Chhapra News: अब मासूमों की सुरक्षा के साथ भविष्य भी संवरेगा, पढ़ाई-कौशल और स्वास्थ्य पर डीएम का जोर
280 परवरिश लाभुकों की प्रक्रिया होगी तेज

छपरा। जिले में बाल संरक्षण व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और सामाजिक पुनर्वास पर विशेष जोर दिया है। जिला पदाधिकारी वैभव श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आयोजित चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी की बैठक में पर्यवेक्षण गृह, बाल कल्याण समिति, चाइल्ड हेल्पलाइन, परवरिश और स्पॉन्सरशिप योजना की विस्तृत समीक्षा की गयी। डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बच्चों से जुड़ी प्रत्येक प्रक्रिया निर्धारित समय-सीमा में पूरी हो और किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब नहीं किया जाए।
बैठक में पर्यवेक्षण गृह में बच्चों की आवासीय व्यवस्था, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन और कौशल विकास से लेकर दत्तक ग्रहण तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक के विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा हुई। वहीं बाल कल्याण समिति के समक्ष लंबित मामलों की केसवार समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
पर्यवेक्षण गृह में शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष जोर
पर्यवेक्षण गृह की व्यवस्था की समीक्षा के दौरान बच्चों के आवासन, क्षमता से अधिक बच्चों के रहने, सुरक्षा, साफ-सफाई, कचरा उठाव और फॉगिंग की स्थिति की जानकारी ली गयी। सामुदायिक भवन में सुरक्षा व्यवस्था और शौचालय की उपलब्धता की भी समीक्षा की गयी।
डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिया कि किशोर न्याय से जुड़े मामलों में बच्चों के साथ कार्य करते समय कोई भी पुलिसकर्मी उनके सामने पुलिस वर्दी या हथियार के साथ उपस्थित न हो। उन्होंने बच्चों के अनुकूल वातावरण और गरिमापूर्ण व्यवहार सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
उन्होंने पर्यवेक्षण गृह में बच्चों के शिक्षा और कौशल विकास के लिए विशेष पहल करने को कहा। जिला नियोजन पदाधिकारी के कार्यालय में पदस्थापित स्किल मैनेजर को बच्चों की वर्तमान स्थिति और रुचि का आकलन कर बेसिक डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता और अल्पकालिक कंप्यूटर पाठ्यक्रम की व्यवस्था कराने का निर्देश दिया।
बच्चों के स्तर के अनुसार बनेगा पाठ्यक्रम
डीएम ने जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी को शिक्षा विभाग के समन्वय से बच्चों के वर्तमान सीखने के स्तर का आकलन कराने का निर्देश दिया। इसके आधार पर उम्र और सीखने की क्षमता के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा।
उद्देश्य यह है कि पर्यवेक्षण गृह में रह रहे बच्चे अपनी शैक्षणिक स्थिति के अनुरूप पढ़ाई जारी रख सकें और आगे की शिक्षा या कौशल प्रशिक्षण के लिए बेहतर तरीके से तैयार हों। बच्चों को सकारात्मक और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए इनडोर खेलों की व्यवस्था करने को भी कहा गया। इसके तहत मोनोपोली, चाइनीज चेकर्स और अन्य बोर्ड गेम उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।
हर माह स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण और उपचार की निगरानी
डीएम ने पर्यवेक्षण गृह में रह रहे बच्चों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। सदर अस्पताल के चिकित्सकों के माध्यम से नियमित स्वास्थ्य निरीक्षण कराने, टीकाकरण की स्थिति की निगरानी करने और चिकित्सकीय परामर्श की अगली तिथि का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। बच्चों के लिए निर्धारित आहार तालिका के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराने और दीर्घकालीन उपचार की जरूरत वाले बच्चों के लिए समुचित व्यवस्था करने को भी कहा गया।
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए आवश्यक सहयोग, विभागीय समन्वय और मनोवैज्ञानिक अथवा मनोचिकित्सकीय जांच की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। वहीं वन स्टॉप सेंटर के परामर्शदाताओं को बच्चों से मिलकर आवश्यक परामर्श और काउंसलिंग करने को कहा गया।
दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया में नहीं होगी अनावश्यक देरी
बाल कल्याण समिति की समीक्षा के दौरान आवासित बच्चों की केस हिस्ट्री की जानकारी ली गयी और प्रत्येक मामले के अनुसार आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया गया। जिन बच्चों को कानूनी रूप से दत्तक ग्रहण के लिए स्वतंत्र घोषित करने की प्रक्रिया अपनायी जानी है, उनके संबंध में आवश्यक सार्वजनिक सूचना प्रकाशन की कार्रवाई प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरी करने को कहा गया।
डीएम ने कहा कि समय पर यह प्रक्रिया पूरी होने से यदि बच्चे के जैविक अभिभावक सामने आते हैं तो उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत बच्चे तक पहुंचने का अवसर मिल सकेगा। वहीं पात्र बच्चों के वैधानिक दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ायी जा सकेगी। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए।
