Railway News: एनईआर रेलवे की तकनीक से रेल पटरियों पर दौड़ रही है तरक्की, गति और सुरक्षा की ‘कुंजी’ बनी इलेक्ट्रिक प्वाइंट मशीन
गोरखपुर का सिग्नल वर्कशॉप देशभर के रेलवे को दे रहा तकनीकी ताकत
गोरखपुर। पूर्वोत्तर रेलवे (एनईआर) के गोरखपुर स्थित सिग्नल वर्कशॉप में तैयार हो रही आधुनिक इलेक्ट्रिक प्वाइंट मशीन और सिग्नलिंग रिले तकनीक से देशभर की रेल सेवाओं को नई दिशा और रफ्तार मिल रही है। यहां तैयार उपकरणों की मांग भारतीय रेलवे के सभी जोन में लगातार बढ़ रही है।
गोरखपुर के अनमोल सिंह, वरिष्ठ सिग्नल इंजीनियर के अनुसार, वर्ष 2024-25 में वर्कशॉप से 3695 इलेक्ट्रिक प्वाइंट मशीन और 35,200 सिग्नलिंग रिले के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह मांग भारतीय रेलवे की बदलती तकनीकी आवश्यकताओं और गति को देखते हुए दोगुनी हो गई है।
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पिछले वित्तीय वर्ष 2021-22 की तुलना में प्वाइंट मशीनों की आपूर्ति में 42% की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2022-23 में जहां 2692 प्वाइंट मशीनें भेजी गई थीं, वहीं 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 3074 हो गई। इसी प्रकार सिग्नलिंग रिले की आपूर्ति भी 25% तक बढ़ चुकी है।
इन मशीनों के उपयोग से देश के विभिन्न जोनों में 110 से 130 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों की सिग्नलिंग और सुरक्षा प्रणाली को सुदृढ़ किया जा रहा है। गोरखपुर वर्कशॉप की तकनीक का इस्तेमाल देश के 505 स्टेशनों पर हो चुका है, जिससे न केवल संचालन में तेजी आई है, बल्कि संरक्षा के स्तर पर भी रेलवे को मजबूती मिली है।
| वर्ष / श्रेणी | निर्माण / मांग संख्या | टिप्पणी |
|---|---|---|
| 2024–25 (लक्ष्य) | 3695 प्वाइंट मशीनें | विभिन्न ज़ोन से ऑर्डर |
| 35200 सिग्नलिंग रिले | मांग में उल्लेखनीय वृद्धि | |
| 2021–22 (निर्मित) | 2692 प्वाइंट मशीनें | लक्ष्य से अधिक उत्पादन |
| 30742 सिग्नलिंग रिले | पहले से ही रिकॉर्ड निर्माण | |
| रेलवे ज़ोन | सभी 17 ज़ोन शामिल | एनईआर की तकनीक का उपयोग |
| गति सीमा (रन ज़ोन) | 110–130 किमी प्रति घंटा | इलेक्ट्रिक प्वाइंट मशीन की मदद से |
| स्टेशनों की दूरी | हर 15 किमी पर एक स्टेशन | तेज़ ट्रेनों की दिशा व मार्ग बदलने में सहूलियत |
| प्रारंभ वर्ष (वर्कशॉप) | 1944 (स्थापना), 1958 (विस्तार) | एशिया की पहली सिग्नल वर्कशॉप में शुमार |
देश के कोने-कोने तक पहुंच रही गोरखपुर की तकनीक
रेलवे का यह वर्कशॉप साल 1944 में बना था और 1958 से यहां सिग्नलिंग रिले का निर्माण हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों में यहां ऑटोमेटिक मशीनें, विशेष परीक्षण इकाइयाँ और मानकीकरण की प्रक्रिया को अपनाया गया है, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में काफी इजाफा हुआ है।
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क्या है इलेक्ट्रिक प्वाइंट मशीन?
यह एक स्वचालित यंत्र है जो रेलवे ट्रैक पर दिशा बदलने वाले पॉइंट्स को नियंत्रित करता है। इससे ट्रेनों के सुगम और सुरक्षित संचालन में काफी मदद मिलती है। यह तकनीक विशेष रूप से हाई स्पीड और भारी ट्रैफिक वाले रूट्स पर जरूरी मानी जाती है।
गौरतलब है कि गोरखपुर की यह इकाई अब भारतीय रेलवे के लिए एक केंद्रीय तकनीकी हब के रूप में स्थापित हो चुकी है, जो आने वाले वर्षों में रेलवे के आधुनिकीकरण अभियान का अहम हिस्सा बनेगा।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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