बिहारराजनीति

बिहार में पिछड़े वर्गों के विकास की नींव हमने रखी, अब फल दे रहा है परिश्रम: नीतीश

2005 से पहले वंचित तबकों के लिए नहीं हुआ कोई काम

पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से एक विस्तृत पोस्ट जारी कर पूर्व की सरकारों पर निशाना साधा और अपनी सरकार की उपलब्धियों का ब्योरा दिया। उन्होंने लिखा कि वर्ष 2005 से पहले की सरकारों ने पिछड़े, अति पिछड़े, अनुसूचित जाति-जनजाति, दलित-महादलित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए कोई ठोस पहल नहीं की।

नीतीश कुमार ने कहा कि उन दिनों शासन में बैठे लोगों ने इन वर्गों को न तो मान-सम्मान दिया, न ही राज्य संचालन में कोई महत्वपूर्ण भागीदारी।

“तब शिक्षा का घोर अभाव था। गरीबी और बेरोजगारी बढ़ती जा रही थी। चुनाव आते थे तो झूठे वादों और डर दिखाकर वोट लिया जाता था, फिर सत्ता में पहुंचकर वही लोग खुद को मालिक समझने लगते थे।

‘2005 के बाद न्याय के साथ विकास की शुरुआत’

मुख्यमंत्री ने कहा कि 24 नवंबर 2005 को नई सरकार बनने के बाद हमने “न्याय के साथ विकास” के सिद्धांत पर काम करना शुरू किया। समाज के हर तबके की तरक्की के लिए योजनाएं चलाई गईं — चाहे वह शिक्षा, रोजगार, या सामाजिक सम्मान से जुड़ी हों। उन्होंने याद किया कि वर्ष 1993 में जब मंडल कमीशन की तर्ज पर बिहार में अति पिछड़े और पिछड़े वर्ग को एक साथ जोड़ने की कोशिश की जा रही थी, तब उन्होंने इसका कड़ा विरोध किया था।

“मैंने तब साफ कहा था कि जननायक कर्पूरी ठाकुर की आरक्षण नीति में अगर कोई छेड़छाड़ हुई तो उसका हर स्तर पर विरोध करूंगा,” — नीतीश कुमार ने कहा।


अति पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण और कल्याण योजनाएं

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2006 में पंचायती राज और नगर निकाय चुनावों में अति पिछड़ा वर्ग को 20% आरक्षण दिया गया। वर्ष 2016 में राज्य की न्यायिक सेवा में सीधी नियुक्ति में अति पिछड़ा वर्ग को 21% और पिछड़ा वर्ग को 12% आरक्षण का प्रावधान किया गया। वर्ष 2007-08 में इनके लिए अलग पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग बनाया गया।

इस विभाग का वार्षिक योजना बजट 2008-09 में जहां 42.17 करोड़ रुपये था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 1,900 करोड़ रुपये हो गया है। राज्य के सभी जिलों में जननायक कर्पूरी ठाकुर छात्रावास का निर्माण कराया गया है, जहाँ लगभग 4,500 छात्र निःशुल्क शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

युवाओं को मिला रोजगार और प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के 33,644 और अति पिछड़ा वर्ग के 11,360 युवाओं को वाहन खरीदने के लिए अनुदान दिया गया है। वहीं सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना के तहत 10,000 से अधिक अभ्यर्थियों को आर्थिक सहायता दी गई है। मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के अंतर्गत अब तक 40,462 युवक-युवतियों को लाभ मिला है। उन्हें 10 लाख रुपये तक की सहायता दी जा रही है, जिसमें 5 लाख रुपये अनुदान और 5 लाख रुपये ब्याजमुक्त ऋण के रूप में दिए जाते हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा विस्तार

मुख्यमंत्री ने बताया कि 2005 से पहले राज्य में 66 आवासीय विद्यालय थे, जिनकी स्थिति खराब थी। अब इन्हें 10+2 स्तर में उत्क्रमित किया गया है और क्षमता बढ़ाकर 720 विद्यार्थियों प्रति विद्यालय कर दी गई है। वर्ष 2021 में 70 नए आवासीय विद्यालयों के निर्माण का निर्णय लिया गया, जिनमें से अधिकांश का निर्माण पूरा हो गया है। राज्य में अब कुल 84,240 विद्यार्थियों के लिए आवासीय क्षमता उपलब्ध है। साथ ही, पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग की छात्राओं के लिए भी प्रत्येक जिले में छात्रावास संचालित हैं।

लघु उद्यमी योजना और छात्रवृत्ति पर जोर

जाति-आधारित गणना में राज्य में 94 लाख गरीब परिवारों की पहचान की गई, जिनके लिए लघु उद्यमी योजना के तहत 2 लाख रुपये की सहायता दी जा रही है। इसके अलावा, पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग प्रवेशिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना के तहत कक्षा 1 से 10 तक की छात्राओं को 7,200 रुपये वार्षिक और उच्च शिक्षा के लिए 2,000 से 4 लाख रुपये तक की छात्रवृत्ति दी जा रही है। अनुसूचित जाति और जनजाति मेधावृत्ति योजना के तहत प्रथम श्रेणी से मैट्रिक पास करने वाले छात्रों को 10,000 रुपये और द्वितीय श्रेणी वालों को 8,000 रुपये दिये जाते हैं।

महादलित और जनजाति समाज के लिए विशेष पहल

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2008 में महादलित विकास मिशन की स्थापना की गई और राज्यभर में 10 हजार विकास मित्रों की नियुक्ति की गई। इनका मानदेय 13,700 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। इसके साथ ही परिवहन भत्ता और स्टेशनरी भत्ता में भी वृद्धि की गई है। वर्ष 2014 में अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए ‘स्वाभिमान बटालियन’ का गठन किया गया, जिसका मुख्यालय पश्चिमी चंपारण में है।

‘हम जो कहते हैं, उसे पूरा करते हैं’ — नीतीश कुमार

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश के अंत में कहा, “राज्य के पिछड़े, अति पिछड़े, अनुसूचित जाति-जनजाति, दलित-महादलित, आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों की तरक्की के लिए हमने जो कार्य किए हैं, उन्हें जनता याद रखेगी। आगे भी हम न्याय के साथ विकास की राह पर चलते रहेंगे। हम जो कहते हैं, उसे पूरा करते हैं।”

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Ganpat Aryan
Ganpat Aryan
वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर, अमर उजाला और हिन्दुस्थान समाचार में सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।

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वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर, अमर उजाला और हिन्दुस्थान समाचार में सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।

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