
Bihar Fish Farmers Exposure Visit Scheme 2026: बिहार सरकार मत्स्य उत्पादन बढ़ाने और मछली पालकों की आय में वृद्धि के लिए आधुनिक तकनीक पर विशेष जोर दे रही है। इसी कड़ी में डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में 3,000 मत्स्य पालक किसानों को राज्य के भीतर विकसित आधुनिक मत्स्य प्रक्षेत्रों का भ्रमण कराने का निर्णय लिया है। इस महत्वाकांक्षी ‘भ्रमण-दर्शन कार्यक्रम’ के लिए सरकार ने 46.50 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इस पहल का उद्देश्य किसानों को आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों से व्यावहारिक रूप से परिचित कराकर उत्पादन बढ़ाना, लागत कम करना और रोजगार के नए अवसर सृजित करना है।
‘भ्रमण-दर्शन कार्यक्रम’
योजना के तहत चयनित मत्स्य पालकों को राज्य के विभिन्न जिलों में स्थापित समेकित मत्स्य पालन इकाइयों, चौर विकास परियोजनाओं, केज कल्चर, मत्स्य बीज हैचरी, फिश फीड मिल, बायोफ्लॉक और आरएएस (री-सर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम) जैसी आधुनिक तकनीकों पर आधारित मत्स्य प्रक्षेत्रों का भ्रमण कराया जाएगा। भ्रमण के दौरान विशेषज्ञ किसानों को इन तकनीकों की कार्यप्रणाली, प्रबंधन और व्यावसायिक उपयोग की जानकारी देंगे, ताकि वे अपने क्षेत्र में इन मॉडलों को अपनाकर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें।
राज्य के सभी जिलों में संचालित होने वाली इस योजना के अंतर्गत 150 बैच बनाए जाएंगे। प्रत्येक बैच में 20 मत्स्य कृषकों को शामिल कर एक दिवसीय भ्रमण कराया जाएगा। भ्रमण में भाग लेने के लिए प्रत्येक किसान को 100 रुपये निबंधन शुल्क जिला मत्स्य कार्यालय में जमा करना होगा।
ऑनलाइन आवेदन से होगा चयन
विभाग ने योजना के लाभुकों के चयन के लिए पूरी तरह पारदर्शी व्यवस्था लागू की है। इच्छुक किसान ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इस योजना का लाभ ऐसे किसान भी उठा सकेंगे जो मछली पालन शुरू करना चाहते हैं तथा वे किसान भी जो पहले से निजी अथवा पट्टे पर मत्स्य पालन कर रहे हैं। हालांकि, जो किसान पूर्व में इस योजना का लाभ ले चुके हैं, उन्हें दोबारा इसका लाभ नहीं दिया जाएगा।
68 हजार से अधिक मछली पालकों को मिल चुका है प्रशिक्षण
राज्य सरकार पिछले कुछ वर्षों से मत्स्य क्षेत्र में कौशल विकास पर लगातार काम कर रही है। अब तक 68,890 मत्स्य पालकों को आधुनिक मत्स्य पालन का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इनमें 51,305 किसानों को बिहार के भीतर तथा 17,585 किसानों को राज्य के बाहर स्थित प्रतिष्ठित मत्स्य संस्थानों में प्रशिक्षित किया गया है।
इसके अलावा भ्रमण-दर्शन कार्यक्रम के तहत अब तक 47,279 से अधिक मत्स्य पालकों को राज्य में विकसित आर्द्रभूमि, बायोफ्लॉक इकाइयों और आधुनिक मत्स्य पालन मॉडल का निःशुल्क भ्रमण कराया जा चुका है।
विभाग का मानना है कि आधुनिक तकनीकों का अधिक से अधिक प्रसार होने से बिहार में मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, किसानों की आय बढ़ेगी और राज्य आत्मनिर्भर मत्स्य उत्पादन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।
योजना एक नजर में
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| योजना का नाम | भ्रमण-दर्शन कार्यक्रम |
| वित्तीय वर्ष | 2026-27 |
| कुल लाभुक | 3,000 मत्स्य किसान |
| स्वीकृत राशि | ₹46.50 लाख |
| कुल बैच | 150 |
| प्रति बैच किसान | 20 |
| भ्रमण अवधि | एक दिन |
| निबंधन शुल्क | ₹100 प्रति किसान |
| चयन प्रक्रिया | ऑनलाइन आवेदन |
किन तकनीकों का मिलेगा प्रशिक्षण
- बायोफ्लॉक तकनीक
- आरएएस (Recirculatory Aquaculture System)
- केज कल्चर (पिंजरा आधारित मत्स्य पालन)
- समेकित मत्स्य पालन
- विकसित मत्स्य बीज हैचरी
- फिश फीड मिल
- चौर विकास आधारित मत्स्य पालन
अब तक की उपलब्धियां
| विवरण | संख्या |
| कुल प्रशिक्षित मत्स्य पालक | 68,890 |
| राज्य के भीतर प्रशिक्षित | 51,305 |
| राज्य के बाहर प्रशिक्षित | 17,585 |
| भ्रमण-दर्शन से लाभान्वित किसान | 47,279+ |
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर, अमर उजाला और हिन्दुस्थान समाचार में सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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