लिम्फेडेमा मरीजों के लिए दिव्यांगता सर्टिफिकेट बनाने की कवायद शुरू

– सरकार के गाइडलाइन के अनुसार 40 प्रतिशत तक दिया जाएगा प्रमाणपत्र
– मरीज को संबंधित पीएचसी व सदर अस्पताल में करानी होगी जांच
– जांच के बाद स्वीकृत किया जाएगा आवेदन, प्रमाण पत्र मिलने से सुधरेगी मरीजों की हालत
छपरा, 12 अप्रैल। गंभीर बीमारियों के कारण कई लोगों में जीने की चाह खत्म हो जाती है। ऐसी ही गंभीर बीमारियों में से एक है फाइलेरिया। जिसके कारण कई लोग हाथीपांव (लिम्फेडेमा) के शिकार हो जाते हैं। इनमें से कुछ की हालत इतनी गंभीर हो जाती है, जिससे वो चलने फिरने में असमर्थ हो जाते हैं। जिससे वो मानसिक रूप से भी कमजोर हो जाते हैं। क्योंकि इन परिस्थितियों में वो खुद को घर वालों पर बोझ समझने लगते हैं। लेकिन सरकार अब गंभीर रूप से लिम्फेडेमा के मरीजों का जीवन बेहतर बनाने की दिशा में कार्यरत है। इस क्रम में सरकार ने लिम्फेडेमा के मरीजों के लिए दिव्यांगता सर्टिफिकेट बनाने की कवायद शुरू कर दी है।
जिसके तहत अब सारण जिले में भी लिम्फेडेमा के हाथीपांव के मरीजों को दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अब तक आधा दर्जन से अधिक मरीजों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र निर्गत किया जा चुका है। जल्द ही यह प्रक्रिया प्रखंडों में स्थित सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी शुरू की जाएगी। ताकि, लिम्फेडेमा के कारण दिव्यांग हो चुके मरीजों को सहूलियत मिल सके।
मापदंड के अनुसार दिव्यांगता की होगी जांच :
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. दिलीप कुमार सिंह ने बताया कि लिम्फेडेमा की गंभीरता को देखते हुए सरकार व विभाग ने मरीजों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाने का निर्णय लिया। लेकिन, इसके लिए मरीजों के लिए अहर्ताएं रखी हैं। यह दिव्यांगता प्रमाणपत्र सिर्फ उन लिम्फेडेमा के मरीजों को ही निर्गत किया जाएगा, जो बीमारी के कारण चलने फिरने में असमर्थ हैं। इसकी जांच के लिए मरीज को सदर अस्पताल में आना होगा। जहां पर उनकी दिव्यांगता का परीक्षण किया जाएगा। उसके बाद उन्हें अधिकतम 40 प्रतिशत दिव्यांगता कैटेगरी का प्रमाण पत्र निर्गत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे में कई मरीज ऐसे भी आए जिनकी दिव्यांगता प्रतिशत शून्य है। ऐसे मरीज को समझना होगा कि यह सेवा केवल उन मरीजों को ही दी जाएगी, जो लिम्फेडेमा के कारण दिव्यांग हो चुके हैं।
लिम्फेडेमा के मरीजों के बीच शुरू होगा एमएमडीपी किट का वितरण :
डॉ. दिलीप कुमार सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने लिम्फेडेमा के मरीजों के लिए कई योजना शुरू की है। जिसमें लिम्फेडेमा के मरीजों के बीच रुग्णता प्रबंधन और विकलांगता रोकथाम (एमएमडीपी) के लिए किट का वितरण किया जा रहा है। जिसके तहत अब जिले के हाथीपांव के मरीजों को एमएमडीपी किट का वितरण किया जाएगा।
इसके लिए सभी प्रखंडों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को हाथीपांव के मरीजों की लाइन लिस्टिंग करने का निर्देश जारी किया गया है। ताकि, हाथीपांव के उन मरीजों को चिह्नित किया जा सके, जो ग्रेड चार से ऊपर हों। हाथीपांव के ग्रेड चार के ऊपर के मरीजों के पैरों की मांसपेशियों में फोल्ड्स आ जाते हैं, जिसके कारण उन्हें पैरों की साफ-सफाई रखनी आवश्यक हो जाती है। उन्होंने बताया कि किट वितरण के साथ मरीजों को किट के इस्तेमाल और व्यायाम के संबंध में बताया जाएगा। जिससे हाथीपांव की रोकथाम की जा सके।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर, अमर उजाला और हिन्दुस्थान समाचार में सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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