देशबिहार

PM Awas Yojana: बिहार में गरीबों के सिर पर छत का सपना हुआ पूरा, 39 लाख परिवार बने गृहस्वामी

सबसे ज्यादा वर्ष 2016 से 2022 के बीच 36 लाख 67 हजार 561 गरीबों का बना आशियाना

पटना। देश के साथ ही राज्य के सभी बेघरों को वर्ष 2030 तक अपना घर मुहैया कराने के उदेश्य से प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) चलाई जा रही है। इसके तहत पिछले 10 वर्षों में ग्रामीण इलाकों में रहने वाले 39 लाख 14 हजार 547 गरीब परिवारों को पक्का मकान मुहैया करा दिए गए हैं। इस योजना के क्रियान्वयन में अब तक 53 हजार 949 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं।

योजना के तहत प्रत्येक लाभुक को एक लाख 54 हजार रुपए की सहायता राशि दी जाती है। इसमें आवास निर्माण के लिए एक लाख 20 हजार, 90 दिनों की मनरेगा मजदूरी के तौर पर 22 हजार 50 और शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपए शामिल हैं। योजना का लाभ लेने के लिए लाभुक के पास खुद की कम से कम 25 वर्ग मीटर जमीन होनी चाहिए।

ग्रामीण विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2021-22 के बीच सबसे अधिक 36 लाख 67 हजार 561 आवास लाभुकों को दिए गए हैं। इन सात वर्षों के बीच भौतिक लक्ष्य 37 लाख एक हजार 138 के सापेक्ष 37 लाख 586 लाभुकों को आवास निर्माण के लिए स्वीकृति दी गई। इनमें से 36 लाख 99 हजार 715 लोगों में पहली किस्त तो 36 लाख 99 हजार 984 लोगों को दूसरी और 36 लाख 53 हजार 904 लाभुकों को तीसरी किस्त का भुगतान किया गया। स्थलीय जांच में 36 लाख 67 हजार 561 लोगों का आवास निर्माण कार्य पूरा पाया जा चुका है।

12 लाख 74 हजार 67 लाभुकों को आवास निर्माण की स्वीकृति

योजना के दूसरे चरण वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के लिए तय कुल लक्ष्य 12 लाख 21 हजार 605 के सापेक्ष 12 लाख 74 हजार 67 लाभुकों को आवास निर्माण की स्वीकृति दी गई। इस लक्ष्य के तहत सरकार की ओर से 11 लाख 35 हजार 902 लोगों को पहली किस्त, सात लाख 47 हजार 352 लाभुकों को दूसरी किस्त और तीन लाख 26 हजार 897 लोगों को तीसरी किस्त भुगतान किया गया। इन लाभुकों में से दो लाख 46 हजार 986 लोगों ने आवास बना लिया है। ये आंकड़े बताते हैं कि पिछले 10 साल के भीतर बिहार में भवन विहीन 39 लाख 14 हजार 547 लोगों के लिए खुद का पक्का घर होने का सपना साकार किया जा चुका है।

इन्हें दी जाती है वरीयता

  •  ऐसा परिवार जिसमें 16 से 59 वर्ष के बीच का वयस्क सदस्य न हो
  •  ऐसा परिवार जिसमें 25 वर्ष से अधिक आयु वाले वयस्क साक्षर सदस्य न हों
  •  ऐसा परिवार जिनका कोई एक सदस्य विकलांग हो एवं अन्य सक्षम गैर विकलांग वयस्क सदस्य न हो

News Desk

Publisher & Editor-in-Chief

Related Articles

Back to top button
close