छपरा में घोष मिष्ठान का रसगुल्ला हैं फेमस, 100 साल से बंगाली परिवार बना रहा रसगुल्ला

छपरा। अगर आप छपरा जिले के रहने वाले हैं तो आपने इस मिठाई दुकान के बारे में जरूर सुनी होगी या फिर यहां से अपने स्पंज वाले रसगुल्ले जरूर खाए होंगे।रसगुल्ला का नाम सुनते ही आपको बंगाली रसगुल्ले याद आ जाते होंगे. छपरा में भी एक बंगाली परिवार पिछले 100 साल से रसगुल्ले बना रहा है और इसके रसगुल्ले इतने फेमस हैं कि खाने के लिए छपरा के साथ-साथ आसपास के जिलों के लोग भी पहुंचते हैं. लगभग 100 साल पहले इस बंगाली परिवार ने रसगुल्ले बनाने की शुरुआत की थी और धीरे-धीरे यह इतना मशहूर हो गया कि जिस गली में घोष मिष्ठान की दुकान थी वह गली रसगुल्ला गली के नाम से फेमस हो गई.रसगुल्ले कि इस विरासत को संभाल रहे अभिजीत घोष ने बताया कि उनके पिताजी ने इसकी शुरुआत की थी और आज वह इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं.
उनके पिताजी से रसगुल्ला खाने वाले लोग आज भी उनके दुकान पर आते हैं।घोष मिष्ठान के नाम से कई फर्जी लोगों ने भी छपरा में दुकान खोली थी. लेकिन लोगों ने उसे नकार दिया और आज भी एक छोटी सी दुकान छपरा के लोगों को 100 साल पहले वाला रसगुल्ला खिला रहा है.
अभिजीत घोष बताते हैं कि उनका परिवार छपरा में ही बस गया है और छपरा के लोगों के प्यार स्नेह को देखते हुए आगे भी रसगुल्ले का सफर जारी रहेगा.अभिजीत घोष ने कहा, ‘मेरे यहां काफी सस्ता और अच्छा रसगुल्ला दिया जाता है. जिसके वजह से लोगों की भीड़ उमड़ती है. उन्होंने कहा कि ₹10 पीस में एक रसगुल्ला बेची जाती है. जबकि ₹250 किलो छेना का रसगुल्ला हमारे यहां लोगों को उपलब्ध कराया जाता है. जिसका स्वाद काफी अच्छा लगता है और इसे जो एक बार चख लेता है उसे दोबारा खाने के लिए खरीदारी करने आता है’.
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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