सारण के लाल उदय को राष्ट्रपति ने दिया तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार, गवां चुके है अपना एक पैर

छपरा। इरादा मजबूत हो तो बाधाएं सामने नहीं आतीं। इस वाक्य को उदय कुमार ने साबित कर दिया है। जिले के बनियापुर प्रखण्ड के बारोंपुर निवासी 36 वर्षीय उदय कुमार ने अपने साहसिक कार्यों से कीर्तिमान स्थापित किया है। दुर्घटना में एक पैर गंवा चुके उदय ने लैंड एडवेंचर में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल की है। इसके लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उदय कुमार को तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार 2023 से नवाजा है।
साथ ही राष्ट्रपति ने हौसला आफजाई करते हुए ट्वीट किया है कि उदय कुमार ने पश्चिम सिक्किम के कंचनजंघा राष्ट्रीय उद्यान में माउंट रेनॉक (16,500 फीट) पर सफलता पूर्वक चढ़ाई कर असाधारण साहस व दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया है। उदय ने 780 वर्ग फुट का भारतीय ध्वज प्रदर्शित किया है। यह उपलब्धि सिर्फ सारण जिला ही नहीं बल्कि पूरे बिहार के लिए गर्व की बात है। जानकारी हो कि तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय पुरस्कार भारत सरकार के खेल मंत्रालय द्वारा साहसिक कार्यों के लिए दिया जाता है।
तंजानिया के सर्वश्रेष्ठ शिखर पर लहराया था तिरंगा
के टू के मिशन के तहत ग्रुप कैप्टन जय किशन के नेतृत्व में भारत की एक टीम अफ्रीकन देश तंजानिया की सर्वश्रेष्ठ चोटी किलिमंजारो पर चढ़ी थी। इस चोटी पर चढ़कर 78 वें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में 7800 स्क्वायर फीट पर टीम ने तिरंगा झंडा लहराया था। उस टीम में शामिल एक पैर वाले उदय कुमार भी बैसाखी के सहारे 19341 फीट ऊंची चोटी पर चढ़कर विश्व रिकॉर्ड बनाये।
वैसाखी के सहारे की ऊंची चोटी पर चढ़ाई:
91 प्रतिशत दिव्यांग होते हुए बैसाखी के सहारे इतनी ऊंची चोटी पर चढ़ने वाले वह पहले पुरुष हैं। उस टीम ने तंजानिया में थल, जल व वायु तीनों जगह तिरंगा लहराया। रक्षा मंत्रालय के तहत कंचनजंगा से किलिमंजारो मिशन में ग्रुप कैप्टन जय किशन व उदय कुमार के अलावा सूबेदार मेजर महेन्द्र यादव, डॉ. श्रुति, पावेल, सुलोचना तामांग भी शामिल थे। उस मिशन की सफलता में एडिशनल ज्वाइंट सेक्रेटरी दीप्ति चावला व सत्यजीत मोहंता की भी अहम भूमिका थी।
रेल दुर्घटना में एक पैर गंवा चुका है उदय
उदय कुमार का साहस व धैर्य वर्तमान युवाओं के लिए अनुकरणीय है। बीते 29 अक्टूबर 2015 को रेल दुर्घटना में उदय कुमार अपना एक पैर गंवा चुके हैं। बावजूद इसके उदय ने हिम्मत नहीं हारी।
प्राइवेट कंपनी में करता है काम
उदय एक प्राइवेट कम्पनी में मामूली वेतन पर नौकरी करते हैं। फिर भी ‘नो वर्क नो पे’ पर छुट्टियां लेकर वह मैराथन और पर्वतारोहण में भाग लेते रहते हैं। वह मैराथन के अपने जुनून को रोक नहीं पाते हैं। अभी तक लगभग सात दर्जन मैराथन-दौड़ में उदय कुमार भाग ले चुके हैं जिसमें 21 किलोमीटर दौड़ भी शामिल है। उदय को एक बेटा और एक बेटी भी है। दोनों बच्चे और पत्नी की जिम्मेदारी भी उदय के कंधों पर है।
अबतक नहीं मिला राज्य सरकार से सहयोग
बिहार सरकार ‘मेडल लाओ और नौकरी पाओ’ का नारा लगाती है, लेकिन 91 प्रतिशत दिव्यांग उदय कुमार को आज तक बिहार सरकार से किसी प्रकार का सहयोग नहीं मिला है। आये दिन आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यदि राज्य सरकार सहयोग करे तो उदय और बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। उनका अगला लक्ष्य माउण्ट एवरेस्ट पर चढ़ना है । उन्हें पूरा विश्वास है कि एक न एक दिन वह एवरेस्ट की चोटी पर बैसाखी और अपने जुनून के सहारे चढ़कर तिरंगा लहरायेंगे।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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