बदलते मौसम में बच्चों को प्रभावित कर रहा गलसुआ: डा संदीप

छपरा

छपरा:बरसात के मौसम में असर के साथ ही बच्चों को गलसुआ (मम्पस) अपनी गिरफ्त में लेने लगा है। पिछले कई दिनों से अस्पताल में प्रतिदिन गलसुआ से पीड़ित बच्चे पहुंच रहे हैं।

गलसुआ को सामान्य बोलचाल में गलफड़ा भी कहा जाता है। छपरा सदर अस्पताल में पदस्थापित व शिवा चाइल्ड क्लिनिक के संस्थापक शिशु रोग विशेषज्ञ डा संदीप यादव के अनुसार गलसुआ एक वायरल इंफेक्शन है, जो आसानी से फैलता है और शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित कर सकता है। किसी भी तरह के वायरल इंफेक्शन को बढ़ाने में तापमान की महत्ती भूमिका रहती है। ऐसे में छोटे बच्चे इंफेक्शन के शिकार जल्द हो जाते हैं। इन दिनों बदलते मौसम के कारण एक से दूसरे बच्चे में यह वायरल इंफेक्शन आसानी से पहुंच रहा है। गलसुआ मुख्य रूप से लार ग्रंथियों को प्रभावित करता है, जो कान और जबड़े के बीच में प्रत्येक गाल के पीछे स्थित होती हैं। गलसुआ लार ग्रंथियों की सूजन और दर्द का करण बनता है। इस बीमारी में बच्चे के चेहरे पर एक साइड से सूजन शुरू हो जाती है, जो उपचार नहीं कराने की स्थिति में दूसरे हिस्से तक पहुंच जाती है। इसका असर 6-7 दिन तक रहता है।

गलसुआके कारण

इसका मुख्य कारण मम्पस वायरल है और यह संक्रमित लार, छींकने या खांसने तथा संक्रमित व्यक्ति के साथ बर्तन साझा करने के माध्यम से एक से दूसरे में आसानी से फैलता है। इसके लक्षणों की शुरुआत आमतौर पर वायरस से संपर्क के बाद 14 से 18 दिनों में होती है।

गलसुआके लक्षण

गलसुआमें बहुत ही हल्के लक्षण देखने को मिलते हैं। इनमें बुखार, उल्टी, गालों पर सूजन दिखाई देना, सिरदर्द, भूख लगना, कमजोरी, चबाने और निगलने में दर्द होना आदि शामिल हैं।

यहबरतें सावधानी

डा संदीप ने बताया कि गलसुआ एक वायरल संक्रमण है। ऐसे में डॉक्टर से परामर्श लें। करीब एक सप्ताह में यह रोग समाप्त हो जाता है। डॉक्टर की सलाह से दर्द निवारक दवा लेने से इससे होने वाले दर्द काे कम किया जा सकता है। इसके अलावा रोगी को पूरा आराम कराना चाहिए तथा नरम आहार लें, ताकि अधिक चबाना नहीं पड़े। तरल पदार्थों का सेवन करें, खट्टे फल खाने से बचे। वहीं रोग को फैलने से रोकने के लिए रोगी को अलग रखना घरेलू उपचार में शामिल है।

गलसुआकी रोकथाम

एमएमआर(मीजल्स-मम्पस-रुबैला) टीकाकरण गलसुआ को रोकने के लिए सबसे सुरक्षित और सबसे प्रभावी प्रक्रिया है। इसके लिए बच्चे को एमएमआर की दो खुराक दी जाती है। पहली आमतौर पर 12-15 महीने की उम्र में दे।