छपरा

सारण के अमनौर हरनारायण पंचायत में 67.88 लाख के भुगतान पर सवाल, 6.82 लाख की कथित गड़बड़ी पर FIR की अनुशंसा

वित्तीय अनियमितता का मामला गरमाया

छपरा। सारण जिले की अमनौर हरनारायण ग्राम पंचायत में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और सरकारी राशि के भुगतान को लेकर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। एक परिवाद पर हुई जांच और स्थलीय सत्यापन के आधार पर जांच पदाधिकारी ने तीन योजनाओं में कुल 6,82,207 रुपये की वित्तीय अनियमितता को धरातल पर प्रमाणित बताते हुए संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की अनुशंसा की है। रिपोर्ट में मुखिया निर्मला सिंह को पदमुक्त करने की अनुशंसा का भी उल्लेख है। वहीं, वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच मुखिया के पुत्र से जुड़ी फर्म ‘युवराज कंस्ट्रक्शन’ को 67,88,162 रुपये के भुगतान पर भी सवाल उठाए गए हैं।

मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया, जब मुखिया पक्ष ने जांच रिपोर्ट को एकतरफा और दुर्भावना से प्रेरित बताते हुए जांच अधिकारी पर पांच प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप लगाया। मुखिया पक्ष का दावा है कि कुछ योजनाओं में निर्माण कार्य हुआ था, लेकिन बाद में सड़क चौड़ीकरण के कारण संरचनाएं प्रभावित हुईं। इस तरह पंचायत की विकास योजनाओं में कथित वित्तीय अनियमितताओं के साथ जांच की निष्पक्षता को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। अब मामले में जांच रिपोर्ट, संबंधित अभिलेखों और मुखिया पक्ष के जवाबों के आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

शवदाह गृह निर्माण में 3.75 लाख रुपये की निकासी पर सवाल

जांच आख्या के अनुसार, 15वें वित्त आयोग की योजना कोड 62520845 के तहत माही नदी के तट पर शवदाह गृह निर्माण के लिए 5,29,020 रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि निर्माण कार्य कराए बिना मापी पुस्तिका तैयार की गई और इसके आधार पर 3,75,703 रुपये की निकासी मुखिया के पुत्र से जुड़ी फर्म ‘युवराज कंस्ट्रक्शन’ के पक्ष में की गई। जांच में फर्जी मास्टर रोल के जरिए निकासी का भी उल्लेख किया गया है।

जांच पदाधिकारी ने इस मामले में मुखिया, तत्कालीन पंचायत सचिव और तकनीकी स्तर पर जिम्मेदार कर्मियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन लोगों की भूमिका की जांच करते हुए संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने की अनुशंसा की गई है।

हालांकि, मुखिया निर्मला सिंह की ओर से इस आरोप का खंडन किया गया है। उनका कहना है कि शवदाह गृह का निर्माण कराया गया था, लेकिन बाद में सड़क चौड़ीकरण के दौरान पथ निर्माण विभाग ने उसे तोड़ दिया। मुखिया पक्ष ने इस संबंध में आधिकारिक पत्राचार उपलब्ध होने का दावा किया है।

आठ लाख की नाली योजना में 2.19 लाख रुपये की निकासी का मामला

जांच रिपोर्ट में योजना कोड 71934696 के तहत वार्ड संख्या सात में कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा से माही नदी तक नाली निर्माण की योजना का भी उल्लेख है। इस योजना की राशि आठ लाख रुपये बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, मौके पर निर्माण कार्य नहीं पाए जाने के बावजूद 2,19,004 रुपये की निकासी की गई।

जांच पदाधिकारी ने अभिलेखों की मांग की तो तत्कालीन पंचायत सचिव ने कथित तौर पर फाइल आईटी सहायक के पास होने की बात कही। रिपोर्ट में इस योजना को भी वित्तीय अनियमितता के मामलों में शामिल किया गया है।

पंचायत स्तर पर नाली निर्माण जैसी बुनियादी सुविधा की योजना में राशि की निकासी और वास्तविक निर्माण की स्थिति के बीच अंतर पाए जाने का मामला जांच के दायरे में है। इस संबंध में संबंधित अभिलेखों, भुगतान विवरण और स्थल की स्थिति का सत्यापन आगे की कार्रवाई के लिए अहम होगा।

चबूतरा निर्माण में भी अनियमितता का आरोप

रिपोर्ट में षष्ठम राज्य वित्त आयोग के तहत वार्ड संख्या दो में चबूतरा निर्माण की योजना का भी जिक्र है। जांच पदाधिकारी के अनुसार, 15 लाख रुपये से अधिक की निविदा प्रक्रिया से बचने के लिए कार्य को छोटे हिस्सों में बांटने का आरोप है। इस योजना के तहत 87,500 रुपये की निकासी का उल्लेख किया गया है।

इन तीन योजनाओं शवदाह गृह, नाली और चबूतरा निर्माण को लेकर जांच रिपोर्ट में कुल 6,82,207 रुपये की वित्तीय अनियमितता को प्रमाणित बताया गया है। इसी आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की अनुशंसा की गई है।

मुखिया के पुत्र की फर्म को 67.88 लाख रुपये के भुगतान पर उठे सवाल

जांच रिपोर्ट में वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच ‘युवराज कंस्ट्रक्शन’ को कुल 67,88,162 रुपये का भुगतान किए जाने का उल्लेख है। यह फर्म मुखिया निर्मला सिंह के पुत्र राजीव कुमार सिंह से जुड़ी बताई गई है। रिपोर्ट में पंचायत राज विभाग के उन निर्देशों का हवाला दिया गया है, जिनके तहत पंचायत प्रतिनिधियों या उनके आश्रितों से जुड़ी फर्मों से सामग्री खरीदने पर प्रतिबंध का उल्लेख है।

