सारण के लाल रजत ने बढ़ाया बिहार का मान, चन्द्रयान के लैंडिंग में बना वैज्ञानिक टीम का हिस्सा

छपरा। चन्द्रयान तीन के लैंडिंग में सारण का लाल भी वैज्ञानिक टीम का हिस्सा बना। छह साल पहले इसरो टॉपर व सारण के सिताबदियरा के निवासी रजत सिंह चन्द्रयान को पृथ्वी की कक्षा में पहुंचाने वाले रॉकेट की कंट्रोलिंग करके इस मिशन का हिस्सा बन गया। परिजनों और सारण वासियों में खुशी की लहर है।
एक बार फिर से सारण जिला का नाम विश्व पटल पर उभर कर आया है। यहां बता दें कि सारण का अतीत ही नहीं वर्तमान भी गौरवशाली है। देश नहीं अपितु विदेशों तक यहां के प्रतिभा का डंका है। सारण के लाल रजत का कम उम्र में विश्व में स्वर्ण अक्षरों में नाम अंकित करा लिया। यहां बता दें कि रजत के परिवार मुरादाबाद में रहते है। आज से छह साल पहले रजत का इसरो में इंडिया में नंबर वन रैंक लाकर नाम रोशन किया था। रजत माध्यमिक शिक्षा सिताबदियरा में ही रहकर लिया है।
रजत के परिजनों की खुशी में पूरा गांव शामिल
छह साल पहले रजत ने अथक परिश्रम और दृढ़ निश्चय से न सिर्फ सफलता पायी दिलाई थी बल्कि पूरे देश में टॉपर भी बना था। मिशन में सफलता के बाद रजत का परिवार खुशी से फूले नहीं समा रहा है। रजत सिताबदियरा के उसी विद्यालय का छात्र है जहां कभी जयप्रकाश नारायण ने अपनी शिक्षा हासिल की थी। रजत अब अपने देश की सेवा कर रहा है। रजत के चन्द्रयान मिशन में सफलता की खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी है।
विभिन्न संगठनों ने रजत को बधाइयां देनी शुरू कर दी है वहीं उसके पैतृक गांव सिताबदियरा में भी जश्न का माहौल है। रजत के परिजनों के खुशी में पूरा गांव शामिल है। यह पहला मौका है जब सिताबदियरा का एक लाल स्पेस विज्ञान के तरफ कदम बढ़ा रहा है। बहरहाल रजत की सफलता ने सिताबदियरा के लोगों को ही नहीं बल्कि सारण के लोगों को भी गौरवान्वित किया है और लोग रजत को स्पेस के गहराइयों तक जाने की कामना कर रहे है।
सिताबदियारा के रजत अंतरिक्ष की गहराइयों पर कर रहे हैं रिसर्च
छपरा स्थित सिताब दियारा का रहने वाला रजत अब अंतरिक्ष की गहराइयों पर रिसर्च कर रहा है। इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन यानी इसरो के ऑल इंडिया टेस्ट के मैकेनिकल ट्रेड में रजत ने टॉप किया था। रजत इसरो में वैज्ञानिक है। छपरा के दियारा इलाके में रहने वाला रजत कुमार सिंह ने शायद कभी सोचा भी नहीं होगा कि उसे स्पेस विज्ञान समझने के साथ वहां काम करने का मौका भी मिलेगा। और एक दिन इस मिशन में शामिल होकर विश्व पटल पर आयेगा।
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