Bihar Mid Day Meal: स्कूलों के मिड डे मील में बड़ा सुधार, दो माह में इंसुलेटेड बर्तन होंगे अनिवार्य
3-4 घंटे के भीतर बच्चों तक पहुंचेगा गर्म भोजन, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से होगी निगरानी

पटना। बिहार सरकार ने विद्यालयों में संचालित मध्याह्न भोजन (मिड डे मील) योजना की गुणवत्ता सुधारने और बच्चों को सुरक्षित, पौष्टिक एवं गर्म भोजन उपलब्ध कराने के लिए सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मिड डे मील की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने योजना का संचालन करने वाली स्वयंसेवी संस्थाओं को दो माह के भीतर इंसुलेटेड (ऊष्मारोधी) बर्तनों की व्यवस्था करने, हर प्रखंड में सेंट्रलाइज्ड किचेन स्थापित करने तथा भोजन तैयार होने से लेकर बच्चों तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया अधिकतम तीन से चार घंटे के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया।
विकास भवन स्थित शिक्षा विभाग के सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में शिक्षा मंत्री ने मध्याह्न भोजन योजना से जुड़ी स्वयंसेवी संस्थाओं, आपूर्तिकर्ताओं और विभागीय अधिकारियों के साथ योजना की वर्तमान स्थिति, भोजन की गुणवत्ता तथा वितरण व्यवस्था की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में 43 में से 41 स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
7-8 घंटे पुराना भोजन परोसने की शिकायतों पर जताई नाराजगी
बैठक के दौरान शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार के संज्ञान में कई ऐसे मामले आए हैं, जहां विद्यालयों में बच्चों को सात से आठ घंटे पहले तैयार किया गया भोजन परोसा जा रहा है। उन्होंने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि इस प्रकार की व्यवस्था बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने निर्देश दिया कि भोजन तैयार होने के बाद अधिकतम तीन से चार घंटे के भीतर विद्यालयों में बच्चों तक पहुंच जाना चाहिए, ताकि उन्हें ताजा, गर्म और गुणवत्तायुक्त भोजन मिल सके।
दो माह में इंसुलेटेड बर्तनों की व्यवस्था होगी अनिवार्य
शिक्षा मंत्री ने सभी सेंट्रलाइज्ड किचेन संचालित करने वाली संस्थाओं को निर्देश दिया कि वे अगले दो माह के भीतर स्टील के सामान्य बर्तनों की जगह इंसुलेटेड बर्तनों का उपयोग सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि इससे भोजन का तापमान लंबे समय तक बना रहेगा और बच्चों को गर्म एवं सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराया जा सकेगा।उन्होंने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी व्यवस्था में लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
हर प्रखंड में बनेगा सेंट्रलाइज्ड किचेन
मिथिलेश तिवारी ने राज्यभर में मिड डे मील व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक प्रखंड में कम-से-कम एक सेंट्रलाइज्ड किचेन स्थापित करने पर जोर दिया। वहीं बड़े प्रखंडों में दो-दो किचेन स्थापित करने का सुझाव दिया, ताकि भोजन समय पर विद्यालयों तक पहुंच सके और परिवहन में लगने वाला समय कम हो।उन्होंने कहा कि इससे भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ-साथ वितरण प्रणाली भी अधिक व्यवस्थित होगी।
कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से होगी निगरानी
मंत्री ने बताया कि अब मिड डे मील योजना की निगरानी तकनीक के माध्यम से और अधिक सख्ती से की जाएगी। प्रत्येक प्रखंड के प्रखंड साधनसेवी नियमित रूप से भोजन वितरण की निगरानी करेंगे तथा विद्यालयों से भोजन वितरण की तस्वीरें पोर्टल पर अपलोड करेंगे।इन सभी गतिविधियों पर राज्य स्तर पर स्थापित सेंट्रलाइज्ड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से लगातार नजर रखी जाएगी। इससे किसी भी प्रकार की अनियमितता की तुरंत पहचान कर कार्रवाई की जा सकेगी।
अनधिकृत लोगों की भूमिका समाप्त करने का निर्देश
शिक्षा मंत्री ने स्वयंसेवी संस्थाओं को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे भोजन निर्माण एवं वितरण कार्य में किसी भी अनधिकृत व्यक्ति की भागीदारी समाप्त करें। उन्होंने कहा कि कई शिकायतें केवल इसलिए सामने आती हैं क्योंकि संस्थाएं स्वयं निगरानी करने के बजाय जिम्मेदारी अन्य लोगों को सौंप देती हैं।
उन्होंने कहा कि यदि संस्थाएं स्वयं अपनी निगरानी प्रणाली मजबूत करें तो अधिकांश समस्याओं का स्वतः समाधान हो जाएगा और योजना अधिक पारदर्शी तरीके से संचालित होगी।
समस्याओं की तत्काल दें जानकारी
मंत्री ने निर्देश दिया कि यदि योजना के संचालन में किसी प्रकार की प्रशासनिक, तकनीकी अथवा अन्य समस्या आती है तो उसकी जानकारी तुरंत मध्याह्न भोजन निदेशक अथवा उनके कार्यालय को दी जाए, ताकि समयबद्ध तरीके से उसका समाधान किया जा सके।उन्होंने कहा कि शिकायतों को लंबित रखने के बजाय तत्काल विभाग को अवगत कराना सभी संस्थाओं की जिम्मेदारी है।
बेहतर कार्य करने वाली संस्थाओं को मिलेगा प्रोत्साहन
शिक्षा मंत्री ने कहा कि जो स्वयंसेवी संस्थाएं निर्धारित मानकों का पूरी ईमानदारी से पालन करेंगी और उत्कृष्ट कार्य करेंगी, सरकार भविष्य में उनके हितों का भी समुचित ध्यान रखेगी। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में मिड डे मील योजना से जुड़ी संस्थाओं की जिम्मेदारियां और बढ़ाई जा सकती हैं। विभाग इस संभावना पर गंभीरता से विचार कर रहा है कि भोजन निर्माण और उसके वितरण की पूरी जिम्मेदारी एक ही संस्था को दी जाए। इससे जवाबदेही तय होगी, समन्वय बेहतर होगा और भोजन की गुणवत्ता के साथ वितरण व्यवस्था में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा।
अधिकारियों की रही मौजूदगी
समीक्षा बैठक में मध्याह्न भोजन निदेशक सहित योजना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी, विभागीय कर्मचारी, स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं आपूर्तिकर्ता उपस्थित रहे। बैठक में राज्य की 43 पंजीकृत स्वयंसेवी संस्थाओं में से 41 संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। शिक्षा मंत्री ने सभी संस्थाओं से बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए योजना का ईमानदारी एवं पारदर्शिता के साथ संचालन करने का आह्वान किया।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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