जांच पदाधिकारी ने भुगतान से संबंधित बिल-वाउचर में कथित कमियों पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कई बिल-वाउचर पर प्रोपराइटर के हस्ताक्षर और तारीख दर्ज नहीं थीं। इन भुगतानों की वैधता, खरीद की वास्तविकता और लागू नियमों के अनुपालन को लेकर जांच में सवाल उठाए गए हैं।

यह मामला केवल भुगतान की कुल राशि तक सीमित नहीं है। संबंधित फर्म से खरीद के आदेश, आपूर्ति के प्रमाण, स्टॉक रजिस्टर, भुगतान की स्वीकृति और विभागीय नियमों के अनुपालन की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भुगतान नियमानुसार हुए या नहीं।

ओपन जिम की खरीद में जेम पोर्टल की अनदेखी का आरोप

जांच रिपोर्ट में वार्ड संख्या नौ में ओपन जिम लगाने की योजना का भी उल्लेख है। योजना की लागत करीब 10 लाख रुपये बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, खरीद के लिए जेम पोर्टल की प्रक्रिया अपनाने के बजाय कोटेशन के आधार पर ‘गुरु कृपा इंटरप्राइजेज’ से 9,80,980 रुपये की खरीद दिखाई गई।

जांच पदाधिकारी ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया में फर्जी कोटेशन का इस्तेमाल किया गया और बाजार दर की तुलना में कई गुना अधिक कीमत पर सामग्री खरीदने का मामला सामने आया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दो जनवरी 2024 को प्रशासनिक स्वीकृति मिलने से पहले की तारीख वाले बिलों के आधार पर भुगतान किया गया। बिलों पर प्रोपराइटर के हस्ताक्षर नहीं होने की बात भी जांच में दर्ज की गई है।

मजदूरी के नाम पर 29.12 लाख रुपये के हस्तांतरण का मामला

जांच में मजदूरी भुगतान को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, चार वित्तीय वर्षों के दौरान अमन कुमार नामक व्यक्ति के खाते में मजदूरी के नाम पर कुल 29,12,830 रुपये हस्तांतरित किए गए। जांच पदाधिकारी ने उल्लेख किया है कि संबंधित व्यक्ति पंजीकृत लेबर मेट नहीं पाया गया और उसके द्वारा मजदूरी किए जाने का प्रमाण भी सामने नहीं आया।

रिपोर्ट में इस भुगतान व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए राशि के वास्तविक लाभार्थियों और भुगतान की प्रक्रिया की जांच की जरूरत बताई गई है। हालांकि, इस रकम के संबंध में विस्तृत बैंक विवरण, मस्टर रोल, मजदूरों की सूची और संबंधित योजनाओं के अभिलेखों का स्वतंत्र सत्यापन किए बिना किसी व्यक्ति या अधिकारी की अंतिम जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती।

जांच अधिकारी पर पांच प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप

जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद मुखिया निर्मला सिंह के प्रतिनिधि राजीव सिंह ने जांच अधिकारी सह प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी मृत्युंजय कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मुखिया पक्ष का कहना है कि जांच अधिकारी ने पांच प्रतिशत कमीशन की मांग की थी। इसका विरोध करने और वर्ष 2025 में जिलाधिकारी से लिखित शिकायत करने के कारण कथित तौर पर पंचायत प्रतिनिधियों को निशाना बनाया गया।

मुखिया प्रतिनिधि ने जांच रिपोर्ट को एकतरफा और दुर्भावना से प्रेरित बताते हुए कहा कि रिपोर्ट में पंचायत के वार्डों की संख्या को लेकर भी गलती की गई है। उनके अनुसार, पंचायत में कुल 14 वार्ड हैं, जबकि रिपोर्ट में कोरम से संबंधित आपत्ति के संदर्भ में 15 वार्ड दिखाए गए हैं।

मुखिया पक्ष ने शवदाह गृह के निर्माण और बाद में सड़क चौड़ीकरण के दौरान उसके टूटने का दावा किया है। चबूतरे के निर्माण को लेकर भी कहा गया है कि संरचना मौके पर मौजूद है और जांच में उचित भौतिक सत्यापन नहीं किया गया। इन आरोपों के समर्थन में दस्तावेज उपलब्ध होने का दावा किया गया है।

प्राथमिकी और पदमुक्त करने की अनुशंसा

जांच पदाधिकारी की ओर से जिला पंचायत राज पदाधिकारी को भेजी गई रिपोर्ट में मुखिया निर्मला सिंह, तत्कालीन पंचायत सचिव, तत्कालीन तकनीकी सहायक और तत्कालीन आईटी सहायक के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज करने की अनुशंसा की गई है। मुखिया को बिहार पंचायत राज अधिनियम की धारा 18(5) के तहत पदमुक्त करने की अनुशंसा का भी उल्लेख है।

अमनौर हरनारायण पंचायत का यह मामला सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता, निर्माण कार्यों के भौतिक सत्यापन और भुगतान प्रक्रिया की जवाबदेही से जुड़ा है। अब जिला प्रशासन की आगे की कार्रवाई, संबंधित पक्षों के दस्तावेजी जवाब और आरोपों की निष्पक्ष जांच से ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

Author Profile

Ganpat Aryan
Ganpat Aryan
वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।

Ganpat Aryan

वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।

Related Articles

Back to top button