फाइलेरिया दिवस पर मरीजों ने लिया संकल्प, आनेवाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य के लिए दवा सेवन के प्रति किया जागरूक

• फाइलेरिया पेशेंट सपोर्ट नेटवर्क सदस्यों ने किया जागरूक
• सोनपुर मेला में जागरूकता शिविर का हुआ आयोजन
• स्वास्थ्य विभाग के प्रयास को आगे बढ़ा रहे नेटवर्क सदस्य
छपरा। फाइलेरिया जैसे गंभीर संक्रामक रोग से मुक्ति दिलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग तत्पर है। फाइलेरिया के कारण व बचाव के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए ही प्रत्येक वर्ष 11 नवम्बर को राष्ट्रीय फाइलेरिया दिवस मनाया जाता है। इसी कड़ी स्वास्थ्य विभाग के द्वारा सहयोगी संस्था पीसीआई और सीफार के सहयोग से जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
जिसमें फाइलेरिया पेशेंट सपोर्ट नेटवर्क सदस्यों के द्वारा लोगों को जागरूक किया गया। नेटवर्क मेंबर द्वारा लगभग 200 से ऊपर व्यक्तियों को फाइलेरिया बीमारी के बारे में बताया गया तथा इससे बच बचाव करने के उपाय एवं जानकारी फ्लिपबुक के माध्यम से दी गई । फाइलेरिया ग्रसित नेटवर्क मेंबर सुनील कुमार आदि ने जानकारी दिया । इस मौके पर सभी लोगों ने यह शपथ लिया कि हमारे आस-पड़ोस में यदि कोई भी व्यक्ति आईडीए की दवा नहीं खाता है तो उसे हम लोग खिलाकर प्रोग्राम को सफल बनाने में पूर्ण सहयोग करेंगे। फाइलेरिया दिवस कार्यक्रम में उपस्थित राज्य स्वास्थ्य समिति के व्यवस्थापक अजीत कुमार, डॉ सौम्या, पंकज कुमार, डॉ अभिजीत, डॉ तूलिका रानी, इंद्रजीत कुमार, डॉ अशोक कुमार तथा सीफार के जिला समन्वयक रितेश राय प्रखंड समन्वयक रंजन कुमार पीसीआई के सत्य प्रकाश व अन्य कार्यक्रम में उपस्थित हो कर राष्ट्रीय फाइलेरिया दिवस को सफल बनाया।
मानसिक और सामाजिक स्थिति पर भी पड़ता है बुरा प्रभाव:
डीएमओ डॉ. दिलीप कुमार सिंह ने बताया कि आमतौर पर फाइलेरिया के कोई लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते। लेकिन पसीना, सिर दर्द, हड्डी व जोड़ों में दर्द, भूख में कमी, उल्टी आदि के साथ बदन में खुजली और पुरुषों के जननांग और उसके आस-पास दर्द व सूजन की समस्या दिखाई देती है। इसके अलावा पैरों और हाथों में सूजन, हाथी पांव और हाइड्रोसिल (अंडकोषों की सूजन) भी फाइलेरिया के लक्षण हैं। फाइलेरिया न सिर्फ व्यक्ति को विकलांग बना देती है बल्कि इससे मरीज की मानसिक और सामाजिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।
आहार और सफाई का रखें ख्याल
डॉ. सौम्या ने बताया कि फाइलेरिया मच्छरों के काटने से होता है। मच्छर गंदगी में पैदा होते हैं। इसलिए इस रोग से बचना है, तो आस-पास सफाई रखना जरूरी है। दूषित पानी, कूड़ा जमने ना दें, जमे पानी पर कैरोसीन तेल छिड़क कर मच्छरों को पनपने से रोकें, सोने के समय मच्छरदानी का उपयोग करें। एक तरफ जहां मरीजों का उपचार एवं प्रबंधन तो दूसरे तरफ ज्यादा से ज्यादा लोगों को साल में एक बार दवा का सेवन कराना आवश्यक है।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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