सोनपुर मेला मे मनोरंजन के साथ-साथ लोगो को मिल रही है फाइलेरिया से बचाव की जानकारी

छपरा
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• फाइलेरिया पेशेंट सपोर्ट नेटवर्क सदस्य ने कैंप लगाकर किया जागरूक
• मेला में आने वाले लोगों को फाइलेरिया से बचाव की जानकारी

छपरा। विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला काफी मायने में महत्वपूर्ण है। मेले में विभिन्न विभागों का स्टॉल लगाया गया है। जिसमें स्वास्थ्य विभाग का स्टॉल काफी महत्वपूर्ण है। फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर गांव स्तर पर पेशेंट सपोर्ट नेटवर्क बनाया जा रहा है। जिसमें फाइलेरिया के मरीजों को शामिल सपोर्ट नेटवर्क बनाया गया है। पेशेंट सपोर्ट नेटवर्क के सदस्यों के द्वारा सामुदायिक जागरूकता फैलाने में सकारात्मक सहयोग किया जा रहा है। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगे मेले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा कैंप का आयोजन किया गया है। जिसमें विभिन्न रोगो का उपचार एवं परामर्श निशुल्क दी जा रही है। इस कैंप में फाइलेरिया नेटवर्क मेंबर मोहन महतो द्वारा कैंप में बैठकर फलेरिया के बारे में लगभग एक सौ से अधिक लोगों को फाइलेरिया से बचाव तथा इसकी रोकथाम के लिए आईडीए की दवा सेवन करने हेतु अपील की गई । कैंप में कुछ फाइलेरिया मरीज भी आये। जो अपनी आपबीती मोहन जी को बताया और फाइलेरिया के बारे में सही सही जानकारी मोहन महतो के द्वारा प्राप्त किया। कैंप के दौरान स्वास्थ्य विभाग के द्वारा भी विभिन्न प्रकार के परामर्श दिए जा रहे हैं तथा रेफरल हॉस्पिटल सोनपुर के हॉस्पिटल मैनेजर मृत्युंजय कुमार द्वारा भी काफी सहयोग मिल रहा है।

आने वाली पीढ़ी सुरक्षित रहे, इसलिए कर रहे जागरूक:

नेटवर्क सदस्य मोहन महतो ने बताया कि उन्हें कई वर्षो से फाइलेरिया बीमारी है। जिसका दर्द और तकलीफ हर पल महसूस करते है. कार्य करने में कठिनाई और सामान्य जीवन जीने में काफ़ी परेशानी है। उनका प्रयास है कि सभी लोग दवा का सेवन करें तथा अपने आस-पास साफ सफाई का ख्याल रखें. ताकि आने वाली पीढ़ी इस बीमारी से सुरक्षित रह सके।

दवा सेवन कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए किया गया प्रेरित:

कैंप में फाइलेरिया से बचाव, उपचार तथा लक्षणों के बारे में जानकारी दी। इसके साथ दवा सेवन कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया गया। फाइलेरिया मच्छरों द्वारा फैलता है, खासकर परजीवी क्यूलैक्स फैंटीगंस मादा मच्छर के जरिए। जब यह मच्छर किसी फाइलेरिया से ग्रस्त व्यक्ति को काटता है तो वह संक्रमित हो जाता है। फिर जब यह मच्छर किसी स्वस्थ्य व्यक्ति को काटता है तो फाइलेरिया के विषाणु रक्त के जरिए उसके शरीर में प्रवेश कर उसे भी फाइलेरिया से ग्रसित कर देते हैं। लेकिन ज्यादातर संक्रमण अज्ञात या मौन रहते हैं और लंबे समय बाद इनका पता चल पाता है। इस बीमारी का कारगर इलाज नहीं है। इसकी रोकथाम ही इसका समाधान है।

नेटवर्क सदस्य बनेगें बदलाव के सूत्रधार :

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. दिलीप कुमार सिंह ने बताया कि विभाग के द्वारा सामुदायिक जागरूकता के लिए प्रयास किया ही जा रहा है. लेकिन ज़ब समुदाय के ही लोग आगे आकर जागरूकता फैलाते है तो विभाग की बातों को समुदाय तक पहुँचाना आसान हो जाता है. नेटवर्क सदस्यों के द्वारा किये जा रहे प्रयास सराहनीय है. सामुदायिक जागरूकता से ये नेटवर्क सदस्य बदलाव के सूत्रधार बनेगें।

क्या है लक्षण :

सामान्यतः इसके कोई लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते हैं।बुखार, बदन में खुजली तथा पुरुषों के जननांग और उसके आस-पास दर्द और सूजन की समस्या दिखाई देती है।

फाइलेरिया से बचाव:

• फाइलेरिया चूंकि मच्छर के काटने से फैलता है, इसलिए बेहतर है कि मच्छरों से बचाव किया जाए। इसके लिए घर के आस-पास व अंदर साफ-सफाई रखें।
• पानी जमा न होने दें और समय-समय पर कीटनाशक का छिड़काव करें। पूरी बाजू के कपड़े पहनकर रहें।
• सोते वक्त हाथों और पैरों पर व अन्य खुले भागों पर सरसों या नीम का तेल लगा लें
• हाथ या पैर में कही चोट लगी हो या घाव हो तो फिर उसे साफ रखें। साबुन से धोएं और फिर पानी सुखाकर दवाई लगा लें।