सारण में एक हीं नाम से 2 रेलवे स्टेशन, न टिकट की सुविधा पूरी, न यात्री सुविधाओं का इंतजाम

छपरा। सारण जिले के छपरा-बलिया रेलखंड पर एक अनोखा और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर एक ही नाम के दो रेलवे स्टेशन मौजूद हैं — “मांझी”। लेकिन सुविधाओं के लिहाज से दोनों स्टेशनों की स्थिति बिल्कुल अलग-अलग है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पुराना मांझी स्टेशन:
ब्रिटिश काल में निर्मित पुराना मांझी स्टेशन आज भी यात्रियों के लिए संघर्ष का दूसरा नाम बना हुआ है। यहां यात्री ट्रेनें तो रुकती हैं, लेकिन सुविधाओं का घोर अभाव है। टिकट की सुविधा मैनुअल है, और कई बार यात्रियों को टिकट नहीं मिल पाने की स्थिति में बिना टिकट यात्रा करनी पड़ती है।
नया मांझी स्टेशन:
करीब तीन किलोमीटर दूर बना नया मांझी स्टेशन अपेक्षाकृत आधुनिक है। यहाँ दो प्लेटफॉर्म, बैठने की जगह, शौचालय, पेयजल सुविधा और फुट ओवरब्रिज जैसी कई व्यवस्थाएं मौजूद हैं। लेकिन सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इस स्टेशन पर टिकट काउंटर नहीं है। यात्री या तो मोबाइल ऐप के माध्यम से टिकट बुक करें या फिर पुराने मांझी स्टेशन जाकर टिकट लें, अन्यथा बिना टिकट यात्रा करने को मजबूर हो जाएं।
यात्री परेशान:
स्थानीय यात्रियों का कहना है कि खासतौर पर जो लोग नए मांझी स्टेशन के नजदीक रहते हैं, उन्हें टिकट व्यवस्था की कमी से सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। कई बार समय पर ट्रेन पकड़ने की जल्दबाजी में टिकट लेना भी संभव नहीं हो पाता।
रेलवे प्रशासन से मांग:
यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से अपील की है कि नए मांझी स्टेशन पर भी टिकट काउंटर की व्यवस्था जल्द शुरू की जाए। साथ ही दोनों स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं का समान विकास किया जाए, ताकि यात्रियों को किसी भी तरह की असुविधा न हो और यात्रा अनुभव बेहतर बन सके।
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