फाइलेरिया के खिलाफ मूहिम में शामिल हुए पेशेंट नेटवर्क के सदस्य, घर-घर जाकर कर रहे जागरूक

स्वास्थ्य

• जिले में चल रहा है नाइट ब्लड सर्वे अभियान
• नाइट ब्लड सर्वे के दौरान लोगों को कैंप आने के लिए प्रेरित कर रहे नेटवर्क सदस्य
• 20 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों का लिया जा रहा है ब्लड सैंपल
सीवान। जिले में फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर विभिन्न स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। इसको लेकर जिले में तीन नवंबर से नाइट ब्लड सर्वे अभियान की शुरूआत की गयी है। जिसके तहत प्रत्येक प्रखंड के दो-दो गांवों में रात्रि में लोगों का ब्लड सैंपल लिया जा रहा है। ब्लड सैंपल जांच कर यह पता लगाया जायेगा कि किन-किन व्यक्तियों में फाइलेरिया बिमारी है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च के द्वारा गांव स्तर पर बनाये गये फाइलेरिया पेशेंट नेटवर्क के सदस्य भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निवर्हन करते हुए घर-घर जाकर लोगों को ब्लड सैंपल जांच कराने के लिए प्रेरित कर रहें है। इसके साथ कैंप स्थल पर भी स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों का सहयोग प्रदान कर रहे है।

सीवान जिले के भगवानपुर प्रखंड के बीरा बांकट गांव में बलंत बाबा फाइलेरिया पेशेंट सपोर्ट नेटवर्क के सक्रिय सदस्य ललिता देवी ने बताया कि हमारे नेटवर्क के सभी सदस्य सहयोग कर रहे है। बताया कि श्वेता देवी, श्रीकृष्णा प्रसाद, पुतुल कुमारी और मौजे टोला नेटवर्क के प्रमोद साह, जगन महतो के द्वारा बीरा बांकट गांव और कोरार सरेया गांव में घर-घर जाकर नाइट ब्लड सर्वे में टेस्ट के कराने के लिए जागरूकता फैला रहे है।

20 साल से अधिक आयु की महिलाओं एव पुरुषों का लिया गया सैंपल:

जिले में जिला स्तरीय पदाधिकारियों के द्वारा तथ प्रखंडों में मुखिया और जनप्रतिनिधियों के द्वारा अभियान शुरुआत की गयी। रात्रि में 8 बजे से ब्लड सैंपलिंग का कार्य शुरू किया गया जो देर रात तक चला। डीएमओ डॉ. एमआर रंजन ने बताया कि प्रत्येक प्रखंड के दो गांव से रक्त के नमूने लिए गए। इसमें एक क्षेत्र वह था जिसमें पूर्व में फाइलेरिया रोगी मिले हों। इसमें 20 साल से अधिक आयु की महिलाओं एव पुरुषों का सैंपल लिया गया। सैंपल लेकर रक्त पट्टिका बनाई गई। इसका उद्देश्य फालेरिया रोगी मिलने पर उसका तत्काल इलाज मुहैया कराकर जिले को इस रोग से मुक्त बनाना है। फाइलेरिया मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है जिसे सामान्यतः हाथीपाँव के नाम से भी जाना जाता है।

एक सेंटिनेल और दूसरा रैंडम साइट:

केयर इंडिया के डीपीओ अभिषेक कुमार ने बताया कि सभी प्रखंड में दो-दो साइट बनाए गए हैं। एक सेंटिनेल और दूसरा रैंडम साइट। जहां पर फाइलेरिया के अधिक केस मिले हैं वहां पर सेंटिनेल साइट बनाए गए हैं। इसके अलावा वैसी जगहों पर भी साइट बनाए गए हैं, जहां पर फाइलेरिया के कम मरीज मिले हैं। ऐसी जगहों पर रैंडम साइट बनाए गए हैं।नाइट ब्लड सर्वे अभियान में स्वास्थ्य विभाग की सहयोगी संस्था केयर इंडिया, पीसीआई और सीफार के जिला प्रतिनिधियों के द्वारा सुपरविजन में सहयोग किया जा रहा है।

फाइलेरिया के परजीवी की मौजूदगी का पता लगाने के लिए लिया जा रहा है सैँपल:

प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. प्रमोद कुमार पांडेय ने बताया कि नाइट ब्लड सर्वे के तहत फाइलेरिया प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां रात में लोगों के रक्त के नमूने लिये जाते हैं। इसे प्रयोगशाला भेजा जाता है और रक्त में फाइलेरिया के परजीवी की मौजूदगी का पता लगाया जाता है। फाइलेरिया के परजीवी रात में ही सक्रिय होते हैं, इसलिए नाइट ब्लड सर्वे से सही रिपोर्ट पता चल पाता । इससे फाइलेरिया के संभावित मरीज का समुचित इलाज किया जाता है।