छपरा

सारण DM ने नन्ही जिंदगी की सुरक्षा का रास्ता दिखाया , ‘पालना घर’ का करें इस्तेमाल

डीएम ने दत्तक संस्थान का किया निरीक्षण

छपरा। किसी नवजात या शिशु को लावारिस छोड़ने की मजबूरी में उसे सड़क, अस्पताल या किसी सार्वजनिक स्थान पर छोड़ना उसकी जिंदगी को गंभीर खतरे में डाल सकता है। ऐसे बच्चों की सुरक्षा के लिए सरकार की निर्धारित व्यवस्था का उपयोग किया जा सकता है। इसी संदेश के साथ जिला पदाधिकारी वैभव श्रीवास्तव की अध्यक्षता में गठित जिला निरीक्षण समिति ने शुक्रवार को पर्यवेक्षण गृह, सारण और विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन, न्यायिक प्रक्रिया और दत्तक ग्रहण से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा की गयी तथा संबंधित अधिकारियों को कई आवश्यक निर्देश दिए गए।

निरीक्षण के दौरान डीएम ने बच्चों की जरूरतों के अनुरूप व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने तथा यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि बच्चों को समय पर शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, पौष्टिक भोजन और आवश्यक संरक्षण मिले।

बच्चों की पढ़ाई के अनुरूप बने पाठ्यक्रम

पर्यवेक्षण गृह के निरीक्षण के दौरान जिला पदाधिकारी ने बच्चों की शैक्षणिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों को पाठ्यक्रम तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा उनकी सीखने की क्षमता, वर्तमान शैक्षणिक स्तर और जरूरत के अनुरूप होनी चाहिए, ताकि वे पढ़ाई की मुख्यधारा से जुड़े रह सकें। शिक्षकों को नियमित शैक्षणिक गतिविधियों के साथ बच्चों की प्रगति पर भी ध्यान देने को कहा गया।

हर माह किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष होगा उपस्थापन

डीएम ने निर्देश दिया कि पर्यवेक्षण गृह में रह रहे सभी बच्चों का प्रत्येक माह किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष उपस्थापन सुनिश्चित किया जाए। इससे बच्चों से संबंधित मामलों की निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियमित समीक्षा हो सकेगी और आवश्यक निर्णय समय पर लिए जा सकेंगे। संबंधित अधिकारियों को बच्चों से जुड़े मामलों में सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार और निर्धारित समय सीमा में पूरा करने को कहा गया।

हर महीने स्वास्थ्य जांच अनिवार्य

बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर भी विशेष निर्देश दिए गए। जिला पदाधिकारी ने सिविल सर्जन को प्रत्येक माह सभी बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराने के लिए निर्देशित किया। नियमित स्वास्थ्य जांच से बच्चों में किसी बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी समस्या की समय पर पहचान कर उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। स्वास्थ्य संबंधी अभिलेखों को भी व्यवस्थित रखने पर जोर दिया गया।

तय मेनू के अनुसार समय पर मिले भोजन

पर्यवेक्षण गृह में बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की भी समीक्षा की गयी। डीएम ने निर्देश दिया कि निर्धारित मेनू के अनुसार बच्चों को समय पर भोजन उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता और समयबद्ध उपलब्धता पर विशेष ध्यान देने को कहा, ताकि बच्चों को नियमित और संतुलित आहार मिल सके।

दत्तक ग्रहण संस्थान में पैकेज्ड फूड पर रोक

विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान के निरीक्षण के दौरान छोटे बच्चों की खानपान व्यवस्था को लेकर भी निर्देश दिए गए। जिला पदाधिकारी ने बच्चों को पैकेज्ड फूड नहीं देने को कहा। उन्होंने बच्चों के लिए उनकी उम्र और चिकित्सकीय जरूरतों के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराने पर जोर दिया। साथ ही बच्चों की नियमित देखभाल और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं की लगातार निगरानी की बात कही।

अगली टीकाकरण और चिकित्सकीय तिथि नोटिस बोर्ड पर होगी

डीएम ने निर्देश दिया कि बच्चों के आगामी टीकाकरण की तिथि और चिकित्सक के परामर्श की अगली तारीख संस्थान के नोटिस बोर्ड पर स्पष्ट रूप से अंकित की जाए। इससे संस्थान के कर्मचारियों को समय पर जानकारी रहेगी और कोई आवश्यक टीकाकरण या चिकित्सकीय परामर्श छूटने की संभावना कम होगी।

दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया समय पर पूरी करने का निर्देश

विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान में रहने वाले बच्चों से संबंधित दत्तक ग्रहण प्रक्रिया के विभिन्न चरणों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने का निर्देश भी दिया गया। डीएम ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा कि दत्तक ग्रहण से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं का नियमानुसार समय पर निष्पादन हो, ताकि पात्र बच्चों को आगे की प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब का सामना न करना पड़े।

असहाय बच्चों को असुरक्षित जगह छोड़ने से बचें

निरीक्षण के दौरान जिला पदाधिकारी ने आम लोगों से महत्वपूर्ण अपील भी की। उन्होंने कहा कि यदि किसी कारणवश किसी नवजात या शिशु की देखभाल माता-पिता या परिवार के लिए संभव नहीं है, तो बच्चे को सड़क, अस्पताल, सार्वजनिक स्थान या किसी अन्य असुरक्षित जगह पर छोड़ने के बजाय विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान अथवा एसएए में उपलब्ध पालना (क्रैडल) का उपयोग किया जाए। उन्होंने बताया कि पालना के माध्यम से बच्चे को सुरक्षित रूप से संस्थान तक पहुंचाया जा सकता है, जहां उसकी देखभाल, संरक्षण और आवश्यक सुरक्षा की व्यवस्था रहती है। इसके बाद बच्चे के संबंध में आगे की कार्रवाई विधि और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाती है।

सुरक्षित परित्याग से बच्चे का जीवन और भविष्य बचेगा

जिला पदाधिकारी ने कहा कि किसी बच्चे को असुरक्षित जगह पर छोड़ने से उसके जीवन और भविष्य पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए निर्धारित सुरक्षित व्यवस्था का उपयोग करना जरूरी है। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि किसी कठिन परिस्थिति में नवजात या शिशु को अकेला छोड़ने के बजाय सुरक्षित पालना व्यवस्था का सहारा लें, ताकि बच्चे को तत्काल संरक्षण मिल सके और उसकी आगे की देखभाल नियमानुसार की जा सके।

बच्चों के संरक्षण और बेहतर भविष्य पर जोर

निरीक्षण के दौरान समग्र रूप से बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा और उनके मामलों की कानूनी प्रक्रिया की नियमित निगरानी पर जोर दिया गया। पर्यवेक्षण गृह में रहने वाले बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के साथ उनकी स्वास्थ्य आवश्यकताओं और न्यायिक प्रक्रिया की समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। वहीं विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान में बच्चों की देखभाल, टीकाकरण, चिकित्सकीय निगरानी और दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया को व्यवस्थित एवं समयबद्ध रखने पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।

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Ganpat Aryan
Ganpat Aryan
वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।

Ganpat Aryan

वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।

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