
छपरा। सारण जिले के अमनौर और मकेर थाना क्षेत्र के सात श्रमिकों को असम के तीनसुकिया ज़िले से बंधनमुक्त करा लिया गया है। यह कार्रवाई बिहार सरकार के श्रम संसाधन विभाग के सक्रिय हस्तक्षेप और लगातार की गई उच्चस्तरीय पहल का परिणाम है। ये सभी श्रमिक कौशल सिंह के स्वामित्व वाले चिमनी भट्ठे, ग्राम लिडु (थाना–मारग्रेटा) में काम करने गए थे, जहां भट्ठा मालिक ने उन्हें जबरन बंधक बना रखा था।
इन मजदूरों को कराया गया मुक्त
मुक्त कराए गए श्रमिकों में संजय कुमार (18 वर्ष), गजेन्द्र महतो (32 वर्ष), राजकुमार महतो (60 वर्ष), गणेशी महतो (55 वर्ष), सनोज महतो (28 वर्ष), मुकेश नट (18 वर्ष) और सुरेश राम (36 वर्ष) शामिल हैं। सभी श्रमिकों ने बताया कि उनका मोबाइल जब्त कर लिया गया था, उनसे ज़बरन श्रम कराया जा रहा था और विरोध करने पर मारपीट भी की जा रही थी।
मुखिया की पहल पर जगी सरकार
मामले की जानकारी श्रमिकों के परिजनों द्वारा मकेर प्रखंड की ग्राम पंचायत राज कैतुका नंदन के मुखिया मिथिलेश राय के माध्यम से जिला प्रशासन, सारण और श्रम संसाधन विभाग को दी गई थी। श्रमिकों के परिजनों ने पत्र लिखकर अपने परिजनों के बंधक बनाए जाने की पुष्टि की और तत्काल कार्रवाई की मांग की। सूचना सत्यापित होने के बाद, श्रम अधीक्षक सारण द्वारा संयुक्त श्रमायुक्त, नई दिल्ली को कार्रवाई हेतु औपचारिक अनुरोध पत्र भेजा गया। मंत्रीस्तरीय निर्देश के बाद असम के संबंधित विभागों से संपर्क स्थापित किया गया और सभी श्रमिकों को सुरक्षित मुक्त करा लिया गया।
श्रम संसाधन विभाग ने आश्वासन दिया है कि सभी श्रमिकों को सकुशल बिहार लाया गया है तथा दोषी चिमनी मालिक के विरुद्ध आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है। यह कार्रवाई उन हजारों प्रवासी श्रमिकों के लिए राहत का संदेश है, जो देश के अन्य राज्यों में काम करते हैं और अक्सर शोषण तथा बंधुआ श्रम का सामना करते हैं।
यह प्रयास न केवल बिहार सरकार की त्वरित प्रशासनिक संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि राज्य सरकार किसी भी परिस्थिति में राज्य के नागरिकों की सुरक्षा और अधिकारों से समझौता नहीं करेगी।
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