39 बच्चों के मामलों की केसवार समीक्षा
बैठक में उम्र सीमा से अधिक हो चुके बच्चों को आफ्टर केयर व्यवस्था से जोड़ने की प्रक्रिया भी पूरी करने का निर्देश दिया गया। इस क्रम में 24 बच्चियों और 15 बच्चों, कुल 39 बच्चों से संबंधित मामलों की केसवार समीक्षा की गयी। प्रत्येक बच्चे की स्थिति के अनुसार आवश्यक कार्रवाई, पुनर्वास और आगे की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
280 परवरिश लाभुकों की प्रक्रिया जल्द पूरी करने का निर्देश
परवरिश योजना की समीक्षा के दौरान करीब 280 लाभुकों की सूची पर चर्चा हुई। डीएम ने आवेदन और बैंक खाता संबंधी प्रक्रिया शीघ्र पूरी कराने का निर्देश दिया। अधिकारियों को कहा गया कि लाभुकों और उनके अभिभावकों से आवेदन भरवाने के साथ-साथ बैंक खाता खुलवाने में भी आवश्यक सहायता उपलब्ध करायी जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि जब अभिभावक निर्धारित अंतराल पर दवा या अन्य आवश्यक सेवाएं लेने आते हैं, तब उसी समय काउंसलिंग शिविर लगाकर उन्हें योजना, बैंक खाता और संबंधित प्रक्रियाओं की जानकारी दी जाए। इससे योजना का लाभ लेने में होने वाली व्यावहारिक परेशानियों को कम किया जा सकेगा।
चाइल्ड हेल्पलाइन के तीन लंबित मामलों का होगा शीघ्र निष्पादन
बैठक में चाइल्ड हेल्पलाइन के तीन लंबित मामलों की भी समीक्षा की गयी। डीएम ने इन मामलों का जल्द से जल्द निपटारा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में समयबद्ध कार्रवाई और संबंधित विभागों के बीच निरंतर समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया।
पर्यवेक्षण गृह की स्वच्छता व्यवस्था भी सुधारने के निर्देश
कचरा उठाव और फॉगिंग की व्यवस्था की समीक्षा के दौरान बताया गया कि पहले पर्यवेक्षण गृह नगर निगम क्षेत्र में होने के कारण यह काम नियमित रूप से होता था। वर्तमान में क्षेत्राधिकार में बदलाव के बाद इस व्यवस्था में कुछ शिथिलता आयी है। डीएम ने इस संबंध में जिला परिषद को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया। साथ ही बायोमेडिकल कचरे के उचित निस्तारण के लिए नजदीकी सदर अस्पताल के माध्यम से आवश्यक व्यवस्था कराने को कहा गया।
सामुदायिक भवन में पुलिस बल के आवासन के लिए आवश्यक शौचालय निर्माण को लेकर भी डीएम ने संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी को योजना लेकर निर्माण कार्य सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया।
स्पॉन्सरशिप योजना में पारदर्शी तरीके से होगा लाभुकों का चयन
स्पॉन्सरशिप योजना की समीक्षा के दौरान डीएम ने लाभुकों के चयन के लिए स्पष्ट और पारदर्शी मानदंड तय करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पात्रता का आकलन केवल एक आधार पर नहीं, बल्कि परिवार की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाए।
चयन के दौरान इन बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने को कहा गया
- परिवार में एकल अभिभावक, विधवा या तलाकशुदा अभिभावक की स्थिति।
- परिवार की आवासीय और आर्थिक स्थिति।
- आजीविका का साधन तथा अभिभावक की आय या परिवार पर निर्भरता।
- बच्चों की शैक्षणिक स्थिति और विद्यालय का प्रकार।
- परिवार में सरकारी या निजी क्षेत्र में कार्यरत सदस्य की स्थिति।
- परिवार में बच्चों की संख्या तथा उनकी जरूरतें।
डीएम ने इस प्रक्रिया के लिए सोशल वर्कर सहित एक पैनल गठित करने का निर्देश दिया, ताकि लाभुकों का चयन जांच-पड़ताल के बाद निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से किया जा सके।
122 लाभुकों को योजना से जोड़ने की प्रक्रिया जारी
जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी ने बताया कि वर्तमान में 122 लाभुकों को स्पॉन्सरशिप योजना का लाभ दिया जाना है और इसके लिए आवश्यक प्रक्रिया चल रही है। डीएम ने निर्देश दिया कि सभी पात्र बच्चों और परिवारों तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाया जाए। साथ ही बाल संरक्षण से जुड़ी सभी योजनाओं और प्रक्रियाओं का नियमित अनुश्रवण करने को कहा।
बच्चों के अधिकार और भविष्य को लेकर साझा जिम्मेदारी
बैठक के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि बाल संरक्षण केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। बच्चों की सुरक्षा के साथ उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य, मानसिक देखभाल, कौशल विकास और पुनर्वास के लिए प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज कल्याण और बाल संरक्षण तंत्र के बीच निरंतर समन्वय जरूरी है।
जिला प्रशासन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाल संरक्षण से जुड़ी सभी योजनाओं को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनके वास्तविक लाभ बच्चों और परिवारों तक पहुंचने चाहिए। बैठक में बाल कल्याण समिति (CWC) के सभी सदस्य, संबंधित पदाधिकारी और बाल संरक्षण से जुड़े अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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