होली में केमिकल वाले रंगों से बच्चों को रखे दूर: डॉ इशिका

छपरा
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

छपरा : रंगो के त्यौहार होली में आप ने देखा होगा की बच्चे सबसे ज़्यदा मस्ती करते है नजर आते है । होली हिन्दूओं का महत्वपूर्ण त्यौहार है। इस त्यौहार को बड़े ही धूम धाम से पूरे देश में मनाया जाता है। लोग इस दौरान एक दूसरे को रंग लगाकर और नाच-गाकर इस त्यौहार को मनाते हैं। वहीं बच्चे भी इस दिन को लेकर बेहद ही एक्साइटेड रहते हैं।  लेकिन हम जो कलर होली खेलने के दौरान उपयोग में लाते हैं उसमें कई तरह के केमिकल होते हैं। जो बच्चों की त्वचा और बालों सहित सेहत को कई नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में आज हम आपको कुछ टिप्स देने वाले हैं जिनको फॉलो करके आप सुरक्षित होली मना सकती हैं। और अपने बच्चों की सेहत का भी ध्यान रख सकती हैं।

छपरा सदर अस्पताल में पदस्थापित व नगरपालिका चौक स्थित सात्विका न्यूबॉर्न एंड चाइल्ड केयर की शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ इशिका सिन्हा ने बताया की केमिकल वाले रंगों से रखे दूर होली बच्चों का पसंदीदा त्यौहारों में से एक है। बच्चें मना करने का बाद भी होली खेलने की जिद करते हैं। होली में गुलाल-अबीर और पक्के रंग मिलते हैं। जो ज्यादा तर केमिकल युक्त होते हैं, जो त्वचा और आंखों के लिए नुकसान पहुंचा सकते हैं। केमिकल युक्त रंगों की बजाए हर्बल रंग बच्चों को होली पर ला कर दें।

आंखो के रंगों से बचाएं बच्चों की आंखे बहुत ही नाजुक होती है ऐसें में अगर उनके आंखों में रंग जाएगा तो उनकी आंखों पर बुरा असर पड़ सकता है। कई बार रंग जाने से आंखे लाल पड़ जाती है और खुजली भी होने लगती है।

ऐसे में आप बच्चों की आंखों को रंगों से बचाने के लिए उन्हें कलरफुल और फंकी गॉगल पहना सकते हैं। होली खेलते समय पूरी बाजू के कपड़े भी पहनाएं, ताकि उनकी अधिक से अधिक त्वचा ढकी रहे।

ऑर्गेनिक रंग से भी रखे सावधानी केमिकल फ्री रंगों का इस्तेमाल करने के लिए बाजार से ऑर्गेनिक कलर खरीदकर ला सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि सिंथेटिक कलर हों या ऑर्गेनिक कलर हो, मुंह के अंदर चले जाने पर यह खतरनाक साबित हो सकते हैं और फूड प्वाइजनिंग व इंफेक्शन का खतरा हो सकता है। इसलिए कलर मुंह में नही जाना चाहिए।

उन्होंने कहा की ज्यादा देर ना रखें गीला बच्चे बलून और पिचकारी से होली खेलते हैं और गीले हो जाते है। मार्च का मौसम सर्दी और गर्मी के बीच का है। इस मौसम में कभी हल्की सर्दी महसूस होती है तो कभी तेज धूप के कारण गर्म महसूस होता है। इस तरह का मौसम बच्चों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
अधिक देर बच्चों को गीले कपड़ों में न रहने दें। इसे उनके तबियत खराब हो सकती है।