा प्रतिष्ठित सुपरफास्ट ट्रेनों में शामिल रही यह ट्रेन अब सुपरफास्ट श्रेणी से बाहर हो गई है। रेलवे ने इसका दर्जा बदलते हुए इसे सामान्य एक्सप्रेस में डाउनग्रेड कर दिया है।
इसके साथ ही ट्रेन संख्या 12553/12554 को बदलकर अब 15565/15566 वैशाली एक्सप्रेस कर दिया गया है। यानी आज से यह ट्रेन आधिकारिक रूप से “सुपरफास्ट” श्रेणी का हिस्सा नहीं रहेगी।
सुपरफास्ट का दर्जा क्यों छिना?
रेलवे सूत्रों के अनुसार, पिछले वर्षों में इस ट्रेन में कई बदलाव हुए, जिनमें सबसे बड़ा कारण रहा
1. अनियंत्रित ठहराव में बढ़ोतरी
- शुरुआत में यह ट्रेन सिर्फ 14 स्टेशनों पर रुकती थी।
- राजनीतिक और क्षेत्रीय मांगों पर ठहराव बढ़कर 29 स्टेशन हो गए।
2. औसत गति में भारी गिरावट
सुपरफास्ट ट्रेन की औसत गति 55 किमी/घंटा से अधिक होनी चाहिए, लेकिन ठहराव, रूट विस्तार, और परिचालन दूरी बढ़ने से इसकी गति लगातार घटती गई और यह मानकों पर खरी नहीं उतरी। साफ-सफाई, समयपालन एवं यात्री सुविधा के स्तर में कमी आने से यह ट्रेन धीरे-धीरे अपने पुराने गौरव से दूर होती चली गई।
सुपरफास्ट ट्रेन की विशेषताएँ (मानक जिन पर वैशाली खरी नहीं उतरी)
- ट्रेन नंबर 12, 20 या 22 से शुरू होते हैं।
- गति औसत 55–100 किमी/घंटा के बीच होती है।
- ठहराव कम और सिर्फ बड़े स्टेशनों पर।
- प्राथमिकता वाला रूट।
- अतिरिक्त सुपरफास्ट सरचार्ज लिया जाता है।
अब इन मानकों पर खरा न उतरने के कारण इसका “सुपरफास्ट” टैग हटा दिया गया।
किराया होगा कम — जानें कितना फर्क पड़ेगा
बरौनी–नई दिल्ली रूट पर सुपरफास्ट और एक्सप्रेस के भाड़े में इतना अंतर आएगा:
| श्रेणी | सुपरफास्ट किराया | एक्सप्रेस किराया | फर्क |
|---|---|---|---|
| स्लीपर | ₹580 | ₹550 | ₹30 |
| थ्री ई | ₹1415 | ₹1365 | ₹50 |
| 3A | ₹1515 | ₹1465 | ₹50 |
| 2A | ₹2150 | ₹2100 | ₹50 |
| 1A | ₹3620 | ₹3540 | ₹80 |
प्रत्येक श्रेणी में लगभग ₹30 से ₹80 तक की कमी।
52 वर्षों की गौरवगाथा
31 अक्टूबर 1973 को समस्तीपुर से तत्कालीन रेलमंत्री ललित नारायण मिश्र ने हरी झंडी दिखाई। शुरुआत में समस्तीपुर–गोरखपुर–लखनऊ के बीच सप्ताह में 4 दिन चलती थी।बाद में इसका विस्तार मुजफ्फरपुर, फिर बरौनी, और 2019 में कोसी क्षेत्र की मांग पर सहरसा तक किया गया।2023 में इसे आगे ललितग्राम स्टेशन तक बढ़ा दिया गया। कभी अपनी समयपालन, सफाई और बेहतर सेवा के लिए प्रसिद्ध वैशाली सुपरफास्ट एक्सप्रेस को लगातार विस्तार और हस्तक्षेपों ने कमजोर कर दिया।
अब चुनौती क्या है?
सुपरफास्ट का टैग भले हट गया हो, लेकिन यात्रियों की उम्मीदें कायम हैं। अब सवाल यह है कि क्या यह सामान्य एक्सप्रेस बनने के बाद भी अपनी पुरानी विश्वसनीयता, समयपालन और सर्विस क्वालिटी बनाए रख पाएगी? उत्तर बिहार की पहचान रही यह ट्रेन अब एक नई यात्रा पर है— लेकिन इसकी पुरानी शान को वापस लाने की जिम्मेदारी रेलवे पर होगी।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर, अमर उजाला और हिन्दुस्थान समाचार में सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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