Controversy: नमक आंदोलन के नायक को कर दिया दरकिनार, हाईस्कूल के नामकरण पर मचा घमासान
इतिहास और हक़ की लड़ाई में फँसा बरेजा स्कूल

छपरा (डॉ सुनील प्रसाद)। महान स्वतंत्रता सेनानी व जिले में नमक आंदोलन के अग्रदूत रहें पूर्व शिक्षामंत्री प.गिरीश तिवारी के गाँव बरेजा मे स्थित हाई स्कूल के नामकरण को लेकर आपसी विवाद का जिला प्रशासन ने पटाक्षेप किया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने पत्र संख्या 292 दिनांक 21 अप्रैल 2025 के माध्यम से सरकारी नियमानुसार भूमिदाता के नाम पर उक्त विद्यालय का नामकरण करने का आदेश निर्गत किया है।
विद्यालय के निर्माण में उनके पूर्वजों की भूमिका
जारी आदेश में कहा गया है कि भूमिदाताभूपेंद्र तिवारी व सुरेंद्र तिवारी के परिजनों द्वारा प्रस्तुत किये गए दस्तावेज के आधार पर यह आदेश निर्गत है। भूमिदाता के पुत्र व राजेन्द्र कॉलेज के अवकाश प्राप्त प्राध्यापक रहें डॉ ज्ञानदेव तिवारी ने बताया कि पंडित गिरीश तिवारी के प्रति सभी की श्रद्धा जुड़ी है। उन्होंने कहा कि इस उच्च विद्यालय के निर्माण में उनके पूर्वजों की भूमिका व त्याग जुड़ी है। अतः नामकरण उनके नाम पर होता है तो आपत्ति नही होनी चाहिए। पंडित गिरीश तिवारी का सामाजिक व राजनीतिक योगदान अमूल्य रहा है। अतः उनके नाम पर विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, बरेजा में स्थित अस्पताल का नाम या एकमा-माँझी पथ का नामकरण होना चाहिए।
नोनी मिट्टी से नमक बनाकर नमक कानून तोड़ा
उल्लेखनीय है कि महान स्वतंत्रता सेनानी पंडित गिरीश तिवारी ने आजादी से पूर्व यानि वर्ष 1930 में नमक आंदोलन शुरू किया था, जिसमें देश के बड़े नेता पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार बल्लभ भाई पटेल, विनोवा भावे, डॉ राजेन्द्र प्रसाद के अलावा 11 वर्ष की उम्र में इंदिरा गांधी कि उपस्थिति में नोनी मिट्टी से नमक बनाकर नमक कानून तोड़ा गया था। हालांकि बाद के दिनों में उसी स्थान पर पंडित गिरीश तिवारी ने ग्रामीणों के सहयोग से एक उच्च विद्यालय की स्थापना कराई थी।
लेकिन आज वही विद्यालय एक बार सुर्खियों में आ गया है। जिसको लेकर पंडित गिरीश तिवारी के पौत्र प्रवीण चंद्र तिवारी ने राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, मुख्य सचिव, स्थानीय महाराजगंज लोकसभा क्षेत्र के सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, स्थानीय मांझी विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ सत्येंद्र यादव, सारण के जिलाधिकारी अमन समीर, जिला शिक्षा पदाधिकारी और संबंधित बरेजा उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक को लिखित आवेदन देकर महान स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर विद्यालय का नामकरण कराए जाने को लेकर मांग किया है।
मंत्री रहते हुए पंडित गिरीश तिवारी ने कराया था विद्यालय का निर्माण
