BSNL: गलत बिलिंग और सेवा में कमी पर BSNL को झटका, 6.69 लाख के बिल पर आयोग ने सुनाया बड़ा फैसला
मानसिक परेशानी पर 1 लाख मुआवजा और 25 हजार वाद खर्च भी देना होगा

पटना। गलत बिलिंग और मोबाइल सेवा में कमी को लेकर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पटना ने भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के खिलाफ महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने उपभोक्ता की शिकायत को उचित मानते हुए बीएसएनएल को मोबाइल, कॉल और एसएमएस सेवा बहाल करने, विवादित अवधि की विस्तृत कॉल डिटेल उपलब्ध कराने और सही बिल जारी करने का निर्देश दिया है। संशोधित बिल में निर्धारित राशि से अधिक वसूली गई रकम भी उपभोक्ता को वापस करनी होगी।
मामला वर्ष 2017 में दायर उपभोक्ता शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने बीएसएनएल की आईएसडी और इंटरनेशनल रोमिंग सेवा ली थी। उनका आरोप था कि आवश्यक राशि जमा करने और निर्धारित औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद विदेश यात्रा के दौरान उनकी सिम सेवा काम नहीं कर रही थी। इसके बाद भारत लौटने पर उन्हें 6,69,850 रुपये का बिल थमा दिया गया।
शिकायतकर्ता ने बिल की राशि पर आपत्ति जताते हुए आयोग के समक्ष कहा कि इतनी बड़ी राशि की मांग के बावजूद उन्हें उसके समर्थन में विस्तृत कॉल विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया। मामले की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद आयोग ने बीएसएनएल की ओर से सेवा में कमी तथा बिलिंग से संबंधित उपभोक्ता की शिकायत को उचित माना।
30 मई से 8 जून 2016 तक का देना होगा कॉल विवरण
आयोग ने बीएसएनएल को निर्देश दिया है कि 30 मई 2016 से 8 जून 2016 तक की आईएसडी सेवा का सही और विस्तृत कॉल विवरण शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराया जाए। कॉल डिटेल के आधार पर वास्तविक उपयोग का आकलन करते हुए संशोधित बिल जारी करने का भी आदेश दिया गया है।
यदि संशोधित बिल की राशि पहले वसूली गई रकम से कम होती है तो अतिरिक्त वसूली गई राशि उपभोक्ता को वापस करनी होगी।
मानसिक परेशानी के लिए 1 लाख रुपये मुआवजा
आयोग ने सेवा में कमी और इससे उपभोक्ता को हुई मानसिक परेशानी को भी गंभीरता से लिया है। आदेश के तहत बीएसएनएल को 1 लाख रुपये का मुआवजा देना होगा। इसके अलावा मुकदमे में हुए खर्च के लिए 25 हजार रुपये वाद खर्च के रूप में भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।
इस तरह आयोग के आदेश के तहत बीएसएनएल को गलत बिल की अतिरिक्त राशि लौटाने के साथ-साथ 1.25 लाख रुपये मुआवजा एवं वाद खर्च भी देना होगा।
60 दिनों में करना होगा आदेश का पालन
आयोग ने बीएसएनएल को आदेश के अनुपालन के लिए 60 दिनों का समय दिया है। निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं करने पर देय राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
उपभोक्ता अधिकारों के लिहाज से अहम फैसला
यह फैसला ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां सेवा प्रदाता की ओर से उपभोक्ता को बिल की राशि का स्पष्ट और सत्यापन योग्य विवरण उपलब्ध नहीं कराया जाता। आयोग के आदेश से यह संदेश भी जाता है कि सेवा प्रदाताओं को पारदर्शी बिलिंग, उचित कॉल विवरण और गुणवत्तापूर्ण सेवा सुनिश्चित करनी होगी।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पटना के अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्र और सदस्य रजनीश कुमार ने मामले में यह आदेश पारित किया।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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