
Indian Administrative Service: देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा मानी जाने वाली आईएएस (Indian Administrative Service) को लेकर आम लोगों में हमेशा से गजब का आकर्षण रहा है। एक आईएएस अधिकारी न केवल प्रशासनिक व्यवस्था की धुरी होता है, बल्कि जिले का शीर्ष प्रशासक होने के कारण नीति और विकास की दिशा तय करने में भी अहम भूमिका निभाता है। यही वजह है कि हर वर्ष लाखों अभ्यर्थी संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की इस कठिन परीक्षा में शामिल होते हैं।
हिंदी पट्टी, खासकर बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और झारखंड में आईएएस बनने को लेकर खास उत्साह देखा जाता है। बिहार के बारे में तो आम धारणा है कि देश में सबसे अधिक आईएएस अधिकारी यहीं से बनते हैं। हालांकि, संसद में हाल ही में पेश किए गए सरकारी आंकड़े इस धारणा की एक अलग तस्वीर पेश करते हैं। आइए जानते हैं पिछले पांच वर्षों (2020–2024) के आंकड़ों का सच।
पिछले 5 वर्षों में कितने अधिकारी चुने गए?
केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने संसद में जानकारी दी कि वर्ष 2020 से 2024 के बीच देश में कुल:
- 6877 आईएएस,
- 5099 आईपीएस,
- 3193 आईएफएस अधिकारियों की आवश्यकता थी।
लेकिन स्वीकृत पदों के बावजूद:
- 5577 आईएएस,
- 4594 आईपीएस,
- 2164 आईएफएस अधिकारी ही पदस्थापित हो सके।
इसका मतलब है कि तीनों सेवाओं में बड़ी संख्या में पद खाली रह गए।
आईएएस कैडर: किस राज्य की स्थिति कैसी?
| राज्य | स्वीकृत | पदस्थापित | प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| उत्तराखंड | 126 | 109 | 86.5% |
| तमिलनाडु | 394 | 343 | 87.0% |
| कर्नाटक | 314 | 273 | 86.9% |
| मध्य प्रदेश | 459 | 391 | 85.2% |
| बिहार | 359 | 303 | 84.4% |
आंकड़ों के अनुसार आईएएस कैडर में तमिलनाडु का प्रदर्शन प्रतिशत के हिसाब से सबसे बेहतर रहा, जबकि बिहार 84.4% के साथ पीछे है।
क्या बिहार से बनते हैं सबसे ज्यादा आईएएस?
सामान्य धारणा के विपरीत, स्वीकृत पदों की संख्या ही बिहार में सबसे अधिक नहीं है। इसलिए यह कहना कि सबसे ज्यादा आईएएस बिहार से बनते हैं, पूरी तरह सही नहीं है।
हालांकि, बिहार का प्रदर्शन आईपीएस कैडर में देश में सबसे बेहतर रहा है।
आईपीएस कैडर (बिहार का प्रदर्शन)
| राज्य | स्वीकृत | पदस्थापित | प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| बिहार | 242 | 241 | 99.6% |
| गुजरात | 208 | 203 | 97.6% |
| राजस्थान | 222 | 216 | 97.3% |
| कर्नाटक | 224 | 203 | 90.6% |
| महाराष्ट्र | 329 | 306 | 93.0% |
आईपीएस में बिहार का 99.6% पदस्थापन दर देश में सर्वोच्च है।
बिहार: आईएएस और आईएफएस में स्थिति
- आईएएस: 359 स्वीकृत, 303 पदस्थापित (84.4%)
- आईपीएस: 242 स्वीकृत, 241 पदस्थापित (99.6%)
- आईएफएस: 74 स्वीकृत, 50 पदस्थापित (67.5%)
स्पष्ट है कि आईएफएस (भारतीय विदेश सेवा) में बिहार का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार के अभ्यर्थी प्रशासनिक और पुलिस सेवा में अधिक रुचि लेते हैं, जबकि विदेश सेवा में अपेक्षाकृत कम।
झारखंड का प्रदर्शन
- आईएएस: 224 स्वीकृत, 177 पदस्थापित
- आईपीएस: 158 स्वीकृत, 143 पदस्थापित
- आईएफएस: 142 स्वीकृत, 84 पदस्थापित
झारखंड में भी तीनों सेवाओं में कई पद खाली हैं।
आरक्षण वर्ग से चयनित उम्मीदवार
संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार:
आईएएस में चयनित:
- ओबीसी: 245
- एससी: 135
- एसटी: 67
आईपीएस में चयनित:
- ओबीसी: 255
- एससी: 141
- एसटी: 71
आईएफएस में चयनित:
- ओबीसी: 231
- एससी: 95
- एसटी: 48
संसद में पेश आंकड़े बताते हैं कि देश में स्वीकृत पदों की तुलना में बड़ी संख्या में अधिकारी पदस्थापित नहीं हो पाए हैं। बिहार को लेकर प्रचलित धारणा पूरी तरह तथ्यात्मक नहीं है, लेकिन यह जरूर सच है कि आईपीएस कैडर में बिहार का प्रदर्शन देश में सर्वश्रेष्ठ रहा है।
आईएएस, आईपीएस और आईएफएस तीनों ही सेवाओं में प्रतियोगिता बेहद कड़ी है और हर साल लाखों अभ्यर्थी इस परीक्षा में अपनी किस्मत आजमाते हैं। आंकड़े यह भी संकेत देते हैं कि राज्यों के बीच प्रदर्शन में उल्लेखनीय अंतर है, जो प्रशासनिक संरचना और अभ्यर्थियों की प्राथमिकताओं को दर्शाता है।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर, अमर उजाला और हिन्दुस्थान समाचार में सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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