छपरा में विद्यालय में घूसकर हेडमास्टर के साथ मारपीट, जमीन कब्जा करने को लेकर हुआ विवाद

छपरा

छपरा। छपरा में मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के चनचौरा में संचालित वित्त रहित विद्यालय में घुसकर हेडमास्टर के साथ असामाजिक तत्वों ने मारपीट की है। सदर अस्पताल में घायल हेडमास्टर को भर्ती कराया गया है। मामला छपरा सदर प्रखंड अंतर्गत चनचौरा गांव में बिहार सरकार से मान्यता प्राप्त वित्तरहित संस्थान डॉ सीताराम प्रसाद उच्च विद्यालय का है जहां विद्यालय के प्रधानाध्यापक ओम कुमार सिंह के साथ उसी गांव के कुछ लोगो द्वारा विद्यालय में घुसकर मारपीट की गई है। इतना ही नही दबंग प्रवृति के लोगो द्वारा पहले विद्यालय के खाली जमीन में बांस बल्ला रखा गया और फिर अब पूरे जमीन को ही उनलोगो द्वारा दखल किया जा रहा है जिसका विरोध करने पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक, शिक्षक और विद्यार्थियों के साथ भी मारपीट की बात कही जा रही है।

इस संबंध में प्रधानाध्यापक द्वारा जिला प्रशासन को पत्र प्रेषित कर मदद की गुहार लगाई गई हैं लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं होने से न सिर्फ असामाजिक लोगो का मनोबल बढ़ा हुआ है बल्कि विद्यालय के सभी शिक्षक और विद्यार्थी डर के साए में रहने को मजबूर है।

वही सदर अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे विद्यालय के प्रधानाध्यापक ओम कुमार सिंह ने बताया कि बीते 18 जुलाई को चंचौरा गांव निवासी स्व भरत सिंह के पुत्र सुनील कुमार सिंह द्वारा जबरन विद्यालय में बांस रखा गया इसके खिलाफ स्थानीय मुफ्फसिल थाने में प्राथमिकी दर्ज करने का आवेदन भी दिया गया। वही 19 जुलाई को सुनील सिंह के साथ स्थानीय निवासी परमा राय के पुत्र शंभू राय, सत्येन्द्र राय, शत्रुध्न राय के द्वारा विद्यालय में घुसकर बांस बल्ला रखा जा रहा था जिसे रोकने पर विद्यालय के छात्र छात्राओं से मारपीट की गई जिसकी सूचना स्थानीय थाना को दी गई लेकिन कोई कार्रवाई अभी तक नहीं हुई है। वही आज शुक्रवार को मैं वर्ग समापन के समय जब कमरों को बंद कर रहा था तभी दर्जनों की संख्या में वे लोग पहुंचे और मेरे साथ मारपीट की गई जब स्थानीय लोग मदद को दौरे तब वे सभी भाग निकले।

फिलहाल घायल प्रधानाध्यापक का उपचार छपरा सदर अस्पताल में किया जा रहा है उन्हे पीठ और पैर पर लोहे की रड और लाठी डंडे से वार किया गया है उन्हे अंदरूनी चोटे भी आई है जिससे स्थिति गंभीर बनी हुई है।

वही इस मारपीट और अवैध कब्जा के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने पर विद्यालय के शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मी, विद्यार्थी और अन्य ग्रामीण सड़क पर उतर आंदोलन करने का मन बना चुके है।