इस संबंध में प्रवीण चंद्र तिवारी ने अपने आवेदन में लिखा है कि महान स्वतंत्रता सेनानी एवं बिहार सरकार के पूर्व शिक्षा एवं धार्मिक न्यास मंत्री पंडित गिरीश तिवारी ने अपने अथक प्रयास एवं सहयोग से सारण जिले के मांझी प्रखंड अंतर्गत बरेजा गांव स्थित तालाब के नजदीक उच्च विद्यालय सह उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का निर्माण कराया था। लेकिन उक्त विद्यालय का नाम स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर करने से संबंधित आवेदन सूबे के मुखिया नीतीश कुमार जब अपने एकमा प्रवास यात्रा 14 फरवरी 2010, महाराजगंज लोकसभा उपचुनाव के दौरान पंडित गिरीश तिवारी के गांव 30 मई 2013 तथा 18 जनवरी 2018 को एकमा में समीक्षा यात्रा के दौरान दिया गया था।
साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सैकड़ों जन प्रतिनिधियों की उपस्थिति में घोषणा भी की, लेकिन काफी दुःख एवं झोभ की बात है कि अभी तक उक्त विद्यालय का नामकरण स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर नहीं किया गया है। हालांकि विश्वस्त सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि उक्त विद्यालय के शिक्षक और कुछ असामाजिक तत्वों की मिली मगत से सरकार को गुमराह कर दो व्यक्ति भूपेंद्र और सुरेन्द्र के नाम पर कर दिया गया है।
विद्यालय को स्थापित करने वाले एक मात्र संस्थापक
बरेजा गांव स्थित उच्च विद्यालय निर्माण के समय पंडित गिरीश तिवारी ने जगदीश दत्त शर्मा, कैलाश पति तिवारी, दमरी तिवारी, बागेन्द्र तिवारी, मृगेन्द्र तिवारी, भुपेन्द्र तिवारी और सुरेन्द्र तिवारी से जमीन दान लिया था। इन सभी का जमीन लगभग 5 से 6 कठ्ठा प्रति व्यक्ति है, इसके अलावा स्वतंत्रता सेनानी राम राजेश्वर प्रसाद तिवारी उर्फ सावलिया जी के द्वारा 5 बिगहा जमीन स्कूल के खेल मैदान के लिए दिया गया था। उपरोक्त दान कर्ताओं में सावलिया जी के अलावा कोई स्वतंत्रता सेनानी भी नही था। लेकिन सबसे अहम बात यह है कि राजनीतिक जीवन से सन्यास लेने के बाद एवं मृत्यु के कुछ माह पहले तक अपने द्वारा स्थापित बरेजा उच्च विद्यालय में ही रहते थे। क्योंकि उक्त विद्यालय से उनका भावनात्मक और आत्मीय लगाव होने का कारण यह भी था कि उक्त विद्यालय को स्थापित करने वाले एक मात्र संस्थापक थे।
राहुल सांकृत्यायन के किताब में विद्यालय की चर्चा
महापंडित राहुल सांकृत्यायन द्वारा 1956 में लिखित पुस्तक “मेरे असहयोग के साथी” और स्वतंत्रता सेनानी पंडित जलेश्वर दुबे के मार्गदर्शन में 1990 के दौरान लिखी गई पुस्तक ” स्वतंत्रता संग्राम में मांझी अंचल की भूमिका” में भी पंडित गिरीश तिवारी द्वारा स्थापित उक्त विद्यालय की चर्चा की गई है। वर्ष 2023 में आजादी के अमृत महोत्सव पर प्रकाशित पुस्तक “अमर स्वतंत्रता सेनानी पंडित गिरीश तिवारी” में एक जमीन दानकर्ता के परिजन डॉ कमलेश द्विवेदी ने विस्तार पूर्वक चर्चा किया है। लेकिन संस्थापक के नाम से अभी तक विद्यालय का नाम नहीं हुआ है।
जिस कारण जिले या क्षेत्र की युवा पीढ़ी अपने पूर्वजों या स्वतंत्रता सेनानियों की जानकारी नहीं है। हालांकि इस संबंध में सारण प्रमंडल के कई सांसद और विधायकों से नामकरण को लेकर अनुरोध पत्र दिया गया है लेकिन ढांक के तीन पात वाली कहावत चरितार्थ हुई है। इतना ही नहीं बल्कि सारण के पूर्व विधान पार्षद डॉ महाचंद्र प्रसाद सिंह और छपरा विधायक डॉ सी एन गुप्ता द्वारा सदन में आवाज उठाई जा चुकी है।