
छपरा: जिला कृषि पदाधिकारी की अध्यक्षता में पेस्ट सर्विलांस एवं एडवाइजरी कमिटी सारण की बैठक सहायक निदेशक पौधा संरक्षण के नेतृत्व में आयोजित की गई। बैठक में वर्तमान रबी फसलों में कीट-व्याधि के प्रभाव और फलदार वृक्षों, विशेषकर आम और लीची, के सूखने की समस्या पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर विनायक ने इस दौरान किसानों को कीट नियंत्रण और बचाव के उपायों पर सुझाव दिए।
बैठक में जिला कृषि पदाधिकारी श्याम बिहारी सिंह ने समेकित कृषि प्रणाली अपनाने की सलाह दी, जबकि सहायक निदेशक पौधा संरक्षण राधेश्याम कुमार ने जैविक कीटनाशकों के उपयोग और समेकित कीट प्रबंधन के बारे में दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि जिले के प्रत्येक प्रखंड में 03-03 पौधा संरक्षण पाठशालाएं चल रही हैं, जिनमें विशेष रूप से दलहन, तेलहन और गेहूं पर कीट प्रबंधन की तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इसके अलावा, किसानों को फेरोमैन ट्रैप, लाइफटाइम ट्रैप, जैविक कीटनाशक और रासायनिक कीटनाशक अनुदानित दरों पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। किसान 50% से 75% तक के अनुदान पर इन उपकरणों का उपयोग कर सकते हैं। दलहनी फसलों में फली छेदक कीट और सब्जी तथा फलदार पौधों को फ्रुट फ्लाई से बचाने के लिए फेरोमैन ट्रैप का वितरण किया जा रहा है।
कीटनाशकों के उचित उपयोग पर बल दिया गया
सहायक निदेशक पौधा संरक्षण राधेश्याम कुमार ने कहा कि फेरोमैन ट्रैप का उपयोग करने से रासायनिक कीटनाशकों का छिड़काव कम होगा, जिससे न केवल खर्च कम होगा बल्कि जलवायु पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। इस योजना के तहत किसानों को उर्वरकों और कीटनाशकों के उचित उपयोग पर बल दिया गया है।
इस बैठक में यह भी चर्चा की गई कि अधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग से जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। जिला कृषि पदाधिकारी ने इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करते हुए किसानों को कम उर्वरकों का प्रयोग करने की सलाह दी।
सरसों में लाही व आरा मक्खी कीट लगने की संभावना
कृषि विज्ञान केंद्र के डॉक्टर विनायक ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण आलू फसल में झुलसा रोग का प्रकोप बढ़ सकता है और सरसों में लाही व आरा मक्खी कीट लगने की संभावना है। इसके अलावा, सहायक निदेशक उद्यान ने फलदार पेड़ों के डेमो कार्यक्रम को पंचायत स्तर पर लागू करने का सुझाव दिया।
बैठक में जिले के सभी प्रखंड कृषि पदाधिकारी, पौधा संरक्षण कर्मी और कृषि समन्वयक उपस्थित थे, जिन्होंने किसानों को जागरूक करने और फसलों की सुरक्षा के लिए नई तकनीकों के प्रयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
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