हाथीपाँव से बचाव के घर-घर जाकर दवा खिलाएंगी स्वास्थ्य कार्यकर्ता, 14 दिनों तक चलेगा विशेष अभियान

छपरा

छपरा। जिले में सर्वजन दवा सेवन (आईडीए) राउंड 14 दिन के बजाय कुल 17 दिनों का होगा। जिसमें प्रथम तीन दिन बूथ स्तर यानी क्षेत्र में मौजूद सरकारी/निजी स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, सार्वजनिक स्थलों में बूथ लगाकर बच्चों, शिक्षक और शिक्षिकाओं सहित अन्य स्कूल के स्टाफ को फाइलेरिया कि दवा खिलानी है। जबकि शेष 14 दिनों तक गृह भ्रमण कर स्वास्थ्य कर्मी या आशा कार्यकर्ताओं के द्वारा तीन तरह की दवा का सेवन अपने सामने ही खिलाना है। उक्त बातें सिविल सर्जन डॉ सागर दुलाल सिन्हा ने सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सिफार) द्वारा सदर अस्पताल परिसर स्थित जिला मलेरिया कार्यालय के सभागार में आयोजित मीडिया कार्यशाला के दौरान उपस्थित मीडियाकर्मियों से कही।

सिविल सर्जन डॉ सागर दुलाल सिन्हा ने यह भी कहा कि आईडीए अभियान के दौरान जिलाधिकारी अमन समीर के दिशा- निर्देश और मार्गदर्शन में जिला और प्रखंड स्तरीय समन्वय कमिटी के द्वारा पर्यवेक्षण किया जाना है। जिसमें संबंधित प्रखंड के बीडीओ, सीओ, सीडीपीओ, एमओआईसी, बीएचएम, बीसीएम, बीएमएनई, वीबीडीएस के अलावा डब्ल्यूएचओ, पीरामल स्वास्थ्य सीफार और पीसीआई के जिला और प्रखंड स्तर के पदाधिकारियों द्वारा प्रतिदिन पर्यवेक्षण किया जाएगा।

इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ सागर दुलाल सिन्हा, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ दिलीप कुमार सिंह, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण सलाहकार (डीवीबीडीसी) सुधीर कुमार सिंह, वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी (वीडीसीओ) अनुज कुमार, सिफार के क्षेत्रीय कार्यक्रम समन्वयक धर्मेंद्र कुमार रस्तोगी, पीरामल स्वास्थ्य के आरएम हरिशंकर कुमार, सिफार के डीसी बिनोद कुमार श्रीवास्तव, पीसीआई के डीएमसी सौरिष बनर्जी, सिफार के बीसी कृष्णा सिंह, नेटवर्क सदस्य राम लोचन भगत और कुश जी सिंह सहित विभागीय अधिकारी और कर्मी उपस्थित थे।

जिलेवासियों को फाइलेरिया रोधी दवा के रूप में तीन प्रकार की दवा खिलाई जाएगी: डॉ दिलीप कुमार सिंह

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ दिलीप कुमार सिंह ने कहा कि जिले में राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत सरकार द्वारा सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम (आईडीए) चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत साल में एक बार फाइलेरिया रोगियों सहित अन्य सभी लोगों को फाइलेरिया जैसी दिव्यांग बनाने वाली बीमारी से बचाव के लिए फाइलेरिया रोधी दवा के रूप में तीन प्रकार की दवा जिसमें आईवरमैक्टीन, अल्बेंडाजोल और डीईसी दवा का सेवन कराया जाना है। जबकि अन्य जिलों में एमडीए कार्यक्रम के तहत दो प्रकार की दवा जिसमें अल्बेंडाजोल और डीईसी की गोली खिलाई जानी है। इस दौरान दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारी से ग्रसित लोगों को फाइलेरिया कि दवा नहीं खिलाया जाता है।

मांझी प्रखंड के दो नेटवर्क सदस्यों को दिया गया एमएमडीपी कीट:

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण सलाहकार (डीवीबीडीसी) सुधीर कुमार सिंह ने कहा कि सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सिफार) के द्वारा आयोजित मीडिया कार्यशाला के दौरान मांझी प्रखंड के कौरू धौरू गांव में पेशेंट सपोर्ट नेटवर्क के सक्रिय सदस्य राम लोचन भगत के 70 वर्षीय पुत्र अनिल कुमार भगत और दुर्गापुर गांव स्थित दुर्गापुर पेशेंट सपोर्ट ग्रुप के सक्रिय 17 वर्षीय युवा सदस्य कुश जी सिंह को सिविल सर्जन और विभागीय अधिकारी के द्वारा संयुक्त रूप से रुग्णता प्रबंधन एवं दिव्यांगता से बचाव (एमएमडीपी) कीट का वितरण किया गया। साथ ही इसके माध्यम से हाथीपांव का प्रबंधन, एक्यूट अटैक का प्रबंधन के साथ- साथ प्रतिदिन साफ- सफाई और एक्सरसाइज के बारे में बताया गया।

नेटवर्क सदस्यों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और मीडिया कर्मियों के समक्ष अपनी व्यथा सुनाकर दवा खाने के लिए की अपील:

मीडिया कार्यशाला में उपस्थित 70 वर्षीय नेटवर्क सदस्य अनिल कुमार भगत और 17 वर्षीय युवा सदस्य कुश जी सिंह के द्वारा संयुक्त रूप से फाइलेरिया (हाथीपांव) जैसी बीमारी से ग्रसित होने से संबंधित अनुभव को स्वास्थ्य विभाग और मीडियाकर्मियों के साथ साझा किया गया। मीडिया के माध्यम से अपील करते हुए कहा गया कि आगामी 10 फरवरी से शुरू होने वाले 17 दिवसीय आईडीए कार्यक्रम के दौरान प्रथम तीन दिनों तक बूथस्तर पर जबकि शेष 14 कार्य दिवस के अनुसार स्वास्थ्य कर्मी या आशा कार्यकर्ताओं के द्वारा गृह भ्रमण कर दवा खिलाई जाएगी। जिसमें आप सभी को बढ़ चढ़ कर भाग लेकर खुद दवा का सेवन तो करना ही है। साथ ही आप अपने परिवार, आसपास या सगे संबंधियों को दवा खाने के लिए प्रेरित करेंगे। ताकि फाइलेरिया जैसी बीमारी से बचाव और सुरक्षित रह सकें।