Trending

क्या सच में टीपू सुल्तान के हाथ में थी ‘राम’ नाम की अंगूठी? जानिए अंगूठी का रहस्य

सियासत में गरमाया टीपू सुल्तान का नाम

Tipu Sultan: इन दिनों एक ऐतिहासिक दावा फिर सुर्खियों में है क्या 18वीं सदी के मैसूर के शासक टीपू सुल्तान ने अपनी मृत्यु के समय ऐसी अंगूठी पहन रखी थी, जिस पर ‘राम’ नाम अंकित था? महाराष्ट्र की राजनीति में दिए गए एक बयान के बाद यह मुद्दा सोशल मीडिया और राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।

लेकिन सवाल यह है कि क्या इस दावे के समर्थन में ठोस और प्रमाणिक ऐतिहासिक साक्ष्य मौजूद हैं? आइए उपलब्ध तथ्यों और शोध के आधार पर इस पूरे विवाद को समझते हैं।


विवाद की पृष्ठभूमि

हाल ही में एक राजनीतिक बयान में कहा गया कि टीपू सुल्तान “राम” नाम वाली अंगूठी पहनते थे। इस कथन को उनके धार्मिक दृष्टिकोण और ऐतिहासिक छवि से जोड़कर प्रस्तुत किया गया। हालांकि इतिहासकारों का कहना है कि इस तरह के दावे को स्थापित करने के लिए स्पष्ट दस्तावेजी प्रमाण आवश्यक होते हैं, जो फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। यही कारण है कि यह मुद्दा विवाद और बहस का विषय बन गया है।


ऐतिहासिक संदर्भ क्या कहते हैं?

इतिहास के अनुसार, 1799 में Fourth Anglo-Mysore War के दौरान श्रीरंगपट्टनम में टीपू सुल्तान की मृत्यु हुई थी। मृत्यु के बाद ब्रिटिश सैनिकों ने उनके शरीर से तलवार, आभूषण और अन्य निजी वस्तुएं अपने कब्जे में लीं। इन वस्तुओं में से कई बाद में ब्रिटेन पहुंचीं और समय-समय पर संग्रहालयों या नीलामी घरों में सामने आईं।

कुछ नीलामी रिकॉर्ड में एक ऐसी अंगूठी का उल्लेख मिलता है, जिस पर देवनागरी लिपि में “राम” अंकित होने का दावा किया गया। हालांकि उपलब्ध दस्तावेजों में यह स्पष्ट प्रमाण नहीं है कि वह अंगूठी वास्तव में टीपू सुल्तान द्वारा मृत्यु के समय पहनी गई थी या वह उनके निजी उपयोग की वस्तु थी।


दावों और तथ्यों में अंतर

अलग-अलग लेखों और कथनों में यह कहा गया है कि:

  • उनके शरीर के पास से एक अंगूठी मिली थी,

  • उस पर “राम” लिखा था,

  • और बाद में वह इंग्लैंड में नीलामी में बेची गई।

हालांकि इन दावों के समर्थन में समकालीन आधिकारिक अभिलेख या प्रमाणित प्राथमिक स्रोत उपलब्ध नहीं हैं। अधिकतर संदर्भ कथात्मक विवरणों या द्वितीयक स्रोतों पर आधारित हैं। इतिहास लेखन में किसी तथ्य को स्वीकार करने के लिए उस समय के आधिकारिक दस्तावेज, पत्राचार, सैन्य रिपोर्ट या प्रत्यक्ष अभिलेख आवश्यक होते हैं। फिलहाल ऐसी पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।


विशेषज्ञों की राय

इतिहासकारों का मत है कि किसी भी ऐतिहासिक दावे को प्रमाणित करने के लिए प्राथमिक स्रोतों का होना जरूरी है। जब तक समकालीन रिकॉर्ड, प्रमाणित अभिलेख या स्वतंत्र शोध उस दावे की पुष्टि न करें, तब तक उसे स्थापित ऐतिहासिक तथ्य नहीं माना जा सकता। उपलब्ध शोध के आधार पर यह निश्चित रूप से कहना कठिन है कि टीपू सुल्तान ने वास्तव में ‘राम’ नाम अंकित अंगूठी पहनी थी या नहीं।


निष्कर्ष

‘राम’ नाम की अंगूठी को लेकर किया जा रहा दावा अभी तक ठोस ऐतिहासिक प्रमाणों से पुष्ट नहीं है। कुछ नीलामी रिकॉर्ड और कथाएं चर्चा में जरूर रही हैं, लेकिन वे यह सिद्ध नहीं करतीं कि वह अंगूठी निश्चित रूप से टीपू सुल्तान की थी या उनके धार्मिक विश्वास का प्रतीक थी। इसलिए वर्तमान उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इसे प्रमाणित ऐतिहासिक सत्य नहीं कहा जा सकता। इतिहास से जुड़े ऐसे विषयों पर निष्कर्ष निकालने से पहले प्रमाण और शोध को प्राथमिकता देना ही संतुलित दृष्टिकोण माना जाता है।

Author Profile

Ankita Kumari
Ankita Kumari
अंकिता कुमारी पत्रकारिता की छात्रा हैं। वर्तमान में वह संजीवनी समाचार डॉट कॉम के साथ इंटर्नशिप कर रही हैं और समाचार लेखन व फील्ड रिपोर्टिंग में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई है।

Ankita Kumari

अंकिता कुमारी पत्रकारिता की छात्रा हैं। वर्तमान में वह संजीवनी समाचार डॉट कॉम के साथ इंटर्नशिप कर रही हैं और समाचार लेखन व फील्ड रिपोर्टिंग में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई है।

Related Articles

Back